संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जमीन के एक ऐसे बड़े खेल का खुलासा हुआ है, जिसकी कीमत सुनकर आप चौंक जाएंगे – पूरे 101 करोड़ रुपये! ये खेल किसी छोटे-मोटे प्लाट का नहीं, बल्कि 38 बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन का है, जो मुरादाबाद रोड पर स्थित है। अब सोचिए, सरकारी जमीन पर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे हो गया? यही वो सवाल है, जिसने जिला प्रशासन से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक सबको हिलाकर रख दिया है। इस पूरे मामले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं, कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं, कुछ बड़े नाम सामने आए हैं और अब ये केस इलाहाबाद हाईकोर्ट में 6 जून को सुनवाई के लिए जा रहा है।
मामला संभल तहसील के थाना रायसत्ती इलाके के गांव तख्तगोसाईन में मौजूद पांच गाटा संख्या 206, 207, 238, 242/378 और 279 से जुड़ा है। ये जमीन ऐसे ही किसी किनारे पर नहीं थी, बल्कि मुरादाबाद रोड पर थी, जिसकी वजह से इसकी कीमत आसमान छू रही थी।
जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल को पकड़ने का बीड़ा उठाया जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने। इन दोनों अधिकारियों ने 28 जून को खुद मौके पर जाकर इस भूमि का निरीक्षण किया।
उनकी जांच में जो सामने आया, वो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं था।
कैसे हुआ 101 करोड़ का खेल?
जांच में पाया गया कि ये जमीन, जो असल में सरकारी थी, उसके साथ बड़ी चालाकी से हेराफेरी की गई थी। लेखपाल स्पर्श गुप्ता ने जब दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, तो उनके होश उड़ गए।
साल 2008 में उपसंचालक चकबंदी ने इस बेशकीमती जमीन का नामांतरण (यानी नाम बदलवा कर किसी और के नाम चढ़ाना) एक फर्जी व्यक्ति के नाम कर दिया था। और जनाब, ये नामांतरण किसी असली दस्तावेज के आधार पर नहीं, बल्कि एक फर्जी पट्टे (लीज) के आधार पर किया गया था।
सबसे हैरानी की बात ये थी कि जिस पट्टे के आधार पर ये खेल किया गया, उस पर नगर पालिका का कोई अधिकार ही नहीं था। यानी, जिस अथॉरिटी का उस जमीन पर कोई हक नहीं, उसने फर्जी पट्टा बना दिया और उसी के आधार पर एक फर्जी व्यक्ति के नाम जमीन चढ़ गई।
अब जरा सोचिए, ये कैसे संभव हुआ होगा और कितने लोग इस खेल में शामिल होंगे!
जांच का दायरा बढ़ा; FIR दर्ज
इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद लेखपाल स्पर्श गुप्ता ने 29 जून को 31 नामजद लोगों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। ये FIR संभल पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि इसमें कई बड़े और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद थी।
इसके बाद, 1 जुलाई को सीओ ने लेखपाल स्पर्श गुप्ता के साथ मिलकर मुक्त कराई गई भूमि का नक्शा तैयार करवाया और संबंधित बयान दर्ज किए। पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और एक-एक कड़ी को जोड़ना शुरू किया।
विवेचक सीओ संभल कुलदीप कुमार ने बताया कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और सरकारी जमीन को हड़पने में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
गिरफ्तारियां और फरार आरोपियों पर दबिश
इस मामले में पुलिस ने तेजी दिखाते हुए संभल नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (EO) राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। राजकुमार गुप्ता इस समय शाहजहांपुर नगर निगम में सहायक आयुक्त के पद पर तैनात थे।
उनकी गिरफ्तारी ने इस मामले में बड़े लोगों की संलिप्तता पर मुहर लगा दी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
पालिका के रिटायर्ड मानचित्रक शहाबुद्दीन और पैरोकार माजिद खान सहित अन्य कई आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
विवेचक सीओ संभल कुलदीप कुमार का कहना है कि सरकारी जमीन हड़पने के इस मामले में जो भी दोषी होंगे और जिनके भी नाम विवेचना में प्रकाश में आएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और सभी को इसमें शामिल किया जाएगा। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और जल्द ही बाकी आरोपी भी सलाखों के पीछे होंगे, ऐसी उम्मीद है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 6 जून को सुनवाई
इस पूरे खेल में एक नया मोड़ तब आया, जब सात लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिका दायर करने वालों में आलम वारसी, आजम खान, मुजाहिद, शाकिर अली, मौ.
रफीक, मौ. क़ासिम और शाकिर सबूर शामिल हैं।
इन लोगों ने आखिर किस आधार पर याचिका दायर की है, इस पर अभी ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन अब इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में 6 जून को होनी है। देखना होगा कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और इसकी सुनवाई के बाद इस जमीन घोटाले में और क्या नए खुलासे सामने आते हैं।
फिलहाल, संभल प्रशासन इस पूरे मामले को लेकर गंभीर है और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दे रहा है, लेकिन अभी इस कहानी में कई पन्ने खुलने बाकी हैं। पुलिस की दबिश जारी है और प्रशासन दोषियों पर लगाम कसने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।