चंडीगढ़: सरकारी महकमों में ऊँचे ओहदों पर बैठे अफ़सरों की रिटायरमेंट अक्सर धूम-धाम से होती है। लेकिन हरियाणा में एक अफ़सर की कहानी कुछ और ही कह रही है। प्रदीप डागर, एक सीनियर आईएएस अधिकारी, आज (30 जून) रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उनकी विदाई का माहौल न तो खुशनुमा है और न ही सामान्य। वजह? 661 करोड़ रुपए के एक बड़े बैंक घोटाले में CBI को उनकी तलाश है और डागर साहब फिलहाल भूमिगत चल रहे हैं। ये शायद हरियाणा के इतिहास का पहला ऐसा मामला होगा, जब एक निलंबित आईएएस अधिकारी बिना किसी विदाई समारोह के रिटायर हो रहा है और पीछे-पीछे CBI लगी हुई है।
मामला कुछ ऐसा है कि डागर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पंचकूला जिला अदालत में 26 जून को अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी है, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी है। यानी, एक तरफ सेवा समाप्ति की तारीख, दूसरी तरफ कानून के शिकंजे से बचने की जद्दोजहद।
सरकार ने उन्हें 8 अप्रैल 2024 को ही निलंबित कर दिया था और तब से अब तक वे जांच एजेंसी की पहुँच से बाहर बताए जा रहे हैं। तो आखिर क्या है ये पूरा मामला, जिसमें एक सीनियर अफ़सर की कुर्सी के साथ-साथ इज्जत भी दांव पर लगी है?
लापता IAS और ₹661 करोड़ का बैंक घोटाला: क्या है पूरा मामला?
कथा शुरू होती है 661 करोड़ रुपए के एक विशाल IDFC फर्स्ट-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले से। इस मामले में CBI हरियाणा के कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है।
लेकिन प्रदीप डागर, जो इस पूरे खेल में एक अहम कड़ी बताए जा रहे हैं, जांच एजेंसी की नजरों से ओझल हैं। उन्हें जांच में शामिल होने के लिए कई बार कहा गया, लेकिन वे नहीं आए।
आखिरकार, अपनी गिरफ्तारी की तलवार सिर पर लटकती देख उन्होंने अग्रिम जमानत का रास्ता अपनाया है।
इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के बैंक खातों में 169 करोड़ रुपए की बड़ी गड़बड़ी सामने आई। पुलिस ने इस मामले में एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को धर दबोचा।
ऑपरेटर ने पूछताछ में जो खुलासा किया, वो चौंकाने वाला था। उसने बताया कि यह मोटी रकम चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में किसी आईएएस अफ़सर के कहने पर ट्रांसफर की गई थी।
इस खुलासे के बाद ही जांच की सुई प्रदीप डागर की ओर घूमी, क्योंकि अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक वे HSPCB के मेंबर सचिव रहे थे।
CBI की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पता चला कि यह पैसा सिर्फ बैंक में ट्रांसफर नहीं हुआ, बल्कि बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके शेल कंपनियों के जरिए बाहर निकाला गया। ये एक विभाग से जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी हेराफेरी मानी जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने प्रदीप डागर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी ली है। सिर्फ डागर ही नहीं, बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी CBI की जांच के दायरे में हैं।
अफ़सर की कुर्सी और CBI की तलाश
प्रदीप डागर को इसी साल 8 अप्रैल को परिवहन विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव पद से निलंबित कर दिया गया था। यानी, उनकी सेवाएं पहले ही बाधित हो चुकी थीं।
लेकिन अब रिटायरमेंट के दिन भी उनकी मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। आमतौर पर आईएएस अधिकारियों की रिटायरमेंट पर विभाग की तरफ से एक भव्य विदाई पार्टी रखी जाती है, लेकिन डागर के मामले में ऐसी कोई पार्टी नहीं रखी गई है।
गिरफ्तारी के डर के साए में वे अपनी सेवा के आखिरी दिन भी सामने नहीं आ पाए हैं।
ये एक ऐसी स्थिति है जो हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार देखी जा रही है। एक अधिकारी जो अपनी सेवा के इतने साल ईमानदारी और निष्ठा से करता है, उसे अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर इस तरह छिपना पड़े, ये अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
हालांकि, रिटायरमेंट के बाद भी उनके खिलाफ चल रही जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सरकारी नियमों के मुताबिक, यदि किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो उनकी पेंशन और अन्य लाभों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अगला पड़ाव: 2 जुलाई की सुनवाई
अब इस पूरे मामले में अगला अहम पड़ाव 2 जुलाई को है। इसी दिन पंचकूला जिला अदालत में प्रदीप डागर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।
अगर अदालत उन्हें राहत नहीं देती है, तो CBI की कार्रवाई और तेज हो सकती है। ऐसे में डागर के पास आत्मसमर्पण करने या फिर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के सिवाय कोई और चारा नहीं बचेगा।
करोड़ों की संपत्ति और सवालों के घेरे में
डागर की अचल संपत्ति की जानकारी भी सार्वजनिक है, जो उन्होंने सरकार को दी थी। 2025-26 के इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) के अनुसार, उनके पास रोहतक और गुरुग्राम में करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति है।
दस्तावेजों के मुताबिक:
- रोहतक में 3,181 वर्ग गज की जमीन है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई है। यह जमीन उन्हें साल 2010 में उनके ससुर वजीर सिंह से उपहार में मिली थी।
- इस रोहतक की भूमि से उन्हें हर साल करीब एक लाख रुपए की आय होती है।
- गुरुग्राम में भी उनके पास 3 महंगी प्रॉपर्टी हैं।
इन संपत्तियों का विवरण ऐसे समय में सामने आया है जब डागर साहब खुद CBI की नजरों से दूर हैं और 661 करोड़ के घोटाले में नाम सामने आ रहा है। यह मामला दिखाता है कि कैसे सत्ता के गलियारों में बैठे कुछ लोग अपने पद का दुरुपयोग कर बड़े-बड़े घोटालों को अंजाम देते हैं, और जब शिकंजा कसता है, तो किस तरह से भागने पर मजबूर होते हैं।
प्रदीप डागर का मामला अभी कानूनी दांव-पेच और जांच एजेंसियों की मशक्कत से गुजरेगा, जिसके नतीजे आने वाले दिनों में और भी स्पष्ट होंगे।

