इटावा: बुधवार की अलसुबह थी। शहर अभी ठीक से जागा भी नहीं था कि दिल्ली-कानपुर हाईवे पर एक खौफनाक चीख-पुकार मच गई। हमीरपुर से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस अपने गंतव्य की ओर सरपट भाग रही थी। बस में बैठे लगभग 60 यात्री, जिनमें से अधिकतर हमीरपुर, महोबा, बांदा और औरैया जैसे जिलों के मेहनतकश लोग थे, अपने सपनों की नगरी दिल्ली या नोएडा पहुंचकर रोजी-रोटी की जद्दोजहद में लगने वाले थे। कुछ शायद गहरी नींद में थे, तो कुछ हल्की झपकी ले रहे थे। तभी अचानक, विचारपुरा गांव के ठीक सामने पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बस को ऐसी जोरदार टक्कर मारी कि यात्रियों के मुंह से चीखें निकल गईं।
टक्कर इतनी भीषण थी कि बस के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कांच टूटने की आवाजें, यात्रियों के कराहने और चिल्लाने की आवाजों ने उस सन्नाटे को तोड़ दिया।
चंद मिनटों पहले तक जो यात्री सुकून की नींद में थे, वे अचानक मौत के मुंह से बाहर निकल आए थे। इस हादसे में कुल सात यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
उनके सिर, पैर और कमर पर गहरी चोटें आई थीं। बस के अंदर हर तरफ दहशत का माहौल था।
हादसे का मंजर और बचाव कार्य
हादसा सुबह करीब तीन बजे हुआ। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में हाईवे पर स्लीपर बस और ट्रक के बीच की यह भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए।
बस में फंसे यात्रियों के लिए एक-एक पल भारी था। सूचना मिलते ही यातायात प्रभारी संजय यादव और सिविल लाइंस थाना प्रभारी केके मिश्रा अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने बिना वक्त गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। पुलिसकर्मियों ने अपनी सूझबूझ और मुस्तैदी से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया।
एक-एक कर घायल यात्रियों को बस से बाहर निकाला गया। उनकी हालत देखकर तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई और सभी सात घायलों को तुरंत इटावा के जिला अस्पताल भेजा गया।
अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उनका फौरन इलाज शुरू किया। हादसे के बाद सड़क पर मलबा फैल गया था और यातायात भी बाधित हो गया था, जिसे पुलिस ने तुरंत हटवाकर व्यवस्था को बहाल किया।
घायलों की पहचान और स्वास्थ्य अपडेट
इस हादसे में जो सात यात्री घायल हुए, उनमें महोबा निवासी सुरेश (40) पुत्र पुन्ना, राठ हमीरपुर निवासी रजनी (34) पत्नी छोटेलाल, रीना (40) पत्नी रामचरन, गंगा (45) पत्नी रामवीर, रामवीर (35) पुत्र छेदी, केदार (34) पुत्र काशीराम और महोबा निवासी माया (40) पत्नी सुरेश शामिल हैं। इन सभी को सिर, पैर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं।
जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।
घायल हुए इन यात्रियों में कई तो परिवार के सदस्य थे, जो एक साथ दिल्ली-नोएडा में काम की तलाश में जा रहे थे। इस हादसे ने उनके सपनों पर एक पल के लिए ब्रेक लगा दिया है।
पुलिस ने घायलों के परिजनों को भी सूचित कर दिया है, ताकि वे अपने प्रियजनों तक पहुंच सकें।
अन्यों को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाया
बस में सिर्फ सात लोग ही घायल नहीं हुए थे, बल्कि करीब 50 से ज्यादा अन्य यात्री भी सवार थे, जो इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी थे। वे सभी सुरक्षित थे, लेकिन सहमे हुए थे।
उनके मन में उस खौफनाक मंजर की यादें ताजा थीं। पुलिस ने मानवता दिखाते हुए इन सभी यात्रियों की सुध ली और उन्हें दूसरी बसों के जरिए उनके गंतव्य स्थानों तक सुरक्षित रवाना करने का इंतजाम किया।
यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी यात्री बीच रास्ते में न फंसे और अपनी मंजिल तक पहुंच सके।
इन यात्रियों में भी ज्यादातर ऐसे थे जो ग्रामीण इलाकों से दिल्ली और नोएडा में मजदूरी या छोटे-मोटे काम करने के लिए जा रहे थे। हादसे के बाद उनके चेहरों पर डर साफ झलक रहा था।
पुलिस की इस मदद से उन्हें काफी राहत मिली और वे सुरक्षित आगे बढ़ पाए।
जांच का शुरुआती आकलन
इस भीषण हादसे के बाद पुलिस ने तुरंत अपनी जांच शुरू कर दी है। मौके से क्षतिग्रस्त बस और ट्रक को हटाकर सड़क को साफ कराया गया है।
प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार हादसे की मुख्य वजह ट्रक चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही बताई जा रही है। ऐसा लगता है कि ट्रक चालक ने या तो झपकी ले ली होगी, या फिर वह इतनी तेज गति से चल रहा था कि उसने आगे चल रही स्लीपर बस को ठीक से देख नहीं पाया और पीछे से टक्कर मार दी।
पुलिस अब ट्रक चालक की तलाश कर रही है और उससे पूछताछ की जाएगी ताकि हादसे की असली वजह का पता चल सके। साथ ही, दोनों वाहनों की तकनीकी जांच भी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि क्या किसी यांत्रिक खराबी की वजह से तो यह हादसा नहीं हुआ।
फिलहाल, पुलिस इस मामले की गहराई से जांच में जुटी हुई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

