कन्नौज: चिलचिलाती धूप, माथे पर पसीने की बूँदें और हवा में घुली चिपचिपी उमस, कुछ ऐसा ही था पिछले कई दिनों से कन्नौज का मिजाज। सूरज आग बरसा रहा था और लोग घरों में दुबकने को मजबूर। हर सुबह एक नई चुनौती लेकर आती थी, जब गर्मी का पारा चढ़ने लगता और पंखे-कूलर भी दम तोड़ते से लगते। लेकिन मंगलवार सुबह का नज़ारा कुछ और था। आसमान में काले बादलों ने डेरा डाला, ठंडी हवाओं ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाई और तापमान में अचानक आई गिरावट ने भीषण गर्मी से बेहाल लोगों को साँस लेने का मौका दिया। यह अचानक हुआ बदलाव किसी वरदान से कम नहीं लगा, जिसने पूरे शहर को थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन राहत की साँस दी।
पिछले कई हफ़्तों से कन्नौज के लोग गर्मी से बेहाल थे। दिन का तापमान भले ही सरकारी आँकड़ों में 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी।
चिपचिपी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा था। घर से बाहर निकलना किसी तपस्या से कम नहीं था और जो लोग रोज़गार के लिए बाहर निकलते थे, उनके लिए हर कदम एक चुनौती जैसा था।
शाम होते-होते भी गर्मी कम होने का नाम नहीं लेती थी, जिससे रातें भी बेचैनी में कटती थीं। सोमवार की शाम भी कुछ ऐसी ही थी, जब सूरज ढलने के बाद भी हवा में गर्मी और उमस घुली हुई थी, और लोग छत पर या बालकनी में जाकर भी सुकून नहीं पा पा रहे थे।
मौसम का अचानक बदला मिजाज
मंगलवार सुबह कन्नौज वासियों के लिए एक सुखद आश्चर्य लेकर आई। सूर्योदय के साथ ही आसमान में बादलों का घना घेरा दिखाई दिया।
यह नज़ारा कुछ ही दिनों पहले तक असंभव सा लग रहा था। धीरे-धीरे बादलों की दस्तक के साथ ही हवाओं ने भी अपनी दिशा बदली और ठंडी-ठंडी बयार चलने लगी।
यह हवा इतनी राहत भरी थी कि लोगों ने अपने कमरों की खिड़कियाँ खोल दीं और खुली हवा का आनंद लिया। सुबह की यह ताज़ी हवा मानो अपने साथ शहर की सारी थकान और बेचैनी बहाकर ले गई हो।
देखते ही देखते मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया और लोगों के चेहरों पर एक हल्की-सी राहत की रेखा खिंच गई।
मौसम विभाग के स्थानीय स्टेशनों ने भी इस बदलाव को दर्ज किया। पिछले दिनों जहाँ तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच मंडरा रहा था, वहीं मंगलवार सुबह इसमें करीब 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
सुबह का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस कम था। इस गिरावट ने लोगों को बड़ी राहत दी।
ठंडी हवाओं के साथ कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई, जिसने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। हालांकि, यह बूंदाबांदी इतनी तेज़ नहीं थी कि सड़कों पर पानी भर सके या भीषण गर्मी का पूरा असर खत्म कर सके, लेकिन यह उम्मीद की एक किरण ज़रूर जगा गई।
झमाझम बारिश का इंतज़ार अभी जारी
कन्नौज में लोग अब भी झमाझम बारिश का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से आसमान में बादल तो कई बार आए, लेकिन वे बिन बरसे ही लौट गए।
इस 'आए बादल चले बादल' के खेल ने लोगों की उम्मीदों को कई बार तोड़ा था। हर बार जब आसमान में बादल घिरते, तो लोगों को लगता कि अब शायद गर्मी से स्थायी निजात मिल जाएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं था।
हल्की हवाएं और कुछ देर के लिए बदली का माहौल बनता और फिर से सूरज अपनी तपिश दिखाने लगता। यही वजह है कि मंगलवार की यह राहत भी लोगों के लिए एक अस्थायी समाधान जैसी है।
शहर के बाज़ारों में, गलियों में और घरों में लोग अब भी एक ही बात करते नज़र आ रहे हैं – “कब होगी असली बारिश?” किसानों के लिए भी यह बारिश बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनकी फसलों को जीवन मिलेगा और भूमि को भी पर्याप्त नमी मिल पाएगी। यह अस्थायी राहत बेशक सुकून देने वाली है, लेकिन कन्नौज के लोग जानते हैं कि जब तक मूसलाधार बारिश नहीं होती, तब तक गर्मी का प्रकोप पूरी तरह से खत्म नहीं होगा।
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आसमान से ऐसी ही कृपा बरसेगी, जिससे लोगों को स्थायी रूप से इस भीषण गर्मी से छुटकारा मिल सकेगा और धरती भी अपनी प्यास बुझा पाएगी।

