लखीमपुर-खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले में बुधवार का दिन यूँ तो सामान्य था, लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में एक खास हलचल थी। वजह थी, वो जंग जो हर साल मानसून के साथ आने वाली बीमारियों से लड़ी जाती है। इस बार इस जंग को शुरू करने का बिगुल बजाया जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने। उन्होंने सिर्फ एक फीता काटकर या झंडी दिखाकर रस्म अदायगी नहीं की, बल्कि साफ-सफाई और जागरूकता के एक बड़े अभियान की शुरुआत की, जिसकी धमक पूरे जुलाई महीने तक जिले के कोने-कोने में सुनाई देगी। आप पूछेंगे, क्या था खास इस शुरुआत में? दरअसल, ये सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों को बीमारियों के चंगुल से बचाने की एक कोशिश थी, जिसकी अगुवाई खुद जिले के मुखिया कर रहे थे।
सुबह का वक्त था, कलेक्ट्रेट का आंगन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ताओं, आशा बहनों और नगर पालिका के कर्मचारियों से गुलजार था। सभी के चेहरों पर एक मकसद का भाव था, हाथों में तख्तियां थीं जिन पर बीमारियों को दूर भगाने वाले नारे लिखे थे।
इन नारों में सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि उस अनुभव की कसक थी जो हर साल जलभराव, गंदगी और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से जूझता है। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने जैसे ही फीता काटा और जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाई, उत्साह से भरे इन साथियों की टोली 'उत्तर प्रदेश ने ठाना है, मस्तिष्क ज्वर भगाना है' और 'साफ-सफाई अपनाना है, बीमारी दूर भगाना है' जैसे नारों के साथ आगे बढ़ चली।
ये सिर्फ एक रैली नहीं थी, ये बीमारियों के खिलाफ छेड़े गए एक महीने के विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का आगाज था, जो 1 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक पूरे जिले में चलेगा।
क्यों खास है यह अभियान और क्या है इसका मकसद?
लखीमपुर-खीरी जैसे तराई के जिलों में मानसून के आते ही संचारी रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जलभराव, मच्छरों का प्रजनन और गंदगी, ये सब मिलकर कई गंभीर बीमारियों को न्योता देते हैं, जिनमें मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफेलाइटिस), डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड प्रमुख हैं।
इन बीमारियों का असर सिर्फ स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति और बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ता है। कई बार तो ये बीमारियाँ जानलेवा भी साबित होती हैं।
ऐसे में, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह की अगुवाई में शुरू किया गया यह अभियान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर चुनौती से निपटने की सुनियोजित रणनीति है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य बहुत साफ है: जिले को बीमारियों से मुक्त करना। इसके लिए तीन प्रमुख मोर्चों पर काम किया जाएगा।
पहला, साफ-सफाई पर विशेष जोर। सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि गाँवों और दूर-दराज के इलाकों में भी सार्वजनिक स्थानों, नालियों और घरों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी।
दूसरा, जलभराव की रोकथाम। बारिश के मौसम में पानी का जमाव मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श स्थिति पैदा करता है।
इस अभियान के तहत ऐसे सभी संभावित स्थलों की पहचान कर उन्हें सूखा रखने या पानी निकासी की व्यवस्था करने पर काम होगा। और तीसरा, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना।
इसमें लार्वा-साइडल स्प्रे का उपयोग, पुराने बर्तनों, टायरों और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को हटाना शामिल है जहाँ पानी जमा हो सकता है। इन सब के साथ-साथ जन जागरूकता बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
क्योंकि जब तक आम जनता खुद जागरूक होकर इस लड़ाई में शामिल नहीं होगी, तब तक किसी भी अभियान की सफलता अधूरी रहेगी।
कैसे आगे बढ़ेगी यह जंग: स्वास्थ्य, आशा और नगर पालिका की भूमिका
इस अभियान की रीढ़ हैं वे लोग जो सीधे जमीन पर काम करते हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ.
संतोष गुप्ता की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि स्वास्थ्य विभाग इस अभियान में पूरी तरह से जुटा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की पहचान करेंगी, उन्हें दवाएँ देंगी और जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुँचाने में मदद करेंगी।
आशा कार्यकर्ताएँ, जो ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की पहली कड़ी हैं, उनकी भूमिका यहाँ सबसे अहम है। वे लोगों को साफ-सफाई के महत्व, पानी उबालकर पीने और मच्छरों से बचाव के उपायों के बारे में बताएंगी।
साथ ही, बच्चों में पोषण और टीकाकरण के महत्व पर भी जोर देंगी, क्योंकि कुपोषित बच्चे संक्रामक रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
नगर पालिका और ग्राम पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में साफ-सफाई, कूड़ा निस्तारण और जलभराव रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगी। नालियों की सफाई, फॉगिंग और एंटी-लार्वा स्प्रे का छिड़काव उनकी प्राथमिकताओं में होगा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित विभाग एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर काम करें ताकि अभियान का कोई भी पहलू छूटने न पाए। यह सहयोगात्मक प्रयास ही इस महीने भर चलने वाले अभियान को सफल बना सकता है।
रैली के दौरान हाथों में लिए गए नारे सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि एक साझा संकल्प थे। 'उत्तर प्रदेश ने ठाना है, मस्तिष्क ज्वर भगाना है' का सीधा मतलब है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर बीमारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, 'साफ-सफाई अपनाना है, बीमारी दूर भगाना है' एक सरल संदेश है जो हर नागरिक को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी याद दिलाता है।
कलेक्ट्रेट से सीएमओ कार्यालय तक: जागरूकता का सफर
रैली की शुरुआत कलेक्ट्रेट परिसर से हुई, जहां जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। कलेक्ट्रेट, जो कि जिले का प्रशासनिक केंद्र है, से शुरू होकर यह रैली शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी।
हर सड़क, हर गली से गुजरते हुए रैली ने एक संदेश छोड़ा – बीमारियों से बचाव हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। राह चलते लोगों ने भी इस रैली को उत्सुकता से देखा।
कई जगह लोगों ने रुककर तख्तियों पर लिखे संदेश पढ़े। यह यात्रा सिर्फ भौगोलिक दूरी तय नहीं कर रही थी, बल्कि लोगों के दिमाग में जागरूकता के बीज भी बो रही थी।
आखिरकार, यह रैली मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर जाकर समाप्त हुई, जो इस बात का प्रतीक था कि स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र ही इस अभियान का अंतिम पड़ाव है, जहाँ से आगे की रणनीति और क्रियान्वयन को अंजाम दिया जाएगा।
जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने इस मौके पर सभी विभागों को पूरी निष्ठा के साथ काम करने और जनता से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि "स्वच्छ और स्वस्थ समाज ही एक मजबूत प्रदेश की नींव रख सकता है।
" यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि लखीमपुर-खीरी को एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि आने वाला महीना इस जिले में बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में कितनी बड़ी जीत दिलाता है।

