अंबाला: हरियाणा के अंबाला में मंगलवार की सुबह करीब 7 बजे, एक पिता अपने 4 साल के मासूम बेटे को लेकर खेत में दादा को खाना देने निकला था। किसे पता था कि चंद मिनटों की खेल-खेल में, वो मासूम एक 220 फीट गहरे बोरवेल की काली दुनिया में समा जाएगा। गांव धन्यौड़ा का निर्भय अब जिंदगी और मौत के बीच एक भयानक जंग लड़ रहा है, जिसे बचाने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला, NDRF, SDRF और सेना की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। हर गुजरते पल के साथ धड़कनें तेज हो रही हैं, और दुआओं का सिलसिला भी जारी है।
ये कहानी है एक छोटे से बच्चे की, जिसके लिए खेत की वो सुबह खेल का मैदान थी, लेकिन एक लापरवाही उसे गहरे अंधेरे में धकेल गई। निर्भय अपने पिता मनजीत के साथ दादा करनैल सिंह को खाना देने खेत पर गया था।
दादा खेतों में काम कर रहे थे और पिता मनजीत भी उनके साथ जुड़ गए। निर्भय दादा के पास बैठा था, खेलते-खेलते कब वो कुछ दूरी पर चला गया और कब उसकी नजर खुले बोरवेल पर पड़ी, ये शायद किसी ने सोचा भी नहीं था।
सुबह का सफर; और वो भयानक हादसा
मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे का वक्त था। मनजीत अपने पिता करनैल सिंह के लिए रोटी लेकर खेत जा रहे थे।
4 साल का निर्भय भी मचल गया कि वो भी साथ जाएगा। पिता ने सोचा, चलो बच्चा भी घूम लेगा।
दोनों खेत पहुंचे। मनजीत अपने काम में लग गए, दादा करनैल सिंह रोटी खाने लगे।
निर्भय दादा के पास ही बैठा था। कुछ देर बाद, मासूम बच्चा अपनी ही धुन में खेलने लगा और खेलते-खेलते बोरवेल के करीब पहुंच गया।
मनजीत ने बाद में जो बताया, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उन्होंने बताया कि निर्भय बोरवेल के पास जाकर उसमें मिट्टी फेंकने लगा।
जब मिट्टी फेंकने पर नीचे से आवाज़ आई, तो मासूम झांककर देखने लगा कि आखिर नीचे क्या है। शायद बोरवेल के पास की मिट्टी बारिश या ओस से गीली थी।
निर्भय का पांव फिसला और देखते ही देखते वो उस 220 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरा। एक जोरदार आवाज़ आई, जिसने मनजीत और करनैल सिंह का ध्यान अपनी ओर खींचा।
वो तुरंत बोरवेल की ओर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनका जिगर का टुकड़ा पाताल से भी गहरी खाई में जा चुका था।
चीखों से गूंजा खेत; प्रशासन तक पहुंची खबर
पिता और दादा ने बोरवेल के पास पहुंचकर आवाज़ें लगाईं, लेकिन सिर्फ खामोशी थी। उन्होंने अपने स्तर पर हर कोशिश की, हाथ-पांव मारे, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।
करीब 7:30 बजे, जब कोई उम्मीद नहीं बची, तो उन्होंने डायल 112 पर फोन करके पुलिस को सूचना दी। तब तक दोनों पिता-पुत्र बोरवेल के पास खड़े रोते-चिल्लाते रहे।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम हरकत में आई और उन्होंने तुरंत फायर ब्रिगेड, NDRF और सेना को मदद के लिए बुलाया। अंबाला के DC अजय सिंह तोमर भी तुरंत धन्यौड़ा गांव पहुंच गए और खुद रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करने लगे।
गांव के लोग भी बड़ी संख्या में मदद के लिए मौके पर जमा हो गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी; हर चुनौती से जंग
निर्भय को बोरवेल से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए NDRF, SDRF और सेना की टीमें कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। ये ऑपरेशन बेहद पेचीदा है क्योंकि बोरवेल 220 फीट गहरा है और सबसे बड़ी चुनौती ये है कि करीब 60 फीट की गहराई से उसमें पानी भरा हुआ है।
इस पानी की वजह से बच्चे की सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो रहा था।
बच्चे की लोकेशन का पता लगाने के लिए रस्सी के सहारे विशेष अंडरवॉटर कैमरे बोरवेल में उतारे गए। NDRF टीम के एक सदस्य ने बताया कि कैमरे में बच्चे का एक हाथ ऊपर की ओर दिखाई दे रहा है, जबकि उसकी गर्दन नीचे की तरफ झुकी हुई है।
यह स्थिति रेस्क्यू टीम के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि बच्चे को इस अवस्था में ऊपर खींचना और भी मुश्किल हो रहा है।
कैमरे में दिखा मासूम का हाथ; कुंडी ने दिया धोखा
रेस्क्यू टीम ने बच्चे को बाहर निकालने के लिए एक खास तरह की कुंडी (हुक) तैयार की। उम्मीद थी कि ये कुंडी किसी तरह निर्भय के कपड़ों में फंस जाएगी और उसे ऊपर खींचा जा सकेगा।
टीम ने कई बार कुंडी बोरवेल में डाली, बड़ी सावधानी से उसे हिलाया-डुलाया, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। बच्चे के कपड़ों में कुंडी नहीं फंस पाई।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे की जिस अवस्था में है, उसमें कपड़े ठीक से फंसना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही, उसका एक हाथ ऊपर की तरफ होने के कारण भी उसे बाहर निकालने में दिक्कतें आ रही हैं।
मौके पर JCB और अन्य भारी मशीनें भी मंगाई गई हैं ताकि जरूरत पड़ने पर बोरवेल के समानांतर एक गड्ढा खोदा जा सके। हालांकि, इस तरीके में भी काफी समय लगेगा और बच्चे तक पहुंचने में घंटों लग सकते हैं।
पूरा गांव, प्रशासन और सेना हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द निर्भय को इस अंधेरे कुएं से बाहर निकाला जा सके। समय बीतता जा रहा है और हर कोई उम्मीद लगाए बैठा है कि जल्द ही कोई चमत्कार होगा और मासूम निर्भय सुरक्षित बाहर आ जाएगा।
रेस्क्यू टीमें लगातार अपनी रणनीति बदल रही हैं और हर छोटे से छोटे पहलू पर ध्यान दे रही हैं ताकि इस मुश्किल ऑपरेशन में सफलता मिल सके।

