सुपौल: बिहार के सुपौल जिले में वीरपुर थाना क्षेत्र का गीदरमारी वार्ड संख्या-5, बनेलीपट्टी गांव. सोमवार का दिन था और यहां का माहौल अचानक गरमा गया जब एक प्रार्थना सभा को लेकर जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया. गांववाले एकजुट हुए और सीधे-सीधे नेपाल से आए चार लोगों पर गंभीर आरोप जड़ दिए – आरोप था कि ये लोग धार्मिक प्रलोभन देकर भोले-भाले ग्रामीणों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसा रहे हैं. बात जंगल की आग की तरह फैली, भीड़ जुटी और फिर शुरू हुआ जोरदार बवाल. गांववालों के गुस्से का पारा चढ़ा, और बात जब पुलिस तक पहुंची तो तुरंत एक्शन हुआ. वीरपुर थाना की पुलिस टीम बिना देर किए मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे लोगों के साथ-साथ आरोपों के घेरे में आए सभी संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले गई. अब इस पूरे मामले में FIR दर्ज हो गई है और पुलिस ने जांच का भरोसा दिलाया है.
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक दिन का किस्सा नहीं है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में इस तरह की 'प्रार्थना सभाएं' लंबे समय से चल रही हैं. इन सभाओं में लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं – जैसे बेहतर जीवन का वादा, बीमारियों से मुक्ति की गारंटी और आर्थिक परेशानियों से राहत दिलाने का आश्वासन.
इन दावों के ज़रिए लोगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जाता है. वहीं, नेपाल से आए जिन चार लोगों पर आरोप लगे हैं, उन्होंने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है.
उनका साफ कहना है कि उनका मकसद केवल समाज सेवा और आध्यात्मिक संदेश फैलाना है, न कि किसी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालना. फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की बात कह रही है.
कैसे शुरू हुआ विवाद; गांववालों के आरोप
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह सारा वाकया किशुनदेव राम के घर पर चल रही एक प्रार्थना सभा से शुरू हुआ. दावा है कि इस सभा में करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे, और यहीं पर धर्म परिवर्तन की बातें हो रही थीं.
जैसे ही इस गुप्त बैठक की खबर आसपास के ग्रामीणों को मिली, वे भड़क उठे. उन्होंने तुरंत इसका विरोध किया और बिना देर किए पुलिस को सूचना दी.
गांववालों ने वीरपुर थाने में एक लिखित आवेदन भी दिया, जिसमें कार्रवाई की मांग की गई. इस आवेदन में नेपाल के जिन चार लोगों के नाम दर्ज कराए गए हैं, वे हैं रामानंद शाह तेली, मंगल देवी विश्वकर्मा, उर्मिला देवी यादव और हंसा देवी चौधरी.
ये सभी नेपाल के सप्तरी जिले से बताए जा रहे हैं.
'गोपनीय तरीके से चल रहा था काम', महिलाओं को बनाया जा रहा था निशाना
ग्रामीणों के आरोप और भी गंभीर हैं. उनका कहना है कि बसंतपुर प्रखंड और इंडो-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में यह गतिविधि पिछले कई सालों से गोपनीय तरीके से चल रही है.
उनके मुताबिक, इन इलाकों के अलग-अलग गांवों में छोटी-छोटी बैठकें आयोजित की जाती हैं, जहां लोगों को, खासकर महिलाओं को, धार्मिक प्रवचन सुनाए जाते हैं. इन प्रवचनों के दौरान उन्हें बेहतर जीवन, बीमारी से मुक्ति, आर्थिक समृद्धि और दूसरी सुविधाओं का भरोसा दिया जाता है, ताकि वे अपना धर्म बदल लें.
गांववालों का दावा है कि यह एक सुनियोजित प्रयास है, जिसका मकसद गरीब और पिछड़े लोगों को अपनी तरफ खींचना है.
नेपाल टीम का सफर और पुलिस का एक्शन
स्थानीय लोगों ने नेपाल से आई टीम के सफर का भी पूरा ब्यौरा दिया. उनके अनुसार, सोमवार को नेपाल के सप्तरी जिले से चार सदस्यीय टीम सार्वजनिक परिवहन से पहले भंटाबारी पहुंची.
फिर वहां से पैदल चलकर सीमा पार कर भीमनगर आई और फिर एक ऑटो रिक्शा से बनेलीपट्टी पहुंची. ग्रामीणों का आरोप है कि यह टीम पहले से कुछ ऐसे परिवारों के संपर्क में थी, जिनके घरों पर ये प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं.
हंगामे के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उसने तुरंत सभी संबंधित लोगों को सुरक्षा के बीच थाने पहुंचाया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो.
हालांकि, नेपाल से आए लोगों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है. उनका साफ कहना है कि वे किसी भी तरह का धर्म परिवर्तन नहीं कराते हैं.
उनका दावा है कि वे केवल समाज सेवा और धार्मिक प्रवचन का काम करते हैं, और लोग अपनी इच्छा से इन प्रार्थना सभाओं में शामिल होते हैं. उनका यह भी कहना है कि किसी भी व्यक्ति पर धर्म परिवर्तन के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जाता.
अब मामला पुलिस के हाथ में है. पुलिस का कहना है कि वे सभी उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों को इकट्ठा कर रहे हैं, और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही कानून के मुताबिक निष्पक्ष और सही कार्रवाई की जाएगी.
गांव में अभी भी तनाव का माहौल है, और सभी की निगाहें पुलिस की आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

