हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी का भी सिर चकरा जाए। जहां पुलिस वारंट लेकर एक शख्स को पकड़ने गई थी, लेकिन एक छोटे से नाम के कंफ्यूजन में उन्होंने पड़ोसी मोहल्ले के दूसरे शिवराज को दबोच लिया। और बात सिर्फ पकड़ने तक ही नहीं रुकी, परिजनों का आरोप है कि थाने में उसे इतना पीटा गया कि बेचारे की हालत बिगड़ गई। पहले जिला अस्पताल, फिर वहां से कानपुर रेफर करना पड़ा। अब आप सोचिए, जिसकी कोई गलती नहीं, जो शायद घर पर चैन से बैठा हो, उसे ऐसे पकड़कर ले जाया जाए और पिटाई भी हो जाए, तो कैसा लगेगा?
मामला हमीरपुर के सदर कोतवाली इलाके के मेरापुर का है। ये घटना शनिवार शाम करीब सात बजे की है।
पुलिस को एक वारंटी की तलाश थी, जिसका नाम शिवराज था। अब होता ये है कि एक ही नाम के कई लोग एक ही मोहल्ले में या आसपास मिल जाते हैं।
यहीं पर पुलिस से चूक हो गई। वो ढूंढ रहे थे किसी और शिवराज को, लेकिन उठा लाए मोहल्ले के ही दूसरे शिवराज सिंह को।
ये वो शिवराज सिंह थे, जिनके परिवार का कहना है कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था, कम से कम इस वारंट वाले मामले से तो बिल्कुल नहीं। परिवार के लोग लाख गिड़गिड़ाते रहे, समझाते रहे कि भैया, ये वो शिवराज नहीं है जिसे आप ढूंढ रहे हो, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी।
उनका आरोप है कि पुलिस शिवराज सिंह को सीधे थाने ले गई।
पुलिस कस्टडी में 'थर्ड डिग्री' के आरोप और बिगड़ी हालत
शिवराज सिंह के परिवार वालों की मानें तो थाने ले जाने के बाद उनके साथ खूब मारपीट हुई। बहन रूपा ने तो सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि एसआई सुरेंद्र पाल सिंह ने उनके भाई के खिलाफ 2018 के एक मामले में वारंट होने की बात कहकर उन्हें उठाया था।
उनका कहना है कि पुलिस ने थाने में शिवराज सिंह को बेरहमी से पीटा, जिसे 'थर्ड डिग्री' देना भी कह सकते हैं। पिटाई इतनी जबरदस्त थी कि शिवराज सिंह की तबीयत खराब होने लगी।
जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो पुलिस को शायद अपनी गलती का एहसास हुआ, या फिर लगा कि मामला हाथ से निकल रहा है। आनन-फानन में शिवराज सिंह को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने जो देखा, वो और भी चौंकाने वाला था।
जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर ने बताया कि जब शिवराज सिंह को उनके पास लाया गया, तो वो घायल अवस्था में थे। डॉक्टर ने साफ तौर पर कहा कि यह 'फिजिकल असॉल्ट' यानी शारीरिक हमला का मामला लग रहा है।
शिवराज सिंह के सिर, चेहरे और छाती पर साफ-साफ चोटों के निशान थे। प्राथमिक उपचार देने के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें कानपुर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया।
सोचिए, एक आम आदमी जिसका कोई कसूर नहीं, पुलिस की गलती की वजह से उसे इतनी चोटें आईं कि उसे दूसरे शहर इलाज के लिए भेजना पड़ गया। परिवार के लिए यह कितना दर्दनाक और परेशान करने वाला पल रहा होगा।
पीड़ित शिवराज और बहन के गंभीर आरोप
घायल शिवराज सिंह ने खुद भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी वजह के घर से उठाया।
थाने ले जाने के बाद स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ), सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और कई कांस्टेबलों ने मिलकर उनकी पिटाई की। शिवराज की बहन रूपा ने तो पुलिस पर लापरवाही और बाद में गलती मानने का भी आरोप लगाया है।
रूपा का कहना है कि जब उनके भाई को थाने ले जाया जा रहा था, तब उन्होंने पुलिस अधिकारियों को समझाने की बहुत कोशिश की कि ये वो शिवराज नहीं है जिसे आप ढूंढ रहे हैं, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। रूपा ने बताया कि बाद में पुलिस ने खुद ये बात मानी कि उनसे गलती हो गई और उन्होंने दूसरे शिवराज को पकड़ लिया था।
सवाल ये उठता है कि जब पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो क्या तब तक बहुत देर हो चुकी थी? क्या तब तक शिवराज सिंह इतनी चोटें खा चुके थे?
थाना प्रभारी का खंडन और जांच की बात
इस पूरे मामले पर सदर कोतवाली प्रभारी राम आसरे सरोज का बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जिस शिवराज के खिलाफ वारंट था, उसकी जगह उसी मोहल्ले के दूसरे शिवराज को पुलिस गलती से पकड़ लाई थी।
लेकिन, मारपीट के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। राम आसरे सरोज का कहना है कि जब युवक को थाने में पता चला कि उसे गलती से पकड़ लिया गया है, तो उसने वहां हंगामा करना शुरू कर दिया।
थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि पकड़े गए युवक शिवराज सिंह के खिलाफ भी पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, उन्होंने मारपीट के आरोपों को नकारा है।
फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच जारी है। अब ये जांच किस दिशा में जाएगी और सच क्या है, ये तो वक्त ही बताएगा।
लेकिन, एक बात तो साफ है कि पुलिस की इस लापरवाही ने एक परिवार को भारी परेशानी में डाल दिया है और सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

