अमृतसर: पंजाब का अमृतसर, जहां गुरु की नगरी की शांति और इतिहास गूंजता है, वहीं से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। सोचिए ज़रा, एक 17 साल का लड़का, अमरजोत, घर से निकलता है और फिर कभी वापस नहीं आता। उसकी ज़िंदगी को कुछ पैसों के लिए बुझा दिया जाता है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि महिता थाने के अंतर्गत आने वाले महिसमपुर गांव की हकीकत है, जहां करीब दो महीने पहले अमरजोत को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था।
पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया था। लगातार 60 दिनों तक की गई जांच-पड़ताल, छापों और अथक प्रयासों के बाद, अब जाकर पुलिस के हाथ उन दो मुख्य शूटरों तक पहुंचे हैं, जिन्होंने इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।
पता चला है कि ये दोनों शूटर सगे भाई हैं और ये किसी और ही मामले में चंडीगढ़ की मॉडल जेल में बंद थे। पुलिस उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर अमृतसर लेकर आई और फिर जो खुलासे हुए, उन्होंने सबको चौंका दिया।
रहस्यमय हत्या और दो सगे भाइयों का कनेक्शन
थाना महिता की एसएचओ सिमरनजीत कौर ने इस मामले की परतें उधेड़ते हुए बताया कि अमरजोत को गोली मारने वाले आरोपी रजत उर्फ खुण्डा और आर्यन हैं। ये दोनों सगे भाई अमृतसर के ही रहने वाले हैं।
यह अपने आप में एक अजीबोगरीब इत्तेफाक था कि हत्या के मुख्य आरोपी किसी और जुर्म में पहले से ही जेल की सलाखों के पीछे थे। पुलिस ने अमरजोत हत्याकांड में उनका नाम सामने आने के बाद उन्हें चंडीगढ़ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लिया और गहन पूछताछ शुरू की।
पुलिस की पूछताछ में इन दोनों भाइयों ने जो बताया, वो इस पूरी वारदात की एक खौफनाक तस्वीर पेश करता है। उन्होंने कबूल किया कि वे शगनप्रीत नाम के एक शख्स के कहने पर महिता आए थे।
महिता पहुंचने के बाद उनकी मुलाकात गुरप्रीत सिंह उर्फ बॉबी से हुई। इसके बाद क्या हुआ? इन तीनों ने मिलकर अमरजोत को गांव जलाल में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
यह कोई पुरानी रंजिश थी या कुछ और, शुरुआती तौर पर यह साफ नहीं हुआ था, लेकिन जो वजह सामने आई, वो और भी चौंकाने वाली थी।
8,500 रुपये में बुझाई गई एक ज़िंदगी
आरोपियों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद गुरप्रीत सिंह उर्फ बॉबी ने उनसे पिस्तौल वापस ले ली थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि बॉबी ने उन्हें इस हत्याकांड के लिए महज 8,500 रुपये दिए और बस से अमृतसर वापस भेज दिया।
सोचिए ज़रा, एक 17 साल के लड़के की ज़िंदगी की कीमत सिर्फ 8,500 रुपये लगाई गई! यह आंकड़ा किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देगा कि आज के दौर में इंसानी ज़िंदगी इतनी सस्ती कैसे हो गई है। यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि समाज में फैलती उस गहरी खाई का प्रतीक है, जहां चंद पैसों के लिए किसी की जान ले ली जाती है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हत्या के पीछे की असली वजह क्या है? क्या वाकई सिर्फ 8,500 रुपये के लिए एक बेकसूर की जान ले ली गई, या यह कोई गहरी साजिश का हिस्सा है? क्या शगनप्रीत और गुरप्रीत सिंह उर्फ बॉबी का अमरजोत से कोई पुराना झगड़ा था? या वे किसी और के इशारे पर काम कर रहे थे?
पुलिस की आगे की कार्रवाई और अधूरे सवाल
थाना महिता की एसएचओ सिमरनजीत कौर ने साफ किया कि इस सनसनीखेज हत्याकांड में अब तक कुल 6 लोगों को नामजद किया जा चुका है। दो मुख्य शूटरों की गिरफ्तारी निश्चित रूप से पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
पुलिस का कहना है कि बाकी फरार आरोपियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच लगातार जारी है और मामले से जुड़े हर पहलू को खंगाला जा रहा है, ताकि अमरजोत की हत्या के पीछे का पूरा सच सामने आ सके।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह कोई गैंगवार का मामला था या किसी और बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा। 60 दिन की लंबी पड़ताल के बाद मिली यह कामयाबी, पुलिस की दृढ़ता को दर्शाती है, लेकिन जब तक सभी आरोपी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाते और कत्ल की असली वजह सामने नहीं आती, तब तक अमरजोत और उसके परिवार को शायद पूरा इंसाफ नहीं मिल पाएगा।
इस जघन्य अपराध की पूरी गुत्थी सुलझने का इंतजार अभी बाकी है।

