अमृतसर: पंजाब इन दिनों गर्मी से तप रहा है और इससे भी ज़्यादा तप रहे हैं यहां के किसान. खेत-खलिहान में धान की रोपाई का मौसम अपने चरम पर है, लेकिन बिजली की आँख-मिचौली ने किसानों का पसीना छुड़ा दिया है. आलम ये है कि किसानों को अपनी धान की फसल बचाने के लिए घंटों बिजली का इंतज़ार करना पड़ रहा है, और इसी गुस्से में आज 'किसान मजदूर मोर्चा' ने पूरे पंजाब में पावरकॉम के दफ्तरों को घेर लिया है. किसानों का आरोप है कि उन्हें ज़रूरत के हिसाब से बिजली मिल नहीं रही, जिससे उनकी मेहनत और लागत, दोनों दाँव पर लगी हैं.
मोर्चा से जुड़े नेताओं की मानें तो इस वक्त जब खेतों को सबसे ज़्यादा पानी की ज़रूरत है, तब कृषि मोटरों को सिर्फ़ ढाई से चार घंटे ही बिजली मिल पा रही है. अब आप ही सोचिए, इतनी कम बिजली में धान की सिंचाई कैसे मुमकिन है? पानी के बिना पौधे सूख रहे हैं, और किसानों का माथा ठनक रहा है.
यह सिर्फ़ सिंचाई की दिक्कत नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे किसानों की कमर तोड़ने वाला आर्थिक झटका है.
बिजली संकट की जड़ें और किसानों का दर्द
किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं का कहना है कि बिजली की समस्या सिर्फ़ किसानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मज़दूर और आम उपभोक्ता भी इससे परेशान हैं. धान का सीज़न शुरू होने के साथ ही कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बेतहाशा बढ़ गई है, लेकिन पावरकॉम इस मांग को पूरा करने में नाकाम दिख रहा है.
राज्य के कई इलाकों से शिकायतें आ रही हैं कि जहाँ 16 घंटे बिजली मिलनी चाहिए, वहाँ मुश्किल से कुछ ही घंटे मिल पा रही है. इससे न केवल फ़सलों को नुक़सान हो रहा है, बल्कि भूजल स्तर पर भी बुरा असर पड़ सकता है क्योंकि किसान पंप चलाने के लिए ज़्यादा समय तक इंतज़ार करते हैं, जिससे पानी की बर्बादी भी होती है जब उन्हें मौक़ा मिलता है.
किसानों का यह भी कहना है कि ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति में उन्हें बदलने में बहुत देर की जाती है, और कई बार तो उन्हें ही अपनी जेब से ढुलाई का खर्च उठाना पड़ता है, जो कि सरासर नाइंसाफ़ी है. उनकी मांग है कि यह ज़िम्मेदारी पूरी तरह से बिजली विभाग की होनी चाहिए.
किसानों की प्रमुख मांगें: क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी?
किसान मजदूर मोर्चा ने अपनी मांगों की लंबी फ़ेहरिस्त पावरकॉम के अधिकारियों के सामने रखी है. उनकी मुख्य मांगें कुछ इस तरह हैं:
- अनिवार्य बिजली आपूर्ति: कृषि मोटरों के लिए कम से कम 16 घंटे और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 24 घंटे बिना किसी रुकावट के बिजली दी जाए. यह उनकी सबसे अहम मांग है, जो उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और खेती दोनों के लिए ज़रूरी है.
- खराब ट्रांसफार्मरों का तुरंत बदला जाना: अगर कोई ट्रांसफार्मर खराब होता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर बदल दिया जाए. साथ ही, उसकी ढुलाई और स्थापना का पूरा ख़र्च बिजली विभाग ख़ुद उठाए. किसानों पर इस बात का बोझ नहीं पड़ना चाहिए.
- स्मार्ट मीटर पर आपत्ति: सरकार द्वारा बिना उपभोक्ताओं की मर्ज़ी के लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों का ज़ोरदार विरोध किया गया है. किसानों का कहना है कि ये मीटर बेवजह के बिल बढ़ाते हैं और पारदर्शिता की कमी है.
- पुराने मीटरों की वापसी और बिलों में सुधार: जिन उपभोक्ताओं के पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उनके पुराने बिल वापस लिए जाएं. इन बिलों में अक्सर 10 प्रतिशत जुर्माना जोड़कर भेजा जा रहा है, जिसे किसानों ने अस्वीकार कर दिया है. उनकी मांग है कि पुराने मीटर फिर से लगाए जाएं और बिलों में सही सुधार किया जाए.
अन्य गंभीर मुद्दे और भविष्य की चिंताएं
सिर्फ़ बिजली आपूर्ति ही नहीं, किसान मजदूर मोर्चा ने कुछ और बड़े मुद्दों पर भी सरकार का ध्यान खींचा है, जिनका सीधा असर भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर पड़ता है:
- निजीकरण की नीति पर रोक: बिजली विभाग के निजीकरण और निगमकरण की नीति को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है. किसानों को डर है कि निजीकरण से बिजली की दरें बढ़ेंगी और आम लोगों पर और बोझ पड़ेगा.
- रिक्त पदों पर भर्ती: बिजली विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए. इससे न केवल विभाग का कामकाज सुधरेगा, बल्कि बेरोज़गारी की समस्या से भी कुछ हद तक राहत मिलेगी.
- पावर परचेज समझौतों को रद्द करना: निजी कंपनियों के साथ किए गए पावर परचेज समझौतों (PPA) को रद्द करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है. इन समझौतों को अक्सर महंगी बिजली का कारण माना जाता है.
आज पूरे पंजाब के किसानों, मज़दूरों और आम लोगों से अपील की गई है कि वे इन धरनों में बड़ी संख्या में शामिल हों और अपनी आवाज़ को और बुलंद करें. किसान मजदूर मोर्चा की यह चेतावनी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उनका यह आंदोलन और तेज़ हो सकता है.
देखना होगा कि सरकार और पावरकॉम इस दबाव में क्या कदम उठाते हैं और पंजाब के खेत-खलिहानों में बिजली की रोशनी कब पूरी तरह से फैल पाती है.

