औरैया: आपने अक्सर अस्पतालों के बारे में कई तरह की खबरें सुनी होंगी, कभी सुविधाओं की कमी की तो कभी डॉक्टरों की लापरवाही की। लेकिन औरैया से आई ये खबर ना सिर्फ आपकी सोच बदलेगी, बल्कि दिल को भी छू जाएगी। जी हाँ, 1 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के मौके पर, औरैया के जिला अस्पताल में कुछ ऐसा हुआ, जिसने मरीजों के चेहरों पर एक नई मुस्कान बिखेर दी। एक समाज सेवा करने वाली संस्था, 'एक विचित्र पहल सेवा समिति रजि. औरैया' ने यहाँ 'अनोखी पहल' नाम से एक ऐसा कार्यक्रम शुरू किया, जो अस्पताल को सिर्फ इलाज की जगह नहीं, बल्कि एक उम्मीद का घर बना रहा है।
यह कोई मामूली बात नहीं थी, जब अस्पताल के 50 बिस्तरों वाले वार्ड में भर्ती पुरुष, महिला और बच्चों तक ताज़े फलों और पौष्टिक खाद्य सामग्री से भरी टोकरियाँ पहुँचने लगीं। सिर्फ मरीजों को ही नहीं, बल्कि अस्पताल के उन कर्मचारियों को भी, जो दिन-रात यहाँ अपनी सेवाएँ देते हैं, जैसे एम्बुलेंस चालक, स्टाफ नर्स, सुरक्षाकर्मी और सफाईकर्मी, सबको फल और खाद्य सामग्री मिली।
इस पहल को देखकर अस्पताल में मौजूद हर किसी के चेहरे पर खुशी और संतोष का भाव साफ देखा जा सकता था।
लेकिन ये तो बस शुरुआत थी। इस 'अनोखी पहल' की कहानी में और भी बहुत कुछ है।
संस्था ने सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं किया, बल्कि एक ऐसी योजना बनाई है, जो हर दिन हजारों लोगों के काम आएगी। कल्पना कीजिए, सुबह के सात बजते ही, अस्पताल के वार्डों में चाय, दूध, बिस्किट और ब्रेड से भरा जलपान मरीजों को मिलना शुरू हो जाएगा।
यह सिर्फ नाश्ता नहीं है, यह उन मरीजों के लिए सुबह की पहली उम्मीद है, जो बीमारी से जूझ रहे हैं और जिन्हें घर से दूर अस्पताल में रहना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य जांच की निःशुल्क सुविधा
इस पहल का एक और अहम पहलू है निःशुल्क स्वास्थ्य जांच सेवा। सोचिए, अगर आपको ब्लड प्रेशर, मधुमेह या ब्लड शुगर जैसी बीमारियों की नियमित जांच करानी हो और आपको इसके लिए पैसे खर्च न करने पड़ें, तो यह कितनी बड़ी राहत होगी! 'एक विचित्र पहल सेवा समिति' ने अटल आश्रय गृह, औरैया के ठीक सामने स्थित डॉ.
सोनी निवास पर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक यह सुविधा शुरू की है। यहाँ कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति आकर अपनी जांच करवा सकता है और विशेषज्ञों से परामर्श भी ले सकता है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब स्वास्थ्य सेवाएँ महंगी होती जा रही हैं और गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह एक बड़ा सहारा बन सकता है।
इस अनोखी पहल के पीछे का दिमाग
इस पूरी 'अनोखी पहल' के मुख्य सूत्रधार हैं डॉ. शिवकुमार सोनी।
वे पुरुष जिला चिकित्सालय, उरई से सेवानिवृत्त प्रभारी अधिकारी फार्मेसी हैं। जब उनसे बात की गई, तो उनकी आँखों में अपने सपने को पूरा करने की चमक साफ दिखी।
उन्होंने कहा, "मरीजों की सेवा करने का सपना मैंने बहुत पहले देखा था और आज उसे धरातल पर उतारकर समाज की सेवा करने का मौका मिला है।" डॉ.
सोनी का अनुभव और समर्पण इस योजना की नींव है। उनकी यह बात बताती है कि सेवा करने की कोई उम्र नहीं होती और अगर नीयत साफ हो, तो बड़े से बड़े काम भी किए जा सकते हैं।
समिति का संकल्प और जनहित की भावना
इस नेक काम में डॉ. सोनी अकेले नहीं हैं।
संस्था के अध्यक्ष राजीव पोरवाल (रानू) ने बताया कि यह योजना पूरी तरह से जनहित में चलाई जा रही है। उनका मानना है कि समाज के हर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच मिलनी चाहिए।
समिति के संस्थापक आनंद नाथ गुप्ता एडवोकेट ने भी सभी जरूरतमंद लोगों से अपील की है कि वे इस दो घंटे की निःशुल्क जांच सेवा और परामर्श का लाभ उठाएं। यह सब कुछ दिखाता है कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मिशन है, जिसका उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर तबके की मदद करना है।
चिकित्सकों का सम्मान और कर्मचारियों का हौसला
इस 'अनोखी पहल' के शुभारंभ अवसर पर कई प्रतिष्ठित डॉक्टरों को सम्मानित भी किया गया। इनमें डॉ.
शिवकुमार सोनी के साथ-साथ डॉ. आर्य प्रबुद्ध, डॉ.
सीमा अग्रवाल, डॉ. अवधेश कटियार, डॉ.
मंजू सचान और डॉ. विशाल अग्निहोत्री जैसे नाम शामिल थे।
इन सभी डॉक्टरों ने अपनी मौजूदगी से इस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और इस पहल को अपना आशीर्वाद दिया। डॉक्टरों का सम्मान करना राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की सच्ची भावना को दर्शाता है।
जैसा कि पहले बताया गया, इस नेक काम में सिर्फ मरीज और डॉक्टर ही शामिल नहीं थे, बल्कि अस्पताल के हर उस शख्स का ध्यान रखा गया, जो अपनी ड्यूटी पर मौजूद था। चाहे वो एम्बुलेंस चालक हों, जो मरीजों को अस्पताल लाते-ले जाते हैं, स्टाफ नर्सें हों, जो मरीजों की देखभाल करती हैं, सुरक्षाकर्मी हों, जो व्यवस्था बनाए रखते हैं, या सफाईकर्मी हों, जो अस्पताल को साफ रखते हैं – सभी को फल और खाद्य सामग्री देकर उनके काम को सराहा गया।
यह एक छोटा सा जेस्चर था, लेकिन इसने अस्पताल के पूरे माहौल में एक सकारात्मक ऊर्जा भर दी। इस आयोजन में समिति के संरक्षक श्री भगवान पोरवाल, श्रीमती किरन सोनी, राम आसरे गुप्ता, सचिन कुमार पोरवाल, हिमांशु दुबे, हरिओम और सतीश पोरवाल जैसे कई प्रमुख सदस्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस 'अनोखी पहल' को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
यह पहल वाकई औरैया के लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।