अजमेर: राजस्थान की हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर एक कुख्यात डकैत की हत्या, और उसके बाद अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे परिवार का गुस्सा, पुलिस के लिए एक नई चुनौती बन गया है। मामला है कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या का, जिसकी लाश अजमेर के जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में रखी है। लेकिन उसके परिजन अड़े हैं, पोस्टमार्टम करवाने से साफ इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मामले की CBI जांच नहीं होती और उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे लाश नहीं उठाएंगे। इस पूरे बवाल के बीच, जगन के बेटे आसाराम ने तो खुलेआम पुलिस को चुनौती दे डाली है।
आसाराम ने एक वीडियो में बेहद तीखे तेवर दिखाते हुए कहा, “मैं जगन गुर्जर का खून हूं..
. मैं घर में घुसकर मारना भी जानता हूं।
” ये बयान उसने अपनी मांगों के समर्थन में दिया, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है। परिवार का सबसे बड़ा डर है कि जेल में बंद जगन के भाई पप्पू गुर्जर की जान को भी खतरा हो सकता है।
वे पप्पू को तुरंत धौलपुर जेल में ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं। इस पूरे ड्रामे के दौरान, मोर्चरी के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है, अधिकारी लगातार परिवार वालों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी बात बनती नहीं दिख रही है।
यह सब शुरू हुआ 29 जून को, जब अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर जगन गुर्जर की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जेल के अंदर हुई इस वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भला एक कड़ी सुरक्षा वाली जेल में एक कैदी दूसरे कैदी का गला कैसे दबा सकता है?
अजमेर जेल में क्या हुआ?
पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, डकैत जगन गुर्जर को भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु के साथ एक ही बैरक में रखा गया था। धौलपुर के डांग इलाके के भवुतीपुरा का रहने वाला जगन, अपनी आपराधिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था।
आरोप है कि विष्णु ने जगन गुर्जर का टॉवल (तौलिए) से गला घोंटकर हत्या कर दी। हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद हार्डकोर बंदियों के बीच हुई इस वारदात ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
एक तरफ जहां परिजन इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि वे अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं।
हत्या की यह घटना महज एक मामूली झगड़े का नतीजा नहीं थी। इसके पीछे एक पुरानी रंजिश और अपमान की कहानी छिपी हुई थी।
विष्णु का हत्यारा मन और पुराना हिसाब
सूत्रों के मुताबिक, हत्यारे विष्णु ने जगन गुर्जर को इसलिए मार डाला क्योंकि जगन उसकी बहन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करता था। यह बात विष्णु को नागवार गुजरी थी और वह अंदर ही अंदर बदले की आग में जल रहा था।
चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या से ठीक पहले दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल क्या होने वाला है।
हत्या के बाद विष्णु को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था। बताया जाता है कि वह बैरक से बाहर मुस्कुराते हुए निकला, मानो उसने कोई बहुत बड़ा काम कर दिया हो।
जेल के अंदर की यह क्रूरता और विष्णु की यह निर्ममता कहानी को और भी भयावह बना देती है। इस घटना ने एक बार फिर जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा और उनके आपसी विवादों को सुलझाने की प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
परिवार की जिद और पुलिस का दबाव
अस्पताल की मोर्चरी के बाहर जगन गुर्जर के परिवार का धरना अभी भी जारी है। उनका साफ कहना है कि जब तक सीबीआई जांच का आश्वासन नहीं मिलता और जगन के भाई पप्पू गुर्जर को धौलपुर जेल में ट्रांसफर नहीं किया जाता, वे जगन का शव नहीं लेंगे और न ही पोस्टमार्टम करवाएंगे।
सीओ मनीष बडगुर्जर ने बताया है कि डकैत जगन गुर्जर के शव का आज (मंगलवार) पोस्टमार्टम किया जाएगा और परिवार की सभी मांगों से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इस बीच, हाई सिक्योरिटी जेल में बंद पप्पू गुर्जर को अपने भाई जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिल गई है, लेकिन परिवार की मुख्य मांगें अभी भी जस की तस बनी हुई हैं।
यह देखना बाकी है कि पुलिस और प्रशासन इस गतिरोध को कैसे तोड़ते हैं।
कौन था डकैत जगन गुर्जर?
जगन गुर्जर का नाम राजस्थान के कुख्यात डकैतों में शुमार था। उसकी आपराधिक फाइल काफी लंबी थी, जिसमें दर्जनों हत्याओं और अन्य संगीन अपराधों के मामले शामिल थे।
जगन गुर्जर की कुख्यातता इतनी थी कि एक समय में संसद में भी उसके एनकाउंटर की मांग उठी थी। यह शायद पहला ऐसा डाकू था जिसकी मौत की मांग देश की सर्वोच्च पंचायत में उठी हो।
उसकी आपराधिक जिंदगी की एक कहानी यह भी है कि वह महज तीन रुपये के लिए झगड़ा कर बैठा था, जिससे उसकी हिंसक और बेपरवाह प्रवृत्ति का पता चलता है। हथियार तस्करी जैसे मामलों में भी उसे गिरफ्तार किया गया था।
जगन गुर्जर की मौत उसके आपराधिक साम्राज्य के एक अध्याय का अंत है, लेकिन जेल के अंदर उसकी हत्या ने एक नया अध्याय खोल दिया है, जिसकी जांच और परिणाम का सबको इंतजार है।

