दरभंगा मंदिर पर बिजली गिरी; गुंबद टूटा पर 25 श्रद्धालु सुरक्षित
सारांश
दरभंगा के ऐतिहासिक जलेश्वरनाथ मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरी। भयानक हादसे में गुंबद को नुकसान हुआ, लेकिन पूजा कर रहे सभी 25 श्रद्धालु बाल-बाल बचे। जानें पूरी कहानी।

दरभंगा के ऐतिहासिक जलेश्वरनाथ मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरी। भयानक हादसे में गुंबद को नुकसान हुआ, लेकिन पूजा कर रहे सभी 25 श्रद्धालु बाल-बाल बचे। जानें पूरी कहानी।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह घटना उस वक्त हुई जब आसमान में बिजली लगातार कड़क रही थी और जोरदार बारिश हो रही थी। अचानक हुई उस भयंकर गड़गड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा।
बिजली सीधे मंदिर के ऊपरी हिस्से, यानी गुंबद से टकराई और उसे भारी नुकसान पहुँचा। घटना के तुरंत बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
जो लोग मंदिर में थे या आसपास मौजूद थे, वे घबराहट में इधर-उधर भागने लगे। लेकिन जैसे ही धूल और धुआँ छटा, लोगों ने देखा कि गुंबद तो क्षतिग्रस्त हो गया था, पर अंदर मौजूद सभी लोग सुरक्षित थे।
यह जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में जमा हो गई। सभी ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त गुंबद की जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए और मंदिर की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि दरभंगा और आसपास के इलाकों के लिए यह सदियों पुरानी आस्था और इतिहास का प्रतीक है। इस मंदिर परिसर में ही एक प्रसिद्ध और विशाल गंगासागर तालाब है।
श्रद्धालुओं की परंपरा रही है कि वे पहले इस तालाब में पवित्र स्नान करते हैं और फिर बाबा जलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुँचते हैं। इस मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है।
यहाँ आने वाले भक्तों का मानना है कि बाबा जलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने पर उनकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
स्थानीय बुजुर्गों और इतिहास के जानकार लोगों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक तालाब और मंदिर का निर्माण करीब 150 साल पहले दरभंगा राज के महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह की धर्मपत्नी महारानी लक्ष्मेश्वरी ने करवाया था। तब से लेकर आज तक यह स्थान अपनी धार्मिक पहचान और ऐतिहासिक महत्व को बनाए हुए है।
इतनी पुरानी और महत्वपूर्ण धरोहर पर आकाशीय बिजली का गिरना, भले ही कोई जानी नुकसान न हुआ हो, फिर भी इलाके के लोगों के लिए चिंता का विषय है। अब सबकी नज़रें प्रशासन पर हैं कि वे इस प्राचीन मंदिर की मरम्मत और उसके संरक्षण के लिए कितनी तेज़ी से कदम उठाते हैं।
रविवार रात का कहर सिर्फ जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के गुंबद तक ही सीमित नहीं रहा। तेज आंधी और बारिश ने पूरे दरभंगा जिले की बिजली व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया।
रातभर हुई मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं के चलते कई इलाकों में बिजली के तार और पोल टूट गए, जिसके परिणामस्वरूप बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई।
जानकारी के अनुसार, दरभंगा के कई हिस्सों में लगभग 10 घंटे तक बिजली गुल रही। यह स्थिति लोगों के लिए बेहद कष्टदायक साबित हुई।
भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में, लंबे समय तक बिजली न होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया। रात में बिना पंखे और कूलर के सोना मुश्किल हो गया, और सुबह होते-होते घरों में पानी की किल्लत भी शुरू हो गई क्योंकि मोटर नहीं चल पा रहे थे।
लोगों ने इस स्थिति पर बिजली विभाग की व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हल्की बारिश और आंधी में भी अक्सर बिजली गुल हो जाती है और फिर उसे बहाल करने में विभाग को घंटों लग जाते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
फिलहाल, मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ लगातार बनी हुई है। प्रशासन ने स्थिति का जायजा लिया है और मरम्मत कार्य शुरू करने की बात कही है।
इस हादसे में किसी के घायल न होने को सभी लोग बाबा महादेव का आशीर्वाद मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही मंदिर का गुंबद फिर से अपनी पुरानी भव्यता के साथ खड़ा होगा।
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