हाथरस: मंगलवार की दोपहर, हाथरस के मोहल्ला बुर्ज वाला कुआं में एक आम घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था। सुबह की भागदौड़ थम चुकी थी और दिन अपने ढर्रे पर था। लेकिन तभी घर के भीतर, जहां मंदिर की शांति पसरी थी, एक ऐसी अनहोनी हुई जिसने पूरे परिवार और मोहल्ले को सदमे में डुबो दिया। महज एक पंखे को ठीक करने की कोशिश में 30 साल के दीपक की जिंदगी का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। यह वो पल था जब जिंदगी ने अचानक से एक क्रूर मोड़ ले लिया, और एक हंसते-खेलते घर में मातम पसर गया।
बात मंगलवार दोपहर करीब 11 बजे की है। दीपक, जो अपने घर के मंदिर में लगे पंखे से आ रही कुछ दिक्कत को ठीक करने में लगा था, नहीं जानता था कि यह छोटा सा काम उसकी जिंदगी का आखिरी काम साबित होगा।
पंखे का कंडेंसर बदलने की जुगत में था वह। शायद रोजमर्रा की तरह ही उसने सोचा होगा कि पल भर का काम है, पंखा ठीक हो जाएगा और मंदिर में हवा का सुकून फिर से लौट आएगा।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
कंडेंसर बदलते हुए ही अचानक उसे बिजली का ज़ोरदार झटका लगा। झटका इतना भीषण था कि दीपक खुद को संभाल नहीं पाया और वहीं ज़मीन पर गिर पड़ा।
घर के बाकी सदस्य जब तक कुछ समझ पाते, चीख-पुकार मच चुकी थी। जो पल भर पहले सामान्य लग रहा था, अब अफरा-तफरी और डर से भर गया था।
परिवार के लोगों ने जब दीपक को बेजान सा फर्श पर पड़ा देखा, तो उनके होश उड़ गए।
सामान्य काम; अनहोनी का पल
यह हर हिंदुस्तानी घर की कहानी है। गर्मियों में जब पंखा धीमा चले या अटक जाए, तो अक्सर लोग खुद ही उसे ठीक करने की कोशिश करते हैं।
दीपक भी ऐसा ही कुछ कर रहा था। घर के मंदिर में लगा पंखा, जो शायद पूजा-पाठ के दौरान राहत देता होगा, उसी की मरम्मत में जुटा था।
उसने शायद सोचा होगा कि यह एक मामूली काम है, जो अक्सर लोग करते हैं। लेकिन बिजली के तारों से जुड़ा हर काम सावधानी मांगता है, और कभी-कभी एक छोटी सी चूक या अनजाने में हुई गलती भारी पड़ जाती है।
दीपक के गिरने की आवाज़ और परिवार वालों की चीख सुनकर आस-पड़ोस के लोग भी दौड़ पड़े। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ है, लेकिन चारों ओर छाई घबराहट साफ बता रही थी कि कोई बहुत बड़ी अनहोनी हो गई है।
बिना देर किए, परिवार के लोगों ने किसी तरह दीपक को उठाया और आनन-फानन में उसे हाथरस के जिला अस्पताल लेकर भागे। एंबुलेंस का इंतज़ार करने का भी वक्त नहीं था, हर पल कीमती लग रहा था।
उनकी आंखों में उम्मीद की एक बारीक सी किरण थी, कि शायद डॉक्टर उनके अपने को बचा लेंगे।
अस्पताल का सफर और डॉक्टरी मुहर
अस्पताल का वो सफ़र परिवार के लिए सदियों लंबा महसूस हुआ होगा। रास्ते भर दुआएं मांगी गईं, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है? जब वे दीपक को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, तो वहां भी हड़कंप मच गया।
डॉक्टरों ने बिना वक्त गंवाए दीपक की जांच शुरू की। हर कोई टकटकी लगाए, डॉक्टरों के चेहरे पढ़ने की कोशिश कर रहा था।
लेकिन कुछ ही देर बाद, डॉक्टरों के चेहरों पर निराशा साफ दिख रही थी। उन्होंने जांच के बाद जो कुछ कहा, उसने परिवार की बची-खुची उम्मीदों को भी तोड़ दिया।
डॉक्टरों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया।
यह खबर सुनते ही परिवार पर मानों पहाड़ टूट पड़ा। उनकी चीखें अस्पताल के गलियारों में गूंज उठीं।
जो उम्मीद लेकर आए थे, वो अब टूट चुकी थी। दीपक अब इस दुनिया में नहीं था।
इस दुखद घोषणा के साथ ही अस्पताल का माहौल गमगीन हो गया। परिवार के लोग दीपक के पास बैठकर बिलखने लगे।
मोहल्ले के जो अन्य लोग दीपक की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे थे, वे भी इस दृश्य को देखकर सन्न रह गए। सबकी आंखें नम थीं।
एक मेहनती युवक और बिखरता परिवार
दीपक की उम्र केवल 30 साल थी। पूरी जिंदगी उसके सामने पड़ी थी।
वह एक मसाला फैक्ट्री में काम करता था, जिससे अपने परिवार का पेट पालता था। उसकी मेहनत पर ही उसके घर का चूल्हा जलता था।
अब वो मेहनती हाथ अचानक थम गए थे। दीपक अपने पीछे चार छोटे-छोटे बच्चे और अन्य परिजनों को छोड़ गया है।
सोचिए, उन बच्चों का क्या होगा जिन्होंने अभी ठीक से दुनिया देखी भी नहीं थी और जिनके सिर से पिता का साया उठ गया?
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी, मां, बच्चे, भाई-बहन… हर कोई अपनी-अपनी तरह से इस अचानक आई विपदा पर विलाप कर रहा था।
मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाने में लगे थे, लेकिन इस गहरे सदमे से उबरना किसी के लिए भी आसान नहीं था। एक पल में एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया।
बिजली के खतरों की याद दिलाती घटना
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बिजली कितनी खतरनाक हो सकती है, भले ही हम उसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानते हों। घर में छोटे-मोटे बिजली के उपकरण ठीक करते समय या तारों से छेड़छाड़ करते समय हमें हमेशा बेहद सावधान रहना चाहिए।
अक्सर लोग मामूली चीजों को ठीक करने में इतनी सावधानी नहीं बरतते, जितनी बरतनी चाहिए। दीपक की मौत ने पूरे मोहल्ले में एक खामोशी ला दी है, एक ऐसी खामोशी जो सिर्फ उसकी अनुपस्थिति से नहीं, बल्कि बिजली के उस अनदेखे खतरे से भी पैदा हुई है जो कभी भी किसी की जान ले सकता है।
बुर्ज वाला कुआं मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई है। हर आंख नम है और हर जुबान पर दीपक का नाम है।
एक युवक, जिसकी जिंदगी बस शुरू ही हुई थी, एक छोटी सी लापरवाही या अनजाने में हुई गलती का शिकार होकर चला गया। परिवार अब इस गहरे दुख के साथ अकेला है, और मोहल्ले के लोग उनके साथ खड़े होकर इस मुश्किल घड़ी को झेलने की कोशिश कर रहे हैं।

