लखीमपुर-खीरी: भैया, पिछले एक हफ्ते से लखीमपुर-खीरी का क्या हाल था, वो या तो यहां के लोग जानते हैं, या फिर वो जिसने तपती धूप में अपनी कमर से पसीना बहाया है. अंगारे बरसाने वाला सूरज, ज़मीन से उठती लपटें और ऐसा लगता था मानो भट्टी में बैठ गए हों. पारा 40-42 डिग्री सेल्सियस के पार, दिन ढलते-ढलते भी गर्मी से चैन नहीं. लोगों ने घर से निकलना छोड़ दिया था, बाज़ारों में सन्नाटा पसरा था और हर कोई बस ऊपर वाले से एक ही फरियाद कर रहा था – “बारिश हो जाए!” और सुनो, ऊपर वाले ने सुन ली. सोमवार का दिन लखीमपुर-खीरी के लिए महज़ एक तारीख नहीं, बल्कि सुकून की एक नई शुरुआत लेकर आया. दोपहर बाद आसमान में घने बादल छाए, तेज हवाएं चलीं और फिर क्या, झमाझम बारिश ने पूरे ज़िले को तरबतर कर दिया. मानो आसमान से पानी नहीं, राहत की फुहारें बरस रही हों.
ये कोई मामूली बारिश नहीं थी, बल्कि पिछले एक हफ़्ते की घुटन, चिपचिपाहट और बेबसी पर मरहम लगाने वाली बारिश थी. भारतीय मौसम विभाग ने तो इसे बाकायदा ‘हीटवेव’ यानी लू की स्थिति घोषित कर दिया था.
सोचिए, 24 से 28 जून के बीच यहां का अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच घूम रहा था. 27 जून का दिन तो इतिहास में दर्ज हो गया, जब पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था.
ये अपने आप में एक रिकॉर्ड था, क्योंकि यह सामान्य से क़रीब 7 डिग्री ज़्यादा था. ऐसी गर्मी में घर से बाहर निकलना, काम करना तो दूर, बस बैठे रहना भी पहाड़ जैसा लगता था.
कूलर, पंखे, एसी सब फेल थे. लोग बस अपनी जान बचाने में लगे थे.
ऐसे में इस बारिश ने जो राहत दी है, उसकी कीमत सिर्फ़ लखीमपुर-खीरी के लोग ही समझ सकते हैं.
एक हफ्ते की तपिश और इंतज़ार का अंत
लखीमपुर-खीरी में जून का महीना अक्सर गर्म होता है, लेकिन इस बार की गर्मी कुछ ज़्यादा ही बेरहम थी. सुबह की पहली किरण के साथ ही सूरज की तल्ख़ी शुरू हो जाती थी और दोपहर होते-होते तो लगता था जैसे आग का गोला आसमान में लटका हो.
सड़कें तपती, हवा में नमी का नामोनिशान नहीं, बस गर्म लू के थपेड़े शरीर को झुलसाते रहते थे. बच्चे घरों में कैद, बड़े बिना ज़रूरी काम के बाहर निकलने से कतराते.
पानी की खपत बढ़ गई थी, बिजली कटौती की अपनी अलग समस्या थी और हर घर में बस यही चर्चा होती थी कि ‘कब बरसेगा मेघ?’ लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी थीं, मौसम विभाग के बुलेटिन पर कान लगे थे. यही तपिश, यही बेचैनी पिछले एक हफ्ते से लखीमपुर-खीरी की पहचान बन गई थी.
इस बीच, सोमवार की दोपहर जैसे ही आसमान में काले बादलों ने दस्तक दी, लोगों के चेहरों पर एक उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी. पहले धीमी हवा, फिर तेज़ हवाएं चलने लगीं, धूल के गुबार उठे और फिर बिजली की चमक के साथ बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई दी.
शहर की गलियों से लेकर गांवों के खेतों तक, हर कोई आसमान की तरफ़ निहार रहा था. और फिर वो पल आया, जब बड़ी-बड़ी बूंदें ज़मीन पर गिरीं.
पहले इक्का-दुक्का, फिर मूसलाधार. कुछ ही देर में सड़कें भीग गईं, छतों पर पानी बहने लगा और हवा में एक भीनी-भीनी सी मिट्टी की खुशबू घुल गई.
ये महज़ बारिश नहीं थी, ये तो प्रकृति का तोहफ़ा था, जो एक हफ़्ते की तपस्या के बाद मिला था.
ज़िले के कोने-कोने में पहुंचा राहत का संदेश
ये राहत सिर्फ़ लखीमपुर-खीरी शहर तक ही सीमित नहीं थी. इस मॉनसूनी फुहारों का असर पूरे ज़िले में दिखा.
पलिया, गोला, मोहम्मदी, निघासन, मितौली जैसे इलाक़ों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई. हर जगह लोगों ने इस बारिश का खुले दिल से स्वागत किया.
बच्चे तो जैसे ही बारिश शुरू हुई, घरों से बाहर निकल आए और भीगने का लुत्फ़ उठाने लगे. युवा भी बारिश में फुटबॉल खेलते या सड़कों पर मस्ती करते दिखाई दिए.
बुजुर्गों के चेहरे पर भी एक सुकून भरी मुस्कान थी, क्योंकि उन्हें भी पता था कि ये बारिश सिर्फ़ तापमान नहीं घटाएगी, बल्कि सेहत और सुकून भी वापस लाएगी.
बारिश के बाद सबसे पहले जो बदलाव दिखा, वो था तापमान में गिरावट. जो पारा 40 पार जा रहा था, वो नीचे आ गया.
हवा में जो चिपचिपी गर्मी थी, उसकी जगह एक ठंडी और ताज़गी भरी हवा ने ले ली. लोग अपने घरों की खिड़कियां खोलकर ताज़ी हवा का आनंद लेने लगे.
जिन बाज़ारों में दिन में सन्नाटा पसरा था, वहां भी लोग शाम को हल्की-फुल्की सैर करने के लिए निकल पड़े. मानो एक हफ़्ते के लॉकडाउन से आज़ादी मिल गई हो.
ये बारिश महज़ पानी नहीं थी, ये ज़िंदगी में नई उम्मीद और नई ऊर्जा लेकर आई थी.
किसानों के चेहरे पर लौटी खुशी
इस बारिश का सबसे ज़्यादा इंतज़ार अगर किसी को था, तो वो थे ज़िले के किसान भाई. लखीमपुर-खीरी एक कृषि प्रधान ज़िला है और यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर करता है.
पिछले एक हफ़्ते की भीषण गर्मी ने किसानों की चिंताएँ बढ़ा दी थीं. धान की रोपाई का समय चल रहा है और खेतों को पर्याप्त नमी की ज़रूरत होती है.
बिना बारिश के खेत सूखे पड़े थे, जिससे रोपाई का काम रुका हुआ था. कई किसान तो हताश थे, क्योंकि अगर बारिश नहीं होती, तो उनकी फसल का भविष्य अधर में लटक जाता.
सोमवार की बारिश ने किसानों के चेहरों पर रौनक ला दी. अब उन्हें धान की रोपाई के लिए पर्याप्त नमी मिल गई है.
एक किसान ने बताया, "ये बारिश हमारे लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है. खेतों में मिट्टी अब मुलायम हो गई है, जिससे रोपाई का काम तेज़ी से शुरू हो पाएगा.
अगर कुछ दिन और बारिश न होती, तो बहुत नुकसान हो जाता." इस बारिश से न सिर्फ़ धान की रोपाई में मदद मिलेगी, बल्कि उन फ़सलों को भी जीवनदान मिलेगा, जो गर्मी से झुलस रही थीं.
यह कहा जा सकता है कि इस बारिश ने सिर्फ़ लोगों को ही नहीं, बल्कि ज़िले की कृषि अर्थव्यवस्था को भी एक नई जान दी है.
मौसम विभाग की चेतावनी और आगे का हाल
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, लखीमपुर-खीरी में अब मॉनसूनी गतिविधियां पूरी तरह से सक्रिय हो चुकी हैं. विभाग ने अनुमान लगाया है कि अगले कुछ दिनों तक ज़िले में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी.
गरज-चमक के साथ बारिश और तेज़ हवाएं चलने की संभावना है. यह सिलसिला अगले कई दिनों तक जारी रह सकता है.
इससे अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की उम्मीद है. मतलब, अब लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलती रहेगी.
आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना से किसानों और आम जनता दोनों को बड़ी राहत मिली है. ऐसा लगता है कि अब लखीमपुर-खीरी में गर्मी का प्रकोप थम गया है और मॉनसून अपनी पूरी धमक के साथ दस्तक दे चुका है.
यह सिर्फ़ एक मौसम बदलाव नहीं, बल्कि तपती ज़मीन पर जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है.

