पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला जिले में आज अधिकारियों की धड़कनें तेज होने वाली हैं। वजह है पंचायत एवं खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में होने वाली ग्रीवेंस कमेटी की बैठक। यह कोई सामान्य मीटिंग नहीं है, बल्कि वो मंच है जहाँ मंत्री जी न सिर्फ जनता की शिकायतें सुनते हैं, बल्कि अधिकारियों को भी उनके काम का कच्चा चिट्ठा सुनाते हैं। पिछली बार का नज़ारा तो अधिकारी भूले नहीं होंगे, जब उन्होंने एक सहायक खनन अभियंता को मौके पर ही सस्पेंड कर दिया था। आज फिर, सुबह करीब साढ़े 11 बजे, PWD रेस्ट हाउस में मंत्री पंवार जनता की फरियाद सुनने और सरकारी कामकाज की नब्ज टटोलने बैठेंगे।
जनता को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन अधिकारियों को पता है कि मंत्री जी का पारा चढ़ गया तो खैर नहीं। मीटिंग में पंचकूला कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन, कालका विधायक शक्ति रानी शर्मा और राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा व कार्तिकेय शर्मा जैसे अहम चेहरे भी मौजूद रहेंगे।
पिछली बैठक में मंत्री पंवार ने जिस कड़े लहजे में अधिकारियों को संदेश दिया था, उसकी गूँज आज भी उनके कानों में होगी।
मंत्री कृष्ण लाल पंवार अपने सख्त मिजाज के लिए जाने जाते हैं। उनकी साफगोई और कामचोर अधिकारियों के प्रति उनकी शून्य सहनशीलता जगजाहिर है।
जब जनता की बात आती है, तो वे सीधे एक्शन में विश्वास रखते हैं, न कि कागजी कार्रवाई में। यही वजह है कि उनकी ग्रीवेंस मीटिंग्स में अधिकारी फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं।
मंत्री का सख्त संदेश और पिछली कार्रवाई
पिछली ग्रीवेंस मीटिंग में पंचायत एवं खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी थी, जिसकी चर्चा आज भी होती है। उन्होंने मीटिंग शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि वे हिसार और रोहतक जैसे 'हार्ड' जिले भी देख चुके हैं, जहाँ उन्होंने कड़े फैसलों से व्यवस्था को पटरी पर लाने का काम किया था।
उन्होंने कहा था, "यहाँ के अधिकारी वहाँ वालों को फोन करके फीडबैक ले सकते हैं कि मैंने किस प्रकार से वहाँ पर काम किया है।" यह एक तरह से उनका परिचय था, जो बता रहा था कि वे सिर्फ बातें नहीं करते, बल्कि एक्शन भी लेते हैं।
इसी सख्ती का नतीजा था कि पिछली बार उन्होंने एक सहायक खनन अभियंता को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक अमले में यह संदेश दे दिया था कि मंत्री जी अपनी बातों पर अडिग रहते हैं।
मंत्री पंवार ने स्पष्ट किया कि उनकी अनुमति के बिना किसी भी अधिकारी की अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी थी, "अगर कोई भी अधिकारी मेरी पूर्व अनुमति के बिना अबसेंट रहा तो एक मिनट में कार्रवाई कर दूंगा।
" उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी को कोई वाजिब मजबूरी है, तो वे उनसे या डीसी से अनुमति ले सकते हैं, लेकिन बिना बताए गायब रहना भारी पड़ेगा। यह चेतावनी सिर्फ हवा में नहीं थी, बल्कि पिछली कार्रवाई इसका पुख्ता सबूत थी कि वे अपनी बात के पक्के हैं।
आज की बैठक से पहले भी, यह संदेश अधिकारियों के बीच फिर से गूंज रहा होगा कि उन्हें पूरी तैयारी और उपस्थिति के साथ आना होगा।
शिकायतों का अंबार और अधिकारियों की जवाबदेही
ग्रीवेंस मीटिंग का मूल उद्देश्य जनता की शिकायतों का त्वरित निवारण करना होता है। लेकिन कई बार देखने में आता है कि अधिकारी शिकायतों को लंबित रखते हैं, जिससे जनता का सरकारी तंत्र से विश्वास उठने लगता है।
इसी बात पर मंत्री पंवार ने पिछली बैठक में गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा था, "मैं देख रहा हूं, यहाँ अधिकारी महीने से शिकायतें लंबित रख रहे हैं, अब ऐसा नहीं चलेगा।
" यह एक गंभीर टिप्पणी थी, जो अधिकारियों की ढिलाई पर सीधी चोट थी।
मंत्री जी ने शिकायतों के निपटारे के लिए एक सख्त समय-सीमा भी तय की थी। उन्होंने कहा, "2 महीने का समय दे रहा हूं, आज शिकायत आई तो मीटिंग से पहली रिपोर्ट देनी होगी।
अधिकतम शिकायतों को उसी दिन खत्म करेंगे, यहाँ शिकायतों को पेंडिंग नहीं रखेंगे।" इसका मतलब साफ है कि अधिकारी अब शिकायतों को लटका नहीं सकते।
उन्हें न केवल समय पर रिपोर्ट देनी होगी, बल्कि कोशिश करनी होगी कि ज्यादा से ज्यादा शिकायतें उसी दिन निपटा दी जाएं। यह एक बड़ा कदम है, जो प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने में मदद करेगा।
जनता भी इसी उम्मीद से इन बैठकों में आती है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा और उसका तत्काल समाधान किया जाएगा।
जूनियर अधिकारियों की 'नो एंट्री' और बैठक की गंभीरता
मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बैठकों की गंभीरता को बनाए रखने के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि अगर कोई वरिष्ठ अधिकारी खुद बैठक में न आकर अपने जूनियर को भेजेगा, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, "अगर कोई अधिकारी खुद मीटिंग में न आकर अपने जूनियर को भेजेगा तो उस जूनियर को इज्जत के साथ मीटिंग से बाहर कर दूंगा। मैं उसकी बेइज्जती नहीं करूंगा लेकिन मीटिंग में अनुमति नहीं दूंगा।
" यह नियम इस बात पर जोर देता है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। महत्वपूर्ण बैठकों में उनकी अपनी उपस्थिति आवश्यक है, ताकि वे सीधे जनता की समस्याओं को समझ सकें और त्वरित निर्णय ले सकें।
यह दिखाता है कि मंत्री जी चाहते हैं कि अधिकारी अपनी भूमिका को गंभीरता से लें और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को समझें। आज की बैठक में भी यह उम्मीद की जा रही है कि सभी संबंधित अधिकारी पूरी तैयारी और व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ आएंगे, ताकि पंचकूला की जनता की समस्याओं का उचित और समय पर समाधान हो सके।
मंत्री जी के कड़े रुख से उम्मीद है कि इस बार पंचकूला में लंबित पड़ी शिकायतों को एक नई गति मिलेगी और जनता को राहत महसूस होगी।

