पंचकूला: हरियाणा पुलिस की वर्दी पहनने का सपना आँखों में लिए महेंद्रगढ़ का कपिल पंचकूला आया था. सीने में जुनून था, पैरों में रफ्तार और दिल में एक उम्मीद कि इस बार सरकारी नौकरी पक्की. लेकिन 1 जुलाई का दिन कपिल के लिए 'आखिरी दौड़' साबित हुआ. दौड़ते-दौड़ते उसकी दिल की धड़कनें बेकाबू हुईं और वो ज़मीन पर गिर पड़ा. कुछ ही देर बाद चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया. अब घर में सिर्फ मातम पसरा है, एक सात महीने की गर्भवती पत्नी है जो बार-बार बेसुध हो जाती है और एक तीन साल की मासूम बेटी है, जिसे अभी ये भी नहीं पता कि उसके पापा अब कभी वापस नहीं आएँगे.
कपिल के परिवार ने अब पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं. पिता हीरालाल का आरोप है कि अगर उनके बेटे को समय रहते सही इलाज मिल जाता, तो शायद उसकी जान बच जाती.
उन्होंने हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और न्याय की मांग की है. महेंद्रगढ़ के सैदापुर गांव में कपिल की मौत के बाद से ही आक्रोश का माहौल है और ग्रामीण अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं.
सपनों का सफर और आखिरी बातचीत
कपिल अपने घर से 30 जून की शाम को हरियाणा पुलिस भर्ती की फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट (PST) में शामिल होने के लिए अकेला ही पंचकूला रवाना हुआ था. वो उत्साह से भरा था.
शाम करीब साढ़े छह बजे उसने अपने पिता हीरालाल को फोन किया. फोन पर उसने सिर्फ इतना कहा, “पापा, मैं आधे घंटे में चंडीगढ़ पहुँच जाऊँगा.
” ये बेटे और पिता के बीच की आखिरी बातचीत थी. हीरालाल को क्या पता था कि उनका बेटा उनसे आखिरी बार बात कर रहा है.
रात में कपिल चंडीगढ़ में अपने गांव के ही एक दोस्त के पास रुका, जो वहां नौकरी करता है. अगली सुबह, वो रैपिडो बाइक से पंचकूला स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम पहुंचा.
यही वो जगह थी जहां कपिल के सपनों ने उड़ान भरने की तैयारी की थी, लेकिन यहीं उसके सपने और जिंदगी दोनों थम गए.
जब परिवार को मिली मनहूस खबर
सुबह का वक्त था. घर पर अचानक एक युवक अनुज का फोन आया.
उसने बताया कि कपिल दौड़ते-दौड़ते अचानक गिर गया है और उसे पंचकूला के अस्पताल ले जाया जा रहा है. परिवार के लिए ये खबर एक झटके जैसी थी, लेकिन उन्हें लगा कि शायद छोटी-मोटी चोट होगी.




































