गोवा: समंदर किनारे खुली हवा में फर्राटे भरना, बालों को हवा में लहराते हुए बीच पर घूमना… गोवा का नाम सुनते ही कुछ ऐसा ही नज़ारा दिमाग में घूमने लगता है. और इस ‘गोवा वाइब’ को कम्प्लीट करने के लिए इन दिनों एक गाड़ी पर्यटकों की खास पसंद बनी हुई है – महिंद्रा थार. लेकिन अब यही चमचमाती एसयूवी गोवा सरकार के लिए सिरदर्द बनती जा रही है. आलम ये है कि राज्य सरकार किराए पर चलने वाली इन थार गाड़ियों पर नए लाइसेंस जारी करने से रोकने पर विचार कर रही है. वजह साफ है: इन गाड़ियों से जुड़े सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई बार जानलेवा भी साबित हो रहे हैं.
कहानी कुछ यूं है कि गोवा के परिवहन मंत्री मॉविन गोडिन्हो ने हाल ही में एक बड़ी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि किराए पर चलने वाली महिंद्रा थार से हो रहे हादसों ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
इसी वजह से अब ये प्रस्ताव स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) के सामने रखा जाएगा, ताकि इस पर कोई ठोस फैसला लिया जा सके.
सरकार को थार से इतनी दिक्कत क्यों हुई?
मंत्री गोडिन्हो ने अपनी बात को और साफ करते हुए कहा, "हम हादसों की बढ़ती संख्या को लेकर बहुत चिंतित हैं. हमने इस पर गहराई से चर्चा की है कि आखिर ये हादसे क्यों हो रहे हैं और इन्हें कैसे रोका जा सकता है.
" उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि जहां तक महिंद्रा थार गाड़ियों की बात है, सरकार की प्लानिंग है कि अब किराए पर चलने वाली नई थार गाड़ियों के ऑपरेटरों को नए लाइसेंस जारी न किए जाएं. ये मामला STA की अगली बैठक में उठेगा और वहीं तय होगा कि आगे क्या करना है.
सोचिए, मामला कितना गंभीर है कि मंत्री जी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कानूनी रूप से संभव होता, तो सरकार किराए पर चलने वाली गाड़ियों के बेड़े से थार गाड़ियों को पूरी तरह से ही हटा देती! उनके इस बयान से साफ पता चलता है कि लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार कितनी अलर्ट है और इस पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं.
दरअसल, पिछले कुछ वक्त से गोवा में किराए पर ली गई थार गाड़ियों से कई सड़क हादसे हुए हैं. इनमें खासकर पर्यटकों द्वारा चलाई जा रही गाड़ियां ज्यादा शामिल हैं, जो अक्सर शराब पीकर गाड़ी चलाने या लापरवाही से ड्राइविंग करने की वजह से होते हैं.
यही बात सरकार की टेंशन बढ़ा रही है.
किन हादसों ने सरकार को मजबूर किया?
ये कोई हवा-हवाई बात नहीं, बल्कि हाल में हुए कुछ हादसों ने सरकार की नींद उड़ा दी है. पिछले दो महीने में ही ऐसी दो बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने सिस्टम को हिलाकर रख दिया.
- पहली घटना: इसी साल मई का महीना था, जब उत्तरी गोवा में किराए की एक थार गाड़ी ने कथित तौर पर एक स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी. इस दर्दनाक हादसे में 32 साल के एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई और एक नाबालिग बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया. जब पुलिस ने जांच की, तो पता चला कि गाड़ी चलाने वाला पर्यटक कथित तौर पर शराब के नशे में धुत था. अब बताइए, ऐसी लापरवाही का खामियाजा कोई और क्यों भुगते?
- दूसरी घटना: इससे पहले, फरवरी में भी ऐसी ही एक घटना नॉर्थ गोवा में हुई थी. उस वक्त भी किराए की एक थार गाड़ी की टक्कर से मध्य प्रदेश के रहने वाले एक 65 साल के पर्यटक की जान चली गई थी. एक के बाद एक ऐसी घटनाएं, भला कैसे चुप बैठा जा सकता है?
सिर्फ थार ही क्यों? सरकार और क्या एक्शन लेगी?
अब सवाल ये उठता है कि सरकार सिर्फ थार गाड़ियों को ही क्यों निशाना बना रही है? जवाब ये है कि थार जैसी एसयूवी अपनी दमदार लुक और ओपन-टॉप ऑप्शन की वजह से पर्यटकों में खासी लोकप्रिय है. लेकिन कई बार पर्यटक इसकी पावर को हैंडल नहीं कर पाते या शराब के नशे में ओवरस्पीडिंग कर बैठते हैं.
हालांकि, परिवहन विभाग सिर्फ थार तक ही नहीं रुकने वाला. मंत्री गोडिन्हो ने साफ कर दिया कि ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट 'रेंट-ए-कार' ऑपरेटर्स का ऑडिट भी करेगा.
इस ऑडिट का मकसद ये पता लगाना है कि क्या ये ऑपरेटर लाइसेंसिंग नियमों का ठीक से पालन कर रहे हैं या नहीं. इसमें गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा भी देखी जाएगी.
कई बार देखा गया है कि रेंटल गाड़ियां सड़कों पर ही खड़ी रहती हैं, जिससे जाम और हादसों का खतरा बढ़ता है.
इसके अलावा, विभाग और भी कड़े कदम उठाने की तैयारी में है. किराए की गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और स्पीड गवर्नर लगे होना अनिवार्य है.
अब अधिकारी इनकी जांच और तेज करेंगे. अगर किसी गाड़ी में इनसे छेड़छाड़ पाई गई, तो ऑपरेटर की खैर नहीं.
स्पीड गवर्नर से छेड़छाड़ करके तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना सीधे-सीधे मौत को दावत देने जैसा है, और सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी.
शराब पीकर गाड़ी चलाई तो सीधे जेल?
सबसे बड़ा और कड़ा फैसला शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर लिया गया है. मंत्री जी ने ऐलान किया है कि शराब के नशे में गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने वाले और जानलेवा सड़क हादसों में शामिल ड्राइवरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा.
सोचिए, अब बच निकलने का कोई चांस नहीं. अगर आप नशे में धुत होकर गाड़ी चलाते पकड़े गए और किसी हादसे का हिस्सा बने, तो सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी.
सिर्फ ड्राइवर ही नहीं, जरूरत पड़ने पर उन कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जो ये गाड़ियां किराए पर देती हैं. अगर उनकी गाड़ियों में बार-बार ऐसी लापरवाही पकड़ी जाती है या वे नियमों का पालन नहीं करते, तो उनका भी लाइसेंस खतरे में पड़ सकता है.
परिवहन विभाग ने यह भी पाया है कि किराए पर चलने वाली कई गाड़ियों में अनिवार्य स्पीड गवर्नर के साथ छेड़छाड़ की जाती है, ताकि पर्यटक तेज रफ्तार का मजा ले सकें. लेकिन अब ये मजा सजा में बदलने वाला है.
कुल मिलाकर, गोवा सरकार अब सेफ्टी को लेकर कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है और इसी वजह से ये कड़े फैसले लिए जा रहे हैं.







































