कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक पूर्व समाजवादी पार्टी एमएलसी (MLC) और उनके चार भाइयों पर करोड़ों रुपये की पुश्तैनी जमीन फर्जी वसीयत के जरिए हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। खास बात ये है कि आरोपी पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक पहले से ही औरैया के एक चर्चित गैंगस्टर मामले में जेल की हवा खा रहे हैं। अब उन पर धोखाधड़ी का एक और मामला दर्ज हुआ है, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है।
कहानी शुरू होती है कई साल पहले, जब ग्राम जोत निवासी अवधेश कुमार के परिवार की पुश्तैनी जमीन से जुड़ा एक बड़ा झोल सामने आया। अवधेश कुमार ने रसूलाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनके पिता स्वर्गीय रामशंकर के मामा गोबर्धन चौबे निसंतान थे।
साल 1981 में गोबर्धन चौबे ने अपनी कृषि भूमि और आवासीय संपत्ति को कानूनी तौर पर एक वसीयत के जरिए रामशंकर के नाम कर दिया था। गोबर्धन चौबे की मृत्यु के बाद, ये संपत्ति सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में भी विधिवत रामशंकर के नाम दर्ज हो गई, सब कुछ ठीकठाक चल रहा था।
लेकिन फिर एंट्री होती है उन लोगों की, जिन पर अब धोखाधड़ी का आरोप लगा है। अवधेश कुमार का आरोप है कि पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक (जो पूर्व ब्लॉक प्रमुख भी हैं), रामू पाठक, ललित पाठक और देवेंद्र उर्फ छुन्नू पाठक ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची।
अधिकारों पर अवैध कब्जा और फर्जीवाड़े का खेल
अवधेश कुमार की शिकायत के मुताबिक, इन पांचों भाइयों ने खुद को गोबर्धन चौबे का सगा भांजा बताना शुरू कर दिया, जबकि असलियत में ऐसा नहीं था। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और अपनी पहचान बदलकर राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश की।
ये एक बड़ा खेल था, जिसमें करोड़ों की जमीन दांव पर लगी थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे गोरखधंधे में राजनीतिक रसूख का भरपूर इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों पर दबाव डाला गया और तो और, इस संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी रहस्यमयी तरीके से गायब कर दिए गए। ये सब कुछ इस तरह किया गया ताकि गोबर्धन चौबे की असली वसीयत और रामशंकर के वैध अधिकारों को कमजोर किया जा सके।
सोचिए, एक तरफ एक परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा था, और दूसरी तरफ सियासी ताकत के दम पर खेल चल रहा था। अवधेश कुमार बताते हैं कि उन्होंने सालों तक इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने कई जगह शिकायतें कीं, अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। उल्टे, जब भी उन्होंने इस फर्जीवाड़े का विरोध किया, उन्हें धमकियां मिलीं और कई बार मारपीट का भी सामना करना पड़ा।
ये दिखाता है कि कितनी मजबूत लॉबी इस पूरे मामले के पीछे काम कर रही थी।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
लंबे इंतजार और अनगिनत कोशिशों के बाद, आखिरकार अवधेश कुमार की शिकायत पर पुलिस ने एक्शन लिया है। रसूलाबाद थाने में कमलेश पाठक और उनके चारों भाइयों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच भी शुरू कर दी है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इस मामले की तह तक कैसे पहुंचती है और उन "गायब" हुए दस्तावेजों को कैसे ढूंढ निकालती है, जिनकी वजह से ये पूरा विवाद खड़ा हुआ है।
ये मामला सिर्फ जमीन हड़पने का नहीं है, बल्कि एक ऐसे सिंडिकेट का भी संकेत देता है, जो राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर आम आदमी की संपत्तियों पर कब्जा जमाने की कोशिश करता है। पुलिस के सामने अब कई चुनौतियां हैं – फर्जी वसीयत की सच्चाई उजागर करना, गायब दस्तावेजों का पता लगाना, और आरोपियों की राजनीतिक पहुंच के बावजूद निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना।
पहले से ही जेल में हैं कमलेश पाठक
आपको बता दें कि पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक का विवादों से पुराना नाता रहा है। इसी साल उन्हें औरैया जिले के एक बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में छह साल की सजा सुनाई गई थी।
उस मामले में उनके भाई संतोष पाठक समेत अन्य आरोपियों को भी अदालत ने दोषी ठहराया था। वर्तमान में कमलेश पाठक, संतोष पाठक और रामू पाठक जेल में बंद हैं।
यानी, कमलेश पाठक पहले ही कानूनी शिकंजे में फंसे हुए हैं और अब उन पर जमीन हड़पने का एक और संगीन आरोप लग गया है।
इस नए मामले ने एक बार फिर उनके आपराधिक रिकॉर्ड को सुर्खियों में ला दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे कोई राजनेता अपने पद का दुरुपयोग कर इस तरह के गंभीर अपराधों में संलिप्त हो सकता है।
पुलिस का कहना है कि वे सभी तथ्यों की बारीकी से जांच कर रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ित परिवार को अब न्याय की उम्मीद है, और पुलिस की जांच ही बताएगी कि इस करोड़ों की जमीन के फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल था और इसके पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।


