कानपुर देहात: अरे भाई साहब, दुनिया में कुछ चीजें तो कभी नहीं बदलेंगी! खासकर सरकारी दफ्तरों में 'काम कराने' का तरीका। अब कानपुर देहात से जो खबर आई है, वो इस बात का पक्का सबूत है। यहां एक वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है, जिसमें एक लेखपाल साहब जमीन की पैमाइश यानी नाप-जोख के नाम पर खुलेआम रिश्वत लेते दिख रहे हैं। पैसे भी ऐसे-वैसे नहीं, पूरे 10,000 रुपये! और ये सब एक कार के अंदर बड़े इत्मीनान से हो रहा था। वीडियो सामने आते ही तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब जांच के आदेश दिए गए हैं।
ये कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के गोपालपुर गांव से जुड़ा असली मामला है। वीडियो में दिख रहा है कि लेखपाल अजय वर्मा अपनी गाड़ी की आगे वाली सीट पर बैठे हैं, बिल्कुल नेता जी स्टाइल में।
और उनके पीछे की सीट पर एक शख्स, जिसे उनका 'निजी कर्मचारी' बताया जा रहा है, बड़े ही आराम से एक किसान से पैसे ले रहा है। पैसे लिए ही नहीं जा रहे, बल्कि बाकायदा गिने भी जा रहे हैं।
ये वीडियो करीब दो दिन पुराना बताया जा रहा है और अब ये जनता की अदालत में पहुंच चुका है, जहां हर कोई अपनी-अपनी राय रख रहा है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वो कुछ सेकेंड का है, लेकिन इसमें पूरी 'डील' साफ-साफ दिख रही है। एक कार के अंदर का नजारा है।
ड्राइवर सीट के बगल वाली सीट पर लेखपाल अजय वर्मा साहब बैठे हैं। पीछे की सीट पर उनका निजी कर्मचारी लक्ष्मण (जैसा कि बताया जा रहा है) बैठा है, और उसके सामने एक किसान है।
किसान कुछ पैसे निकालकर लक्ष्मण को दे रहा है। लक्ष्मण उन नोटों को हाथ में लेकर गिनता है।
कुल 10,000 रुपये की ये 'सेवा शुल्क' है, जो जमीन की पैमाइश के लिए ली जा रही है। वीडियो में पैसे लेने के बाद किसान को 'काम होने' का पूरा भरोसा भी दिलाया जा रहा है।
ये नजारा देखकर कोई भी आम आदमी यही कहेगा कि सरकारी दफ्तरों में बिना 'दक्षिणा' के पत्ता भी नहीं हिलता।
अब सवाल ये उठता है कि ये निजी कर्मचारी का कॉन्सेप्ट आया कहां से? अक्सर देखा जाता है कि सरकारी बाबू खुद सीधे पैसे लेने से बचते हैं। इसके लिए वे अपने मातहतों या निजी सहायकों का इस्तेमाल करते हैं।
इससे एक तो वे सीधे आरोपों से बच जाते हैं, दूसरा काम भी 'स्मूथ' चलता रहता है। लेकिन डिजिटल युग में अब ये सारे खेल कैमरे की नजर से बच नहीं पाते।
इस वीडियो ने एक बार फिर इस 'सिस्टम' की पोल खोल दी है, जहां छोटे से छोटे काम के लिए भी आम आदमी को रिश्वत देनी पड़ती है।
प्रशासन की नींद खुली, जांच शुरू
जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला, तो रसूलाबाद तहसील प्रशासन की नींद टूटी। तहसीलदार संतोष कुमार सिंह ने तत्काल इस मामले का संज्ञान लिया।
उन्होंने बिना किसी देरी के संबंधित लेखपाल अजय वर्मा को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
तहसीलदार साहब ने मीडिया को बताया कि वायरल वीडियो की सच्चाई की जांच कराई जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ये देखना दिलचस्प होगा कि इस 'जांच' का नतीजा क्या निकलता है और क्या वाकई लेखपाल साहब पर कोई एक्शन होता है, या फिर मामला सिर्फ लीपापोती तक सिमट कर रह जाता है।
जमीन की पैमाइश का काम किसानों के लिए कितना अहम होता है, ये तो सब जानते हैं। खेती-किसानी में जमीन की सीमा तय होना, बंटवारा होना या फिर किसी विवाद को सुलझाने के लिए पैमाइश बहुत जरूरी होती है।
लेकिन जब इसी काम के लिए किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ें और ऊपर से रिश्वत भी देनी पड़े, तो उनकी कमर टूट जाती है। कई बार तो किसान बेचारे कर्ज लेकर ये पैसे देते हैं, सिर्फ इसलिए ताकि उनका काम हो जाए।
ऐसे में जब कोई सरकारी कर्मचारी इस तरह की हरकत करते हुए पकड़ा जाता है, तो आम जनता का सरकारी तंत्र से भरोसा उठ जाता है।
रसूलपुर तहसील का पुराना रिकॉर्ड
ये पहली बार नहीं है कि रसूलाबाद तहसील का राजस्व विभाग ऐसे मामलों को लेकर सुर्खियों में आया हो। इस तहसील का 'पुराना रिकॉर्ड' भी कुछ खास अच्छा नहीं रहा है।
पहले भी यहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और उनमें अधिकारियों की कथित लापरवाही को लेकर कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ समय पहले ही जिलाधिकारी के निर्देश पर दो लेखपालों को निलंबित भी किया गया था।
तब भी शिकायतें मिली थीं और जांच के बाद कार्रवाई हुई थी। ये नया वीडियो एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
क्या ये सिर्फ कुछ 'भ्रष्ट' कर्मचारियों का मामला है, या फिर ये एक बड़े सिस्टेमैटिक भ्रष्टाचार का हिस्सा है?
बहरहाल, अब उम्मीद यही की जा रही है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी कर्मचारी ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।
और आम जनता का सरकारी सिस्टम पर थोड़ा बहुत भरोसा तो बना रहे। फिलहाल सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं और लोग इंतजार कर रहे हैं कि क्या लेखपाल अजय वर्मा और उनके निजी कर्मचारी लक्ष्मण पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या नहीं।




































