अयोध्या: आधी रात का वक्त था, घड़ी की सुइयां 11:30 बजे का आंकड़ा पार कर चुकी थीं, और सियासी पारा अयोध्या में चढ़ने लगा था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने कुछ साथियों के साथ एक होटल में ठहरे थे। उनका इरादा था अगले दिन यानी मंगलवार को राम मंदिर ट्रस्ट के दफ्तर का घेराव करना। लेकिन पुलिस को यह मंजूर नहीं था। अचानक भारी पुलिस बल होटल के बाहर आ धमका और अजय राय को वहीं नजरबंद कर दिया गया। ये सब हो रहा था राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के बड़े मामले को लेकर, जिसने पूरे यूपी में हड़कंप मचा रखा है।
ये सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं थी, ये एक हाई-वोल्टेज ड्रामा था, जिसने चोरी के इस संवेदनशील मामले को और गर्मा दिया। थोड़ी देर बाद अजय राय को उस होटल से निकालकर कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया।
उधर, वाराणसी से उनकी पत्नी रीना राय ने एक वीडियो संदेश जारी कर सीधे-सीधे बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके पति की आवाज को दबाने के लिए भाजपा सरकार किसी भी हद तक जा सकती है और अगर उनके पति को कुछ भी होता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी 'अधर्मी भाजपा सरकार' की होगी।
रीना राय ने साफ कहा कि 'चढ़ावा चोरों' के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। यह घटना दिखाती है कि राम मंदिर निर्माण के बीच हो रही चोरी ने कैसे राजनीतिक गलियारों में तूफान ला दिया है।
जांच के घेरे में RMO: 17 साल बाद गोरखपुर ट्रांसफर
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला डेवलपमेंट हुआ है। राम मंदिर में पिछले 17 सालों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का आखिरकार ट्रांसफर कर दिया गया है।
उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है। सूत्रों की मानें तो स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अर्जुन देव की भूमिका को अपनी जांच के दायरे में ले लिया है।
अर्जुन देव ही वो शख्स थे जिनके पास राम मंदिर के 1600 कैमरों की निगरानी और सबसे अहम, चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम के CCTV की पूरी जिम्मेदारी थी।
यह कोई छोटा मामला नहीं है। SIT की रिपोर्ट में अर्जुन देव की 17 साल से अयोध्या में लगातार तैनाती और ट्रस्ट के कामकाज में उनकी कथित दखलंदाजी का जिक्र है।
आप सोचिए, जब रामलला टेंट में विराजमान थे, तब भी CCTV का जिम्मा उन्हीं के पास था। 2009 से वो अयोध्या में जमे हुए थे और इस दौरान कई बार उनके ट्रांसफर के आदेश भी जारी हुए, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से उनका ट्रांसफर रुक जाता था।
हाल ही में लखनऊ ट्रांसफर का आदेश भी ऐन मौके पर निरस्त कर दिया गया था। अब इस अचानक हुए ट्रांसफर और उनकी भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।
चंपत राय से लंबी पूछताछ, सरकार ने मांगी फाइनल रिपोर्ट
चढ़ावा चोरी के इस पेचीदा मामले में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी रविवार को पुलिस ने करीब तीन घंटे तक लंबी पूछताछ की। पुलिस ने उनसे पूछा कि उन्हें पहली बार इस चढ़ावा चोरी के बारे में कब और कैसे पता चला और उसके बाद उन्होंने क्या-क्या कदम उठाए।
यह पूछताछ तब हुई जब कोर्ट ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया। इन आरोपियों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू जैसे नाम शामिल हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, सरकार भी अब जल्द से जल्द नतीजे चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, यूपी सरकार ने SIT से इस पूरे मामले की फाइनल रिपोर्ट 'जल्द से जल्द' सौंपने को कहा है।
सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि जांच में कोई ढिलाई न बरती जाए और सत्य सामने आए।
चोरी का खुलासा और अब तक की कार्रवाई
यह पूरा मामला पहली बार 7 जून को सामने आया, जब राम मंदिर के चढ़ावे में बड़ी धांधली की खबरें लीक हुईं। इसके बाद सियासी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। इस टीम को जल्द से जल्द जांच पूरी कर दोषियों को पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया।
लगातार जांच के बाद, 25 जून को इस मामले में पहली FIR दर्ज की गई और उसी दिन पुलिस ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई इतनी तेज थी कि उसी दिन मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ.
अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इन इस्तीफों ने मामले को और भी गर्मा दिया और कई सवाल खड़े कर दिए।
अब सबकी निगाहें SIT की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जांच और कितने बड़े नामों को अपनी जद में लेती है।

