अयोध्या: भैया, गर्मी और उमस से तो हर कोई परेशान है, लेकिन अयोध्या के लोगों के लिए ये मौसम अब एक नई मुसीबत लेकर आया है – सांपों का आतंक! पिछले सिर्फ 36 घंटों की बात करें तो यहां सांप के काटने के पांच मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से दो मरीज तो इतने गंभीर थे कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए अयोध्या के दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। बाकी का इलाज भी डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में चल रहा है। ये आंकड़े बता रहे हैं कि बरसात से पहले की ये उमस और फिर बारिश, इन जहरीले जीवों को घरों और आबादी वाले इलाकों की तरफ धकेल रही है, और लोगों को बेहद सतर्क रहने की ज़रूरत है।
मामला शुरू होता है बीते शनिवार देर शाम से, जब शुकुल बाजार थाना क्षेत्र के नजर अली का पुरवा गांव में 16 साल के रुद्र सेन के साथ एक खौफनाक घटना हुई। रुद्र अपने घर में ही था कि एक जहरीले सांप ने उसे डस लिया।
अब गांव-देहात में अक्सर लोग डर और अज्ञानता में क्या करते हैं? वही हुआ। परिजन रुद्र को सीधे अस्पताल ले जाने की बजाय, पहले खंडासा थाना क्षेत्र में मौजूद गहनाग मंदिर ले गए।
वहां झाड़-फूंक और टोटके से इलाज की कोशिश की गई। शायद परिवार को उम्मीद थी कि मंदिर में चमत्कार होगा और उनका बच्चा ठीक हो जाएगा।
लेकिन भैया, सांप का ज़हर झाड़-फूंक से नहीं उतरता। लौटते समय रुद्र की हालत बिगड़ने लगी, उसने ज़हर के असर से छटपटाना शुरू कर दिया।
ये देखते ही परिवार वाले घबरा गए और बिना देर किए उसे कुमारगंज के सौ बेड अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने तत्काल प्राथमिक उपचार तो दिया, लेकिन रुद्र की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
ऐसे में डॉक्टरों ने फौरन उसे दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां उसकी जान बचाने की जद्दोजहद जारी है।
अयोध्या में सर्पदंश के बढ़ते मामले: क्या कहते हैं आंकड़े?
रुद्र सेन का मामला तो एक बानगी भर है। पिछले 36 घंटों में सर्पदंश के कुल पांच मामले सामने आए हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि ये समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है।
रुद्र के साथ-साथ धनैचा गांव के 16 वर्षीय जीसान को भी सांप ने काटा। वहीं, बकचुना-खंडासा की 36 वर्षीय शांति देवी, 65 वर्षीय हरिनाथ और 40 वर्षीय रोहित मिश्रा भी सांप के शिकार होकर अस्पताल पहुंचे।
इनमें से रुद्र के अलावा एक और गंभीर मरीज को मेडिकल कॉलेज दर्शननगर भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बाकी के मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, और वे भी डॉक्टरों की देखरेख में हैं।
डॉक्टरों की सलाह: सर्पदंश होने पर क्या करें, क्या न करें
अस्पताल के डॉक्टरों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और लोगों से खास अपील की है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में यह आम बात है कि सांप अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं।
दरअसल, जब बिलों में पानी भर जाता है, तो ये जीव सुरक्षित और सूखे ठिकाने की तलाश में घरों और आबादी वाले इलाकों की तरफ रुख करते हैं। ऐसे में लोगों को बहुत ज़्यादा सतर्कता बरतने की ज़रूरत है।
डॉक्टरों की सबसे महत्वपूर्ण सलाह ये है कि अगर किसी को सांप काट ले, तो झाड़-फूंक, तांत्रिक के चक्कर या किसी भी तरह के घरेलू उपचार में अपना कीमती समय बिल्कुल बर्बाद न करें। ये सब सिर्फ अंधविश्वास है और ज़हर के असर को कम नहीं करता, बल्कि स्थिति को और बिगाड़ता है।
उनका साफ कहना है कि सांप काटने पर एक भी मिनट की देरी किए बिना, तत्काल नज़दीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर एंटी-स्नेक वेनम और सही चिकित्सा मिलने से अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है।
जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा, उसके बचने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी। तो भैया, सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अंधविश्वास से दूर रहें।





































