अयोध्या: भैया, अयोध्या में राम मंदिर का काम चल रहा है, लेकिन अब वहां से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे माहौल को गरमा दिया है। मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी का मामला, जिसने पहले ही पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा था, अब वो एक नए मोड़ पर आ गया है। इस चोरी के आरोप में कई लोग पकड़े गए हैं, लेकिन अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंदर ही एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो गया है। सबसे बड़ी बात ये कि अब उन आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलने की तैयारी हो रही है, जिन्होंने मंदिर में नौकरी पाने के बाद कथित तौर पर अवैध तरीके से घर खड़े कर लिए। सोचिए, एक तरफ आस्था का प्रतीक मंदिर निर्माण, दूसरी तरफ उसी के चढ़ावे की चोरी और फिर बुलडोजर एक्शन की तैयारी! मामला बहुत पेंचीदा हो गया है।
मामले में अब तक की सबसे सीधी बात ये है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने सीधे-सीधे पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर उंगली उठा दी है। महाराज ने साफ-साफ कहा, "पूरी गलती गोपाल राव की है।
वे राजनीति कर रहे हैं। वो सबको उलझा देते हैं।
वो राम की परंपरा नहीं मानते।" गोपाल राव, जिनके बारे में बताया जाता है कि वो राम मंदिर के निर्माण प्रभारी और ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य थे, मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं।
ट्रस्ट के एक वरिष्ठ सदस्य का इस तरह खुलकर आरोप लगाना, दिखाता है कि भीतर ही भीतर कितनी खींचतान चल रही है।
लेकिन ये सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित नहीं है। अब सरकार भी इस मामले में आर-पार के मूड में दिख रही है।
सूत्रों की मानें तो चढ़ावा चोरी के आरोपियों के खिलाफ सरकार बहुत सख्त एक्शन लेने वाली है। प्रशासन ने उन घरों की पहचान कर ली है, जिनका नक्शा पास नहीं है या जिन्होंने निर्माण में नियमों का उल्लंघन किया है।
और हां, ये वो घर हैं, जो आरोपियों ने मंदिर में नौकरी लगने के बाद बनवाया हैं। यानी, सरकार सीधे-सीधे अवैध कमाई और अवैध निर्माण दोनों पर चोट करने की तैयारी में है।
चढ़ावा चोरी पर बुलडोजर का प्रहार?
अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन घरों पर अपनी पैनी नजर गड़ा दी है, जो नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए हैं। खासकर उन आरोपियों के घर रडार पर हैं, जो उन्होंने राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद खड़े किए।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज में बन रहा मकान और अनुकल्प मिश्रा का कौशल पुरी स्थित मकान, ये दोनों ही बुलडोजर की जद में आ सकते हैं। भैया, अगर इन घरों के नक्शे पास नहीं हुए या इनमें कोई और अनियमितता पाई गई, तो ADA आज ही इन्हें नोटिस भेज सकता है।
ये सिर्फ चेतावनी नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे संदेश है कि गलत तरीके से बनाई गई कोई भी चीज बख्शी नहीं जाएगी। अब देखना है कि जब ये बुलडोजर चलेगा, तो क्या-क्या नई बातें सामने आती हैं और इसका क्या असर होता है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा पर जांच की आंच
इस पूरे मामले की जांच, जैसा कि आप जानते हैं, यूपी सरकार द्वारा गठित एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है। पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है।
30 जून को अयोध्या जेल में आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ हुई थी। अब बारी है ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से रविवार को 3 घंटे तक लंबी पूछताछ हो चुकी है। अब उनके बयानों को क्रॉस-चेक करने के लिए ट्रस्टी डॉ.
अनिल मिश्रा से भी आज पूछताछ हो सकती है। पुलिस खासकर उनकी भूमिका की पड़ताल करेगी कि लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा जैसे आरोपियों की नियुक्ति में उनकी क्या भूमिका थी।
भैया, जब ट्रस्ट के इतने बड़े नाम जांच के दायरे में आते हैं, तो मामला और गंभीर हो जाता है। इसका मतलब है कि SIT पूरी गहराई से हर एंगल की जांच कर रही है।
गोपाल राव पर गंभीर आरोप और वीडियो का खुलासा
इस बीच, एक और अहम अपडेट ये है कि आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ल का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में अमित शुक्ल नोटों की गड्डियां हाथ में लिए दिखाई दे रहे हैं।
पुलिस इस वीडियो की भी गंभीरता से जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि ये पैसा कहां से आया और इसका चढ़ावा चोरी से क्या संबंध है। दूसरी तरफ, महंत दिनेंद्र दास महाराज ने जिस गोपाल राव पर आरोप लगाए हैं, वो राम मंदिर के निर्माण प्रभारी और ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य थे।
महंत दास के आरोपों में ये बात भी शामिल है कि गोपाल राव राम की परंपरा नहीं मानते और वो राजनीति कर रहे हैं। ये आरोप ऐसे समय में लगे हैं, जब पूरा ट्रस्ट इस चोरी के मामले को लेकर सवालों के घेरे में है।
कैसे खुला राम मंदिर चढ़ावा चोरी का पूरा मामला?
भैया, ये पूरा मामला पहली बार 7 जून को सबके सामने आया था, जब मंदिर के चढ़ावे में बड़ी धांधली की खबरें लीक हुईं। यूपी सरकार ने इस पर फौरन एक्शन लेते हुए 13 जून को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया।
SIT ने तेजी से काम किया और 25 जून को इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। इसी दिन रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इस घटना के बाद, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
एक बात साफ है, ये मामला सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना है कि पुलिस की जांच और सरकारी बुलडोजर का एक्शन क्या-क्या नए खुलासे करता है और इस पूरे मामले का अंत क्या होता है।

