हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में एक बार फिर जंगली हाथियों का कहर टूटा है। बरकट्ठा प्रखंड में शुक्रवार देर रात हाथियों के एक झुंड ने ऐसा उत्पात मचाया कि पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। इस हमले में एक ग्रामीण की जान चली गई, जबकि पीडीएस दुकानदार समेत एक शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया। कई घरों और दुकानों को भी हाथियों ने अपना निशाना बनाया, जिससे भारी नुकसान हुआ है। यह घटना रात के सन्नाटे में हुई, जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी अचानक हाथियों की चिंघाड़ और तोड़फोड़ की आवाजों से उनकी नींद उड़ी।
जानकारी के मुताबिक, हाथियों का यह झुंड सबसे पहले चुगलामो पंचायत के केंदुआ गांव में दाखिल हुआ। देर रात का वक्त था और गांव के लोग गहरी नींद में थे।
किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला। हाथियों ने आते ही घरों पर हमला बोलना शुरू कर दिया।
उनके रौद्र रूप को देखकर ग्रामीण जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी अफरा-तफरी के बीच एक ग्रामीण उनकी चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस हृदय विदारक घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया और लोग डर के मारे अपने घरों में दुबक गए। रात के अंधेरे में अचानक हुए इस हमले ने ग्रामीणों को सहमा दिया।
आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही हाथियों की गतिविधियों की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन इतनी बड़ी तबाही की उम्मीद किसी को नहीं थी।
हाथियों का कहर: केंदुआ से गैड़ा तक
केंदुआ गांव में अपनी खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद हाथियों का झुंड तुर्कबाद होते हुए गैड़ा गांव की ओर बढ़ गया। यहां भी उनका उत्पात जारी रहा।
गैड़ा गांव में हाथियों के हमले का शिकार बने एक पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) दुकानदार युगल पासवान। युगल पासवान को जब हाथियों ने घेरा तो वे अपनी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन हाथियों के आगे उनकी एक न चली।
इस हमले में उनका एक हाथ बुरी तरह टूट गया और उनके शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ युगल पासवान को स्थानीय लोगों की तत्परता से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।
उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
हाथियों के इस हमले की सूचना मिलते ही गैड़ा के उप मुखिया चंद्रदीप पाण्डेय मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मदद से राहत कार्य शुरू कराया और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
चंद्रदीप पाण्डेय ने बताया कि यह इलाका हाथियों का एक स्थापित रूट है। हाथियों का झुंड अक्सर इसी रास्ते से गुजरता हुआ छहरियामो पहाड़ की ओर जाता है।
यह कोई पहली घटना नहीं है, जब हाथियों ने इस क्षेत्र में उत्पात मचाया हो। आए दिन यहां ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिससे ग्रामीण हमेशा डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
दुकानों को नुकसान और वन विभाग की सक्रियता
हाथियों का झुंड गैड़ा गांव में उत्पात मचाने के बाद बसरामो गांव की ओर बढ़ा। यहां उन्होंने कुर्बान मियां की दुकान को अपना निशाना बनाया।
हाथियों ने दुकान में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। दुकान में रखा सारा सामान बिखेर दिया और खाने-पीने की चीजें खा गए, जिससे दुकानदार को भारी आर्थिक क्षति हुई है।
कुर्बान मियां के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी का साधन यही दुकान थी, जो अब हाथियों के हमले से बर्बाद हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वन विभाग की टीम भी पूरी रात सक्रिय रही। टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए थी और उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर रखने की कोशिश कर रही थी।
हालांकि, रात के अंधेरे और जंगली इलाकों की वजह से हाथियों को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो रहा था। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
मुआवजे और स्थायी सुरक्षा की मांग
उप मुखिया चंद्रदीप पाण्डेय ने मृतक के परिजनों, घायल युगल पासवान और अन्य प्रभावित लोगों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन गरीब ग्रामीणों को हुई क्षति की भरपाई करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही, पाण्डेय ने प्रशासन से हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी अपील की है। उनका कहना है कि जब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक ग्रामीणों की जान-माल का खतरा बना रहेगा।
हाथी और इंसान के बीच यह संघर्ष इस क्षेत्र की एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिसके लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर कोई ऐसा रास्ता निकाले, जिससे हाथी भी सुरक्षित रहें और ग्रामीण भी चैन की नींद सो सकें।

