रायबरेली: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार में शनिवार का दिन एक ऐसे ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ का गवाह बना, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। पूरनमऊ गांव में एक अधेड़ उम्र का शख्स मोबाइल टावर पर चढ़ गया। मामला इतना सीधा नहीं था, बल्कि इसके पीछे की कहानी पुलिस और कानून के मकड़जाल में उलझी हुई थी। इस शख्स का आरोप था कि पुलिस उसकी शिकायत पर सुनवाई नहीं कर रही और एकतरफा कार्रवाई कर रही है, जिसके चलते वो इतना हताश हो गया कि जान की परवाह किए बिना मौत के कुएं (यानी मोबाइल टावर) पर जा चढ़ा। घंटों तक चले इस ड्रामे के दौरान गांववालों की भीड़ जमा हो गई और सब यही सोच रहे थे कि आखिर ये नौबत क्यों आई?
रामचंद्रपुर गांव के रहने वाले गोपाल को जब लगा कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही, तो उन्होंने विरोध का ये अनोखा तरीका अपनाया। उनकी मांग थी कि उनके परिवार पर हुए हमले को लेकर क्रॉस-एफआईआर दर्ज की जाए, लेकिन पुलिस सिर्फ दूसरे पक्ष की बात सुन रही थी।
ये घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई और पुलिस प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
कैसे शुरू हुआ ये पूरा मामला?
गोपाल और उनके पड़ोसियों के बीच कुछ दिन पहले एक ज़ोरदार कहासुनी और फिर मारपीट हुई थी। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं थी, बल्कि इसमें दोनों तरफ से लोगों को चोटें आई थीं।
अब होता ये है कि ऐसे मामलों में जो पक्ष पहले पुलिस के पास पहुंच जाता है, उसकी बात पहले सुनी जाती है। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ।
गोपाल के पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को खबर दी और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। पुलिस ने दूसरे पक्ष की शिकायत पर गोपाल के परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
गोपाल का कहना है कि सिर्फ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि उनके घर के लोगों को भी इस मारपीट में गंभीर चोटें आई थीं। उनके शरीर पर चोटों के निशान थे, इलाज भी करवाना पड़ा था।
उन्होंने अपनी शिकायत लेकर ऊंचाहार कोतवाली के कई चक्कर काटे, अधिकारियों से मिन्नतें कीं, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उनकी एक न सुनी। वे लगातार क्रॉस-एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे, ताकि उनके पक्ष की बात भी सामने आ सके और उनके साथ भी न्याय हो।
लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो निराशा उनके मन में घर कर गई। एक नागरिक के तौर पर जब आपको लगता है कि कानून का सहारा लेने के बाद भी आपकी बात नहीं सुनी जा रही, तो हताशा बढ़ना स्वाभाविक है।
मोबाइल टावर पर चढ़ने की वजह क्या थी?
जब हर तरफ से दरवाज़े बंद होते दिखे और पुलिस की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो गोपाल ने एक बहुत ही जोखिम भरा कदम उठाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी बात प्रशासन और जनता तक पहुंचाने के लिए पूरनमऊ गांव में लगे एक ऊंचे मोबाइल टावर को चुना।
ये टावर गांव के बीचों-बीच स्थित था और उस पर चढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं था। सुबह का वक्त था, जब गोपाल चुपचाप टावर की सीढ़ियां चढ़ना शुरू हुए।
पहले तो किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे-जैसे वो ऊपर बढ़ते गए, लोगों की नज़र उन पर पड़ी। देखते ही देखते ये खबर पूरे गांव में फैल गई।
गोपाल का मकसद साफ था: अगर उनकी शिकायत पर क्रॉस-एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तो वे नीचे नहीं उतरेंगे। वे चाहते थे कि उनकी भी सुनी जाए।
इस घटना ने एक बार फिर ये सवाल उठाया कि आखिर न्याय की उम्मीद में लोग कब तक पुलिस थानों के चक्कर काटते रहेंगे और जब उन्हें वहां भी सहारा नहीं मिलता, तो ऐसे खतरनाक कदम उठाने को मजबूर क्यों हो जाते हैं।
घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
जैसे ही पुलिस को इस घटना की सूचना मिली, हड़कंप मच गया। ऊंचाहार कोतवाली की टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
पुलिस के आला अधिकारी भी जानकारी मिलते ही घटनास्थल की ओर भागे। तब तक टावर के नीचे सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो चुकी थी।
सब अपनी आंखों से इस घटना को देख रहे थे और एक पल के लिए भी अपनी नज़रें टावर से नहीं हटा रहे थे, जहां गोपाल एक छोटी सी प्लेटफॉर्म पर बैठे हुए थे। पुलिस ने तुरंत माइक मंगाकर गोपाल से बातचीत शुरू की।
वे उसे नीचे उतरने के लिए समझा रहे थे, लेकिन गोपाल अपनी मांग पर अड़े हुए थे। उनका कहना था कि जब तक उनकी शिकायत पर कार्रवाई का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे नीचे नहीं उतरेंगे।
कई घंटों तक ये ड्रामा चलता रहा। पुलिसकर्मी, जिसमें स्थानीय चौकी इंचार्ज भी शामिल थे, लगातार गोपाल को मना रहे थे।
वे उसे समझा रहे थे कि उसकी बात सुनी जाएगी, निष्पक्ष जांच होगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने उसे विश्वास दिलाया कि उसकी तहरीर को गंभीरता से लिया जाएगा और दूसरे पक्ष के खिलाफ भी अगर साक्ष्य मिलते हैं, तो ज़रूर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
इन आश्वासनों के बाद, आखिरकार गोपाल ने पुलिस की बात मानी। काफी मशक्कत और घंटों की जद्दोजहद के बाद, पुलिस ने उसे सुरक्षित नीचे उतारा।
नीचे उतरते ही उसे मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया और फिर उसकी शिकायत को रिकॉर्ड किया गया।
पुलिस का क्या कहना है?
ऊंचाहार कोतवाली पुलिस के अधिकारियों ने इस मामले पर बयान जारी किया है। उनका कहना है कि जो पूर्व में मुकदमा दर्ज किया गया था, उसकी जांच पहले से ही चल रही है।
अब गोपाल द्वारा दी गई नई तहरीर (शिकायत) की भी गंभीरता से जांच की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि "साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
" इसका मतलब है कि अगर जांच में गोपाल के आरोपों में सच्चाई पाई जाती है और उनके पक्ष में पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो दूसरे पक्ष के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। यह मामला अब पुलिस की गहन जांच के दायरे में है, और देखना होगा कि आगे क्या कार्रवाई होती है और गोपाल को कब तक न्याय मिलता है।

