सहरसा: बिहार के सहरसा जिले में पुलिस महकमे के भीतर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं। सोचिए, थाने में खाकी वर्दी वाले असली पुलिस अधिकारी की कुर्सी पर कोई बाहरी बंदा आकर बैठे, केस की डायरी लिखे और तो और, उन्हीं पुलिसवालों की मिलीभगत से ड्रग्स का धंधा चलाए? सुनने में भले ही ये बात किसी क्राइम थ्रिलर का सीन लगे, लेकिन कोसी रेंज के सलखुआ थाने में ये सब कुछ हकीकत में हो रहा था। इस पूरे खेल का जब पर्दाफाश हुआ तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तीन अलग-अलग जिलों के 11 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और इस पूरे रैकेट के कथित मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
इस सनसनीखेज खुलासे ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस के कुछ अधिकारी एक दलाल के साथ मिलकर न सिर्फ अवैध उगाही का बड़ा रैकेट चला रहे थे, बल्कि उसी दलाल के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी का सिंडिकेट भी धड़ल्ले से चल रहा था।
डीआईजी कुमार आशीष के औचक निरीक्षण ने इस गहरे राज से पर्दा उठाया, जिसके बाद एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की तह तक जाया जा रहा है।
जाँच का सिलसिला कैसे शुरू हुआ?
इस पूरे मामले की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई थी। सहरसा के सलखुआ थाने से कुछ दिनों पहले एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इस वीडियो में एक शख्स, जिसका नाम सतीश कुमार बताया जा रहा है, थाने में पुलिस अधिकारी की कुर्सी पर बैठा दिख रहा था। वीडियो में उसकी गतिविधियां संदिग्ध लग रही थीं और ऐसा लग रहा था जैसे वही थाने का कर्ता-धर्ता हो।
इस वीडियो को पुलिस महानिदेशक (DGP) ने बहुत गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल कोसी क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) कुमार आशीष को व्यक्तिगत रूप से इस मामले की जांच करने का आदेश दिया।
डीजीपी का आदेश मिलने के बाद डीआईजी कुमार आशीष ने बिना किसी को भनक लगने दिए अपनी जांच शुरू की। गुरुवार (2 जुलाई) को जब डीआईजी सलखुआ थाना के निरीक्षण के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में गोसपुर मंदिर के पास बहुअरबा निवासी सतीश कुमार नामक इस दलाल की गतिविधियां उन्हें संदिग्ध लगीं।
सतीश अपनी बाइक पर सवार था। डीआईजी को शक हुआ और उन्होंने अपनी टीम को उसकी बाइक रोकने और तलाशी लेने का निर्देश दिया।
यहीं से इस पूरे सिंडिकेट का कच्चा-चिट्ठा खुलना शुरू हो गया।
दलाल की गिरफ्तारी और खुलासे
पुलिस ने जब सतीश की बाइक की तलाशी ली, तो उसके पास से एक बैग बरामद हुआ। इस बैग में लैपटॉप के साथ-साथ पिपरा, सलखुआ और नवहट्टा थाना की मूल केस डायरी मिलीं।
ये केस डायरियां असल में पुलिस के उन कागजात में से थीं, जिन पर गोपनीय जांच और कार्रवाई की जानकारी दर्ज होती है। एक सामान्य नागरिक के पास इन सरकारी और गोपनीय दस्तावेजों का मिलना अपने आप में एक बड़ा सवाल था।
इसके अलावा, जांच के दौरान थानाध्यक्ष मुकेश कुमार और दलाल सतीश कुमार के बीच मोबाइल फोन के जरिए लगातार संपर्क में रहने के पुख्ता सबूत भी सामने आए। इन सबूतों ने डीआईजी के शक को यकीन में बदल दिया और यह साफ हो गया कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रैकेट है।
इन प्रारंभिक खुलासों के बाद डीआईजी कुमार आशीष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिमरी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी का काम था इस पूरे सिंडिकेट के हर पहलू की गहराई से जांच करना और इसमें शामिल सभी लोगों को बेनकाब करना।
एसआईटी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कथित दलाल सतीश कुमार को हिरासत में ले लिया। उसके खिलाफ सलखुआ थाना में कांड संख्या 0-107/26 दर्ज किया गया है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सतीश को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई और आगे की जाँच
डीआईजी कुमार आशीष ने इस मामले पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए बताया कि आरोपी सतीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है और शुक्रवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे रैकेट में शामिल सभी 11 दोषी अनुसंधान अधिकारियों (IO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में तीन जिलों (सहरसा, सुपौल और मधेपुरा) के दो थानाध्यक्ष भी शामिल हैं। डीआईजी ने कहा कि इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है और उन्हें कठोरतम सजा दिलाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
जांच में यह भी सामने आया है कि दलाल सतीश न सिर्फ कई थानों की पुलिस की डायरी लिखता था, बल्कि वह पुलिस की मिलीभगत से अपने भाई चंद्रकिशोर रजक के साथ मिलकर मादक पदार्थों की तस्करी का सिंडिकेट भी चला रहा था। यानी, पुलिसवालों की मिलीभगत से एक ही जगह पर अवैध वसूली, केस डायरी में हेरफेर और ड्रग्स का धंधा – सब कुछ चल रहा था।
इस मामले में आगे की जांच के तहत, शुक्रवार की देर शाम डीआईजी के निर्देश पर साइबर डीएसपी कल्याण आनंद ने शहर से सटे सुलिंदाबाद इलाके में छापेमारी की। इस छापेमारी में एक ऐसे घर का पता चला, जहां पिछले कई सालों से पुलिस की डायरी लिखवाने का काम चल रहा था।
यहां से भी तीनों जिलों के कई पुलिस पदाधिकारियों और अनुसंधानकर्ताओं से जुड़ी फाइलें मिली हैं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि यह रैकेट कितना गहरा और व्यापक था। पुलिस अभी भी अन्य जगहों पर छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि इस जांच में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
डीआईजी ने कोसी क्षेत्र की जनता से अपील की है कि अगर उन्हें ऐसे किसी दलाल या अवैध गतिविधियों की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें।

