झारखंड: झारखंड में किसान से लेकर आम आदमी तक, सबकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं. मॉनसून की बेरुखी ने सबके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. अरे भई! जैसे किसी खेल में आधे मुकाबले तक टीम पीछे चल रही हो, वैसे ही झारखंड में इस मॉनसून ने खेल बिगाड़ रखा है. 1 जून से 3 जुलाई तक का हिसाब-किताब देखें तो पता चलता है कि सामान्य से 46 फीसदी कम बारिश हुई है. ये आंकड़ा छोटा नहीं, बल्कि खेती-किसानी के लिए बड़ा सिरदर्द है. धान की रोपाई हो या दूसरे फसलें, पानी के बिना सब अधूरा है. ऐसे में जल संकट का खतरा भी मंडरा रहा है.
लेकिन, कहते हैं ना कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए? तो बस, अब मौसम विभाग ने थोड़ी राहत भरी खबर दी है. राजधानी रांची समेत राज्य के आठ जिलों में शनिवार सुबह से ही बादलों ने डेरा जमा लिया था, जैसे कोई मेहमान आने से पहले ही अपनी आहट दे देता है.
और अब खबर ये है कि आज से यानी रविवार से बारिश की गतिविधियों में तेजी आने वाली है. गरजा-चमका और खूब बरसा, ऐसी उम्मीद की जा रही है.
इससे न सिर्फ तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि उमस से भी लोगों को छुटकारा मिलेगा, जिसका लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे.
बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट: 7 जुलाई तक सावधानी जरूरी
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, और ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है. इसका मतलब है कि कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ अच्छी खासी बारिश हो सकती है.
साथ ही, हवा की रफ्तार भी तेज रहेगी – लगभग 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे. ये तो वैसी बात हुई, जैसे कोई तेज रफ्तार गाड़ी अचानक आपके सामने आ जाए! इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.
सिर्फ आज की नहीं, बल्कि 7 जुलाई तक पूरे राज्य में गरज, बिजली चमकने और वज्रपात यानी आसमानी बिजली गिरने की आशंका जताई गई है. ये बिजली किसानों के लिए तो अमृत समान है, लेकिन खुले में खड़े लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.
इतना ही नहीं, दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है. मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को साफ तौर पर चेताया है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, खेतों में या पेड़ों के नीचे खड़े न रहें.
अक्सर देखा जाता है कि लोग बारिश से बचने के लिए पेड़ों के नीचे खड़े हो जाते हैं, लेकिन वज्रपात के समय यह सबसे खतरनाक जगह हो सकती है. इसलिए सुरक्षित रहें और मौसम विभाग की हर सलाह का पालन करें.
शहर हो या गांव, हर जगह सुरक्षा सर्वोपरि है. जिन इलाकों में लगातार कम बारिश हुई है, वहां के लिए ये बारिश किसी वरदान से कम नहीं होगी, लेकिन इसके साथ आने वाले खतरों से भी बचना होगा.
किस जिले को मिली राहत, कौन अब भी पानी को तरसे?
इस मॉनसून सीजन में बारिश का बंटवारा बड़ा ही अजीबोगरीब रहा है, जैसे कोई अपनी पसंदीदा मिठाई तो किसी को बस सूखी रोटी पकड़ा दे. कुछ जिले पानी से तरबतर हो गए, तो कुछ अभी भी बूंद-बूंद को तरस रहे हैं.
आंकड़ों पर गौर करें तो साहिबगंज में अब तक सिर्फ 3.2 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से 99 फीसदी कम है.
सोचिए, 99 फीसदी कम! ये तो बिल्कुल सूखा पड़ने जैसा हाल है. वहीं, इसके ठीक उलट, दुमका ने 207.
8 मिलीमीटर बारिश के साथ अपनी झोली खूब भरी है. वहां के किसान शायद चैन की नींद सो रहे होंगे.
राजधानी रांची, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम और जामताड़ा में भी ठीक-ठाक बारिश दर्ज की गई है, जिससे इन इलाकों में थोड़ी राहत है. लेकिन, कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां बारिश ने मुंह फेर लिया है.
बोकारो, गढ़वा, पलामू, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा और चतरा जैसे इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. इन जिलों में पानी की किल्लत और किसानों की मायूसी साफ देखी जा सकती है.
ये वो इलाके हैं जहां लोग बेसब्री से बादलों के बरसने का इंतजार कर रहे हैं.
शुक्रवार को रांची में दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी. मौसम अचानक सुहाना हो गया और उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली.
यह ऐसा था जैसे कोई लंबा इंतजार खत्म हो गया हो! लेकिन इस खुशी के साथ थोड़ी दिक्कतें भी आईं. कुछ इलाकों में जलभराव के चलते ट्रैफिक जाम हो गया, जिससे लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा.
शहरी इलाकों में अच्छी बारिश के बाद जल निकासी की समस्या एक आम बात है, लेकिन यह बारिश की जरूरत को कम नहीं करती.
तापमान का खेल और आने वाले दिनों की उम्मीद
पिछले 24 घंटों में तापमान का मिजाज भी देखने लायक रहा. बोकारो राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.
1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं, लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.
5 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे वहां की रातें थोड़ी ठंडी रहीं. ये तापमान का खेल भी मॉनसून की चाल को दर्शाता है.
जहां बादल कम होते हैं, वहां गर्मी का प्रकोप ज्यादा होता है. लेकिन अब जब पूरे राज्य में बारिश के तेज होने के आसार हैं, तो उम्मीद है कि ये तापमान भी नीचे गिरेगा और लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी.
मौसम विभाग की इस भविष्यवाणी ने किसानों से लेकर शहरियों तक, हर किसी की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है. अब देखना ये है कि आने वाले दिन वाकई झारखंड के सूखे खेतों और प्यासे शहरों को कितनी राहत पहुंचाते हैं.
उम्मीद है कि इंद्र देवता अब अपने पिटारे से बारिश का पूरा खजाना खोलेंगे और झारखंड को हरियाली और खुशहाली देंगे.

