नालंदा: बिहार के नालंदा जिले से इस बार एक ऐसी खबर आई है, जो सूबे के युवा हॉकी खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली है। मैदान सज चुका है, तैयारियां जोरों पर हैं, और तारीख भी तय हो गई है – 5 जुलाई। ये वो दिन होगा जब राजगीर का चमकता अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम युवा प्रतिभाओं के जुनून का गवाह बनेगा। दरअसल, हॉकी इंडिया की तरफ से होने वाली 16वीं जूनियर राष्ट्रीय पुरुष हॉकी चैंपियनशिप के लिए बिहार की टीम चुनने का डंका बज चुका है, और इस बार कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है, जिसका नाम खुद में एक पहचान है – ओलंपियन गेविन फरेरा। सोचिए, जब एक ओलंपियन खुद मैदान पर उतरकर टैलेंट की तलाश करेगा, तो माहौल कितना चार्ज्ड होगा!
ये सिर्फ एक ट्रायल नहीं, बल्कि बिहार के उन सैकड़ों लड़कों के लिए सुनहरा मौका है, जिन्होंने अपनी हॉकी स्टिक से बड़े-बड़े सपने बुने हैं। राज्य खेल संघ ने साफ कर दिया है कि सिर्फ हुनर ही नहीं, अनुशासन और नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी होगा।
तो अगर आप भी बिहार की जर्सी पहनकर राष्ट्रीय पटल पर चमकने का सपना देखते हैं, तो अपनी स्टिक को धार दे लीजिए, क्योंकि मौका आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।
राजगीर में महामुकाबले की तैयारी: 5 जुलाई को ट्रायल
बिहार की जूनियर हॉकी टीम के लिए चयन प्रक्रिया 5 जुलाई को राजगीर के शानदार अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में सुबह 9 बजे से शुरू होगी। इस स्टेडियम की अपनी पहचान है, और अब यह युवा खिलाड़ियों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत का केंद्र बनेगा।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के मुख्य प्रशिक्षक और भारतीय हॉकी के पूर्व धुरंधर ओलंपियन गेविन फरेरा अपनी पैनी नजरों से हर खिलाड़ी की प्रतिभा को परखेंगे। फरेरा, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है, उनकी उपस्थिति अपने आप में खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगी।
उनका अनुभव और खेल की गहरी समझ सुनिश्चित करेगी कि राज्य के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का ही चयन हो सके।
बिहार राज्य खेल संघ ने सभी जिला हॉकी संघों को खास निर्देश भेजे हैं। उनसे कहा गया है कि वे अपने-अपने जिले के योग्य और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समय पर राजगीर भेजें, ताकि कोई भी होनहार खिलाड़ी इस मौके से चूक न जाए।
यह एक सामूहिक प्रयास है, जहां जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सभी मिलकर बिहार की हॉकी को एक नई दिशा देने में लगे हैं। संघ का मानना है कि ग्रास रूट लेवल पर काम करने वाले जिला संघों की भागीदारी से ही हम सही प्रतिभाओं को ढूंढ पाएंगे, जो शायद बड़े शहरों की चकाचौंध से दूर छोटे कस्बों और गांवों में अपनी स्टिक चमका रहे हों।
उम्र का बंधन और जरूरी दस्तावेज: कोई ढिलाई नहीं
चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के लिए कुछ सख्त नियम और शर्तें तय की गई हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है आयु सीमा। सिर्फ वही खिलाड़ी ट्रायल में भाग ले सकेंगे, जिनका जन्म 1 जनवरी 2007 या उसके बाद हुआ है।
संघ ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई खिलाड़ी निर्धारित आयु सीमा और जरूरी दस्तावेजों के बिना आता है, तो उसे ट्रायल में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम इसलिए इतना कड़ा रखा गया है ताकि सिर्फ सही उम्र के और योग्य खिलाड़ी ही आगे बढ़ें और प्रतियोगिता में निष्पक्षता बनी रहे।
अक्सर ऐसे बड़े आयोजनों में उम्र को लेकर विवाद सामने आते हैं, जिसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।
खिलाड़ियों को रिपोर्टिंग के वक्त कई महत्वपूर्ण दस्तावेज साथ लाने होंगे। इन दस्तावेजों की मूल प्रति (ओरिजिनल) और उनकी छायाप्रति (फोटोकॉपी) दोनों अनिवार्य हैं।
लिस्ट कुछ इस प्रकार है:
- हॉकी इंडिया आईडी कार्ड
- सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र (जैसे वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस)
- आधार कार्ड
- जन्म प्रमाण-पत्र
- मैट्रिक उत्तीर्ण प्रमाण-पत्र
- तीन पासपोर्ट साइज फोटो
इन सभी दस्तावेजों की जांच बड़ी बारीकी से की जाएगी, ताकि कोई भी अनियमितता न हो। यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाली टीम हर कसौटी पर खरी उतरे।
राष्ट्रीय मंच पर बिहार की धमक: कोयम्बटूर का इंतजार
जिस चैंपियनशिप के लिए ये सारी कवायद हो रही है, वह भी कोई छोटी-मोटी प्रतियोगिता नहीं है। 16वीं जूनियर राष्ट्रीय पुरुष हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन तमिलनाडु के कोयम्बटूर शहर में 28 जुलाई से 8 अगस्त 2026 के बीच किया जाएगा।
यह राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट है, जहां देश भर से राज्यों की सर्वश्रेष्ठ जूनियर टीमें एक-दूसरे को टक्कर देंगी। बिहार की टीम को इस बड़े मंच पर मजबूती से उतारने के लिए राज्य खेल प्राधिकरण कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
उनका लक्ष्य सिर्फ टीम भेजना नहीं, बल्कि एक ऐसी टीम भेजना है जो चुनौती पेश करे और पदक के लिए लड़े।
चयनकर्ताओं की नजर सिर्फ खिलाड़ियों की फिजिकल फिटनेस या स्टिक वर्क पर नहीं होगी, बल्कि उनकी तकनीक, खेल के प्रति उनके दृष्टिकोण, दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता और सबसे बढ़कर, टीम भावना पर भी होगी। हॉकी एक टीम गेम है, और एक मजबूत टीम तभी बनती है जब हर खिलाड़ी मिलकर एक यूनिट की तरह काम करे।
ओलंपियन गेविन फरेरा और उनकी टीम इस बात का खास ध्यान रखेगी कि चुने गए खिलाड़ी सिर्फ व्यक्तिगत रूप से अच्छे न हों, बल्कि टीम के लिए एक संपत्ति साबित हों। राजगीर में होने वाला यह ट्रायल बिहार की हॉकी के भविष्य की नींव रखेगा, जिससे उम्मीद है कि राज्य एक बार फिर राष्ट्रीय हॉकी के नक्शे पर अपनी पहचान बनाएगा।
इस पूरे चयन प्रक्रिया का मकसद बिहार में हॉकी के खेल को बढ़ावा देना और युवा खिलाड़ियों को एक सही मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें और राज्य का नाम रोशन कर सकें। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि इस बार एक ऐसी टीम तैयार की जाए, जो न सिर्फ चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करे, बल्कि भविष्य के लिए भी मजबूत खिलाड़ियों की एक नई पीढ़ी तैयार कर सके।

