नालंदा: बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया था। राजगीर में हुए मॉब लिंचिंग के उस भयावह मामले का मुख्य आरोपी, दीनानाथ शरण, आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। दीनानाथ ने बिहारशरीफ न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है, जिसके बाद पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ये वही मामला है जिसमें चोर होने के शक में दो बेगुनाह युवकों, पिंटू और श्रवण, को भीड़ ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना ने समाज के माथे पर एक गहरा दाग लगा दिया था, और अब जबकि मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है, इंसाफ की उम्मीद जगी है।
15 जून की वो रात राजगीर के झुनुकिया बाबा मंदिर के पास हुई ये वारदात किसी को भी सिहरा देने के लिए काफी थी। दो मासूम जानें सिर्फ चोरी के शक में ले ली गईं, वो भी एक उग्र भीड़ के हाथों।
सोचिए, जब ये सब हो रहा होगा, उन लड़कों पर क्या बीत रही होगी? पुलिस के लिए ये सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि समाज में फैल रही इस मॉब लिंचिंग जैसी क्रूरता को रोकने की एक बड़ी चुनौती थी। घटना के तुरंत बाद ही पूरे पुलिस महकमे में गहमागहमी बढ़ गई थी।
लोगों में गुस्सा था, डर था, और न्याय की गुहार थी।
पुलिस ने इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लिया। राजगीर डीएसपी संजीत कुमार ने बताया कि नालंदा के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तुरंत एक विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया गया था।
इस टीम का मकसद सिर्फ और सिर्फ दोषियों को पकड़कर सलाखों के पीछे पहुंचाना था, ताकि आगे ऐसी वारदात करने से पहले कोई सौ बार सोचे। एसआईटी ने काम शुरू किया और सबसे पहले उस वीडियो को खंगाला जो इस घटना के तुरंत बाद वायरल हो गया था।
यह वीडियो, जिसमें भीड़ बेकाबू होकर पीट रही थी, एक अहम सबूत बना।
पुलिस की स्पेशल टीम ने कैसे कसा शिकंजा?
एसआईटी ने सिर्फ वायरल वीडियो पर ही भरोसा नहीं किया। टीम ने घटनास्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी फुटेज को भी बारीकी से देखा।
हर एक एंगल से सबूत जुटाए गए, तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया और संदिग्धों की पहचान की गई। पुलिस के सामने चुनौती बड़ी थी, क्योंकि ऐसी घटनाओं में भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी अक्सर बच निकलने की कोशिश करते हैं।
लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। पहचान होने के बाद, एसआईटी ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी, रात-दिन एक कर दिए।
पुलिस की यह लगातार छापेमारी और दबाव ही था कि एक-एक करके आरोपी सामने आने लगे।
इस पूरे मामले में अब तक कुल 06 सत्यापित आरोपियों की पहचान हुई है। डीएसपी संजीत कुमार ने बताया कि या तो इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, या उन्होंने खुद कोर्ट में सरेंडर कर दिया है, जैसा कि मुख्य आरोपी दीनानाथ शरण ने किया है।
यह पुलिस की एक बड़ी सफलता है कि उन्होंने इस संवेदनशील मामले में सभी मुख्य आरोपियों को ढूंढ निकाला और उन्हें कानून के दायरे में ले आए। यह दिखाता है कि बिहार पुलिस ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति कितनी गंभीर है।
डीएसपी ने आगे बताया कि अनुसंधान अब अपने अंतिम चरण में है। सभी सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं, सभी बयान दर्ज हो चुके हैं और अब पुलिस जल्द ही इस मामले में न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद अगला कदम और भी महत्वपूर्ण होगा। पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि वे न्यायालय से विशेष अनुरोध करेंगे कि इस मामले की सुनवाई ‘स्पीडी ट्रायल’ के माध्यम से की जाए।
इसका मतलब है कि मुकदमे को तेजी से चलाया जाएगा, ताकि दोषियों को उनके किए की सजा जल्द से जल्द मिल सके और पीड़ितों के परिवारों को न्याय मिल सके।
राजगीर थाना क्षेत्र में हुई यह घटना समाज को एक कड़ा संदेश देती है कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पिंटू और श्रवण, जो दीपनगर थाना क्षेत्र के गंजपर के रहने वाले थे, उनकी मौत ने कई सवाल खड़े किए थे।
सवाल यह कि क्या किसी को चोरी के शक में इतनी बेरहमी से मार देना जायज है? क्या भीड़ को यह अधिकार मिल जाता है कि वह किसी की जान ले ले? इस मामले में हुई गिरफ्तारियां और मुख्य आरोपी का आत्मसमर्पण यह उम्मीद जगाता है कि न्याय की जीत होगी और समाज में मॉब लिंचिंग जैसी बर्बर घटनाओं पर लगाम लगेगी। पुलिस प्रशासन की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया है कि कानून का राज स्थापित रहे और कोई भी अपराधी बच न पाए।
अब सबकी निगाहें कोर्ट पर हैं, जहां स्पीडी ट्रायल के जरिए इन दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

