वाराणसी: बुधवार की सुबह, हमेशा की तरह वाराणसी के घाटों पर आस्था और चहल-पहल थी। गंगा में डुबकी लगाने वालों का तांता लगा था, लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना घट गई जिसने पूरे रविदास घाट को सन्न कर दिया। सुबह करीब 10 बजे का वक्त रहा होगा, जब 15 साल की एक बच्ची, जिसकी उम्र अभी खेलकूद और पढ़ाई-लिखाई की थी, गंगा की लहरों में समा गई। जब तक लोग कुछ समझ पाते या उसे बचा पाते, वो जीवन की जंग हार चुकी थी। इस खबर ने पूरे इलाके में मातम और गहरा सदमा फैला दिया है।
बात सिर्फ एक हादसे की नहीं है, इसके पीछे एक परिवार का दर्द है, उनकी बेबसी है। परिवारवालों की मानें तो वो बच्ची थोड़ी दिमागी रूप से कमजोर थी।
इसी वजह से घर के लोग उसे गंगा घाट पर अकेले जाने से मना करते थे। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
वो चुपके से अपने घर से निकली और सीधे गंगा घाट पहुंच गई। परिवार को इसका अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों में उनकी लाडली हमेशा के लिए उनसे दूर चली जाएगी।
घर से महज 500 मीटर दूर था मौत का कुआँ
नगवां इलाके में रहने वाले भरत साहनी बीएचयू में माली का काम करते हैं। उनका घर रविदास घाट से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है।
भरत साहनी के लिए ये दूरी अब उनके जीवन की सबसे दर्दनाक याद बन गई है। उन्होंने बताया कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनकी बेटी कब घर से निकल गई।
जब पड़ोसी ने आकर बताया कि उनकी बच्ची गंगा घाट पर है, तब वे दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
एक पिता के लिए इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है, कि वो अपनी आंखों के सामने अपनी ही बच्ची को खो दे और कुछ न कर पाए। उनके शब्दों में वो दर्द साफ झलक रहा था, “हम लोगों को पता नहीं चला, बगल के लोगों ने जब सूचना दी तब हम घाट पहुंचे लेकिन हम अपनी लड़की को बचा नहीं सके।
” ये सिर्फ एक वाक्य नहीं, ये एक पिता की चीख थी, जो गंगा की लहरों में कहीं गुम हो गई।
घाट पर लोगों ने किया था मना, पर अनसुना कर दिया
रविदास घाट पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और वहां के स्थानीय दुकानदारों ने जो बताया, वो भी दिल को झकझोर देने वाला है। उनका कहना है कि जब किशोरी घाट पर पहुंची थी, तो कुछ लोगों ने उसे अकेले गंगा में नहाने से मना किया था।
शायद लोगों को उसकी मासूमियत और अकेलेपन में कुछ अनहोनी का आभास हो गया था। बताया जाता है कि उन लोगों के कहने पर किशोरी कुछ देर तक गंगा किनारे बैठी भी रही।
सबने सोचा कि वो उनकी बात मान गई है और अब वापस चली जाएगी।
लेकिन अचानक, किसी ने सोचा भी नहीं होगा, वो कब गंगा के गहरे पानी में चली गई, पता ही नहीं चला। जब वो चिल्लाने लगी, तब आस-पास के लोग उसकी तरफ दौड़े।
हर कोई उसे बचाने की कोशिश में जुट गया। कुछ लोगों ने पानी में छलांग भी लगाई, लेकिन गंगा की धारा और गहराई में वो किशोरी बहुत दूर जा चुकी थी।
चंद मिनटों की ये जद्दोजहद आखिर में नाकाम साबित हुई। बचाने वाले अपनी सारी कोशिशों के बावजूद उसे मौत के मुंह से खींच नहीं पाए।
वो मासूम आंखों के सामने देखते-देखते गंगा की गोद में समा गई। घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और दिल में एक अजीब सी टीस उठ रही थी कि काश वो उसे बचा पाते।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। लंका थाना प्रभारी राजकुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद उनकी टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस बल ने स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची के शव को गंगा से बाहर निकाला। लेकिन जैसा कि अक्सर ऐसे मामलों में होता है, तब तक किशोरी की सांसे थम चुकी थीं।
घटनास्थल पर पुलिस टीम ने पूरी जांच पड़ताल की। शव को कब्जे में लेकर तत्काल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ताकि मौत की असली वजह और अन्य पहलुओं की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
पुलिस ने परिवार वालों के बयान भी दर्ज किए हैं। इसमें परिवार ने अपनी बच्ची के दिमागी रूप से कमजोर होने और उसके बिना बताए घर से निकलने की बात पुलिस को बताई है।
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई और कारण तो नहीं था। हालांकि, शुरुआती तौर पर यह एक दुखद डूबने का मामला ही प्रतीत हो रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी। इस घटना ने एक बार फिर गंगा के घाटों पर सुरक्षा और सतर्कता के सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो अकेले या बिना किसी बड़े की देखरेख के नदी किनारे पहुंचते हैं।

