फरीदकोट: पंजाब की शांत मानी जाने वाली धरती पर भी अक्सर कुछ ऐसी हलचल होती रहती है, जो पुलिस को फौरन एक्शन में ले आती है. फरीदकोट जिला भी ऐसे ही एक मामले का गवाह बना, जहां पुलिस ने अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए दो ऐसे युवकों को धर दबोचा जिनके पास से एक खतरनाक पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद हुए. ये मामला न सिर्फ हथियारों की बढ़ती तस्करी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पुलिस के 'असामाजिक तत्वों' पर नकेल कसने के अभियान को भी मजबूत करता है.
कहानी शुरू होती है सादिक थाने से, जहां हवलदार गुरदेव सिंह के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम रोजमर्रा की तरह गश्त पर थी. उनका काम था इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखना और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना.
दोपहर का वक्त रहा होगा, जब सादिक मुख्य चौक पर उन्हें एक 'गुप्त सूचना' मिली. यह सूचना कोई मामूली जानकारी नहीं थी, बल्कि एक पुख्ता खबर थी जिसने पूरे पुलिस दल को अलर्ट पर ला दिया.
सूचना देने वाले ने बताया कि दो युवक फिरोजपुर रोड स्थित गांव डोड की अनाज मंडी में संदिग्ध अवस्था में खड़े हैं. उनके पास अवैध हथियार हैं और वे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं.
ऐसी जानकारी मिलते ही पुलिस के कान खड़े हो गए. मामले की गंभीरता को समझते हुए, टीम ने जरा भी देर नहीं की.
एसएसपी गुरबंस सिंह बैंस के दिशा-निर्देशों पर जिले में पहले से ही असामाजिक तत्वों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा था, और यह सूचना उसी अभियान का एक सीधा संकेत थी.
पुलिस का त्वरित एक्शन और गिरफ्तारी
जैसे ही पुलिस टीम को पुख्ता जानकारी मिली, हवलदार गुरदेव सिंह ने अपने साथियों को साथ लिया और तुरंत गांव डोड की अनाज मंडी की ओर रवाना हो गए. रास्ते में, पुलिसकर्मियों के मन में तमाम तरह के सवाल घूम रहे थे – ये लोग कौन हैं, क्या करने वाले हैं, और उनके पास किस तरह का हथियार हो सकता है? अनाज मंडी पहुंचकर, उन्होंने देखा कि वाकई, दो युवक एक मोटरसाइकिल के साथ खड़े थे और उनकी गतिविधियां सामान्य नहीं लग रही थीं.
वे बार-बार इधर-उधर देख रहे थे, मानो किसी का इंतजार कर रहे हों या किसी मौके की तलाश में हों.
पुलिस ने पूरी चौकसी बरतते हुए उन दोनों युवकों को घेर लिया. बिना किसी प्रतिरोध का मौका दिए, पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की.
शुरुआती पूछताछ में वे घबराए हुए दिखे, जिससे पुलिस का शक और गहरा हो गया. जब उनकी तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम भी हैरान रह गई.
एक युवक के कब्जे से एक .30 बोर की पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए.
यह कोई खिलौना नहीं, बल्कि एक जानलेवा हथियार था, जो किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने के लिए काफी था.
आरोपियों की पहचान और कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों की पहचान की गई. एक का नाम जर्मनप्रीत सिंह था, जो फिरोजपुर जिले के गांव भूरे कलां का रहने वाला था.
दूसरा युवक अमन था, जो फिरोजपुर के ही गांव खाई फेमे की का निवासी था. दोनों का फिरोजपुर से होना भी पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया था, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में इंटर-डिस्ट्रिक्ट कनेक्शन सामने आते हैं.
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए, दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना सादिक में 'आर्म्स एक्ट' के तहत मामला दर्ज कर लिया. यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि एक संभावित अपराध को समय रहते रोकने की एक बड़ी सफलता थी.
पुलिस के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना और अवैध हथियारों के प्रयोग पर लगाम लगाना है.
डीएसपी का बयान: आगे की जांच का खाका
इस पूरे मामले पर डीएसपी तरलोचन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मीडिया को बताया कि पुलिस अब गिरफ्तार किए गए इन दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है.
उनका मकसद सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना है कि ये हथियार कहां से आए और इनका इस्तेमाल किस लिए किया जाना था.
डीएसपी ने आगे बताया कि दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया जाएगा. इस रिमांड का मुख्य उद्देश्य बरामद हथियार के 'बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक' का पता लगाना है.
'बैकवर्ड लिंक' से मतलब है कि ये हथियार इन तक कैसे पहुंचा, किसने बेचा, और कहां से इसकी तस्करी की गई. वहीं, 'फॉरवर्ड लिंक' का मतलब है कि क्या इस हथियार का इस्तेमाल पहले किसी वारदात में किया गया है या इसे आगे किसी और को बेचा जाना था.
डीएसपी ने यह भी कहा कि इस जांच से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे अवैध हथियारों की सप्लाई चेन को तोड़ने में मदद मिलेगी. पुलिस इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है.

