देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का सलेमपुर इलाका बुधवार को एक ऐसी कार्रवाई का गवाह बना, जिसने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों को सख्त संदेश दिया है। सुबह-सुबह जब लोग अपनी दिनचर्या में मशगूल थे, तभी एकाएक प्रशासन की टीम, पुलिस बल और एक भारी-भरकम जेसीबी मशीन 'चकबन्धू कलावत तप्पा सलेमपुर' गांव में दाखिल हुई। माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया, क्योंकि यह मशीन किसी निर्माण के लिए नहीं, बल्कि एक अवैध कब्जे को ढहाने के लिए आई थी। अपर उपजिलाधिकारी न्यायालय के आदेश पर हुई इस कार्रवाई ने इलाके में हड़कंप मचा दिया और लोगों में चर्चा का विषय बन गई कि सरकारी जमीन पर अब किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
असल में, यह कहानी सिर्फ एक बुलडोजर की नहीं, बल्कि न्यायपालिका के आदेश और प्रशासन की सख्ती की है, जो बरसों से चले आ रहे एक अवैध कब्जे को खत्म करने के लिए मुस्तैद थी। देवरिया के राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने कमर कस रखी थी।
उनका मिशन था, 0.006 हेक्टेयर राजस्व भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना, जिस पर काफी समय से कुछ लोगों ने अवैध रूप से दीवारें और छप्पर डालकर कब्जा जमा रखा था।
क्या था सलेमपुर में अवैध कब्जे का पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, यह मामला देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम चकबन्धू कलावत तप्पा सलेमपुर से जुड़ा है। यहां राजस्व विभाग की 0.
006 हेक्टेयर भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। इस जमीन पर ईंट की दीवारें खड़ी कर दी गई थीं और छप्पर डालकर अस्थाई ढांचे बना लिए गए थे, जिससे यह सरकारी जमीन उनकी निजी संपत्ति जैसी दिखने लगी थी।
स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन जब बात नहीं बनी, तो मामला अपर उपजिलाधिकारी न्यायालय तक पहुंचा। न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई की और तथ्यों के आधार पर यह पाया कि यह कब्जा पूरी तरह से अवैध है।
इसके बाद न्यायालय ने संबंधित विभाग को आदेश दिया कि इस अवैध कब्जे को तत्काल हटाकर राजस्व भूमि को मुक्त कराया जाए। यह आदेश कोई मामूली बात नहीं थी, क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा हुआ था।
न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन की तैयारी
अपर उपजिलाधिकारी न्यायालय का आदेश मिलने के बाद राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। ऐसी कार्रवाइयां अक्सर संवेदनशील होती हैं, क्योंकि कब्जे हटाने के दौरान विरोध की आशंका बनी रहती है।
इसलिए, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एक पुख्ता रणनीति बनाई गई। पूरी कार्रवाई को शांतिपूर्ण और नियमानुसार संपन्न कराने के लिए तैयारियां की गईं।
इसमें पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती से लेकर राजस्व विभाग की पूरी टीम को मौके पर मौजूद रखने का फैसला किया गया। तहसीलदार अलका सिंह और नायब तहसीलदार गोपालजी जैसे वरिष्ठ अधिकारी खुद इस अभियान की अगुवाई करने वाले थे।
टीम ने पूरी योजना बनाई कि कैसे शांतिपूर्ण तरीके से अतिक्रमण हटाया जाएगा और सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो, लेकिन सरकारी जमीन मुक्त हो जाए।
मौके पर कौन-कौन था मौजूद?
सुबह का वक्त था और चकबन्धू कलावत तप्पा सलेमपुर गांव में चहल-पहल बढ़ने लगी थी। जैसे ही जेसीबी मशीन के साथ प्रशासन की टीम पहुंची, लोग उत्सुकता और थोड़ी घबराहट के साथ जमा होने लगे।
मौके पर तहसीलदार अलका सिंह और नायब तहसीलदार गोपालजी खुद अपनी टीम के साथ मौजूद थे। उनके साथ राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारी भी थे, जो जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे थे और सीमांकन में मदद कर रहे थे।
इसके अलावा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था।
पुलिसकर्मी पूरे क्षेत्र में फैले हुए थे, ताकि किसी भी तरह की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और कोई भी व्यक्ति कार्रवाई में बाधा न डाल सके। अधिकारियों की पैनी नजर में, एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा था ताकि कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन हो सके।
कैसे चला अतिक्रमण हटाओ अभियान?
जैसे ही सारी तैयारियां पूरी हुईं, जेसीबी मशीन ने अपना काम शुरू कर दिया। पहले ईंट की दीवारों को निशाना बनाया गया, जो अवैध रूप से खड़ी की गई थीं।
मशीन की गरज के साथ दीवारें भरभराकर गिरने लगीं। इसके बाद, उन छप्परों और अन्य अस्थाई ढांचों को हटाया गया, जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे।
पूरी कार्रवाई अधिकारियों की सीधी निगरानी में हुई। तहसीलदार अलका सिंह और नायब तहसीलदार गोपालजी लगातार मौके पर मौजूद रहे और हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रख रहे थे।
इस दौरान किसी भी पक्ष से कोई बड़ी बाधा या विरोध सामने नहीं आया, जो प्रशासन की सुनियोजित रणनीति और भारी पुलिस बल की मौजूदगी का नतीजा था। कुछ ही घंटों के भीतर, लगभग 0.
006 हेक्टेयर राजस्व भूमि पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त हो गई। यह प्रशासन के लिए एक बड़ी सफलता थी, क्योंकि सरकारी जमीन को उसके असली हकदार, यानी जनता के लिए वापस हासिल कर लिया गया था।
प्रशासन का सख्त संदेश और भविष्य की चेतावनी
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद, तहसीलदार अलका सिंह ने मीडिया को बताया कि यह कार्रवाई अपर उपजिलाधिकारी न्यायालय के आदेश का नियमानुसार अनुपालन था। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन सिर्फ आदेशों का पालन कर रहा था और यह सुनिश्चित कर रहा था कि कानून का राज स्थापित हो।
कार्रवाई के बाद, दोनों पक्षों को शांति व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी गई। इसके साथ ही, मौके पर उनसे कार्रवाई संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।
प्रशासन ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में भविष्य में भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। यह संदेश साफ है: सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और प्रशासन पूरी सख्ती के साथ ऐसे कब्जों को हटाएगा।
यह घटना देवरिया जिले के लिए एक मिसाल बन गई है, जो दिखाती है कि कानून और व्यवस्था के सामने कोई भी अवैध कब्जा टिक नहीं सकता।

