देवरिया में ईंट भट्ठे पर छापा; 75 लीटर कच्ची शराब जब्त; मालिक समेत तीन फरार
सारांश
देवरिया में आबकारी और पुलिस की टीम ने एक ईंट भट्ठे पर देर रात छापा मारा। 75 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद हुई, दो गिरफ्तार, लेकिन भट्ठा मालिक फरार। क्या थी पूरी कहानी?

देवरिया में आबकारी और पुलिस की टीम ने एक ईंट भट्ठे पर देर रात छापा मारा। 75 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद हुई, दो गिरफ्तार, लेकिन भट्ठा मालिक फरार। क्या थी पूरी कहानी?

देवरिया: देवरिया के खुखुंदू थाना क्षेत्र में सठियाव की रात अचानक हलचल तेज हो गई। अंधेरा घना था और माहौल में कुछ अजीब सी खामोशी पसरी थी। लेकिन इस खामोशी को चीरते हुए आबकारी विभाग और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने एक बड़े ईंट भट्ठे पर छापा मार दिया। यह कोई मामूली रेड नहीं थी, बल्कि 'अवैध कच्ची शराब' के उस गोरखधंधे को नेस्तनाबूद करने की मुहिम थी, जो शायद लंबे समय से इस इलाके में फल-फूल रहा था। जैसे ही टीम ने भट्ठे पर धावा बोला, अंदर हड़कंप मच गया। देर रात हुई इस कार्रवाई में पुलिस के हाथ 75 लीटर अवैध कच्ची शराब लगी, जो अगर बाजार में खप जाती तो न जाने कितने घरों में जहर घोल देती।
छापेमारी के दौरान मौके से दो लोगों को धर दबोचा गया, जिनकी पहचान मोहम्मद इस्माइल और जितेंद्र कुमार के रूप में हुई है। लेकिन असली खिलाड़ी, यानी ईंट भट्ठा मालिक दीनदयाल कुशवाहा, उनके पार्टनर नृपेंद्र त्रिपाठी और मुंशी संजय, पुलिस के पहुंचने से पहले ही अंधेरे का फायदा उठाकर चंपत हो गए।
ये खबर सिर्फ एक रेड की नहीं है, बल्कि उस बड़ी लड़ाई का हिस्सा है जो प्रशासन अवैध शराब के खिलाफ लगातार लड़ रहा है।
यह पूरा ऑपरेशन आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-2 सलेमपुर, अनंत कुमार मिश्र के नेतृत्व में चलाया गया। उनके साथ खुखुंदू थाना पुलिस के जवान भी मुस्तैद थे।
सठियाव स्थित डी.डी.
के. मार्का ईंट भट्ठे पर जब टीम पहुंची, तो वहां शराब बनाने का पूरा सेटअप देखकर सभी हैरान रह गए।
यह सिर्फ एक भट्ठा नहीं था, बल्कि जहरीली शराब बनाने की एक पूरी फैक्ट्री थी। टीम ने सिर्फ 75 लीटर अवैध कच्ची शराब ही बरामद नहीं की, बल्कि शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले बड़े-बड़े उपकरण भी जब्त किए।
इसमें दो विशाल स्टील के ड्रम, दो एल्यूमिनियम के भदेले (बर्तन), और दो चूल्हे शामिल थे। इन्हीं ड्रमों और भदेलों में लहन सड़ाकर कच्ची शराब तैयार की जाती थी, जो अक्सर जानलेवा साबित होती है।
इसके अलावा, मौके से लगभग 200 किलोग्राम लहन भी बरामद हुआ। ये लहन वो कच्चा माल होता है जिससे शराब तैयार की जाती है।
इसकी बरामदगी के बाद, आबकारी विभाग ने तुरंत नियमानुसार कार्रवाई करते हुए, इस भारी मात्रा में लहन को मौके पर ही नष्ट कर दिया। यह कदम इसलिए जरूरी होता है ताकि कोई और व्यक्ति इस कच्चे माल का इस्तेमाल करके फिर से शराब बनाने के गोरखधंधे में न लग जाए।
सोचिए, 200 किलोग्राम लहन से कितनी और शराब बन सकती थी और कितने लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी!
इस ऑपरेशन में मोहम्मद इस्माइल और जितेंद्र कुमार को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया, जो शायद इस अवैध कारोबार के निचले पायदान के मोहरे थे। उनसे पूछताछ जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क के बारे में और भी कई खुलासे होंगे।
लेकिन पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब फरार हुए तीन मुख्य आरोपियों को पकड़ना है: ईंट भट्ठा मालिक दीनदयाल कुशवाहा, उनके पार्टनर नृपेंद्र त्रिपाठी और मुंशी संजय। ये तीनों ही इस अवैध कारोबार के 'किंगपिन' माने जा रहे हैं और इनके पकड़े जाने से ही इस पूरे नेक्सस की जड़ें हिलेंगी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों और फरार नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध खुखुंदू थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 और आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। यहां भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 का जिक्र करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नया कानून है जिसने पुरानी आपराधिक न्याय प्रणाली को बदला है।
इसके तहत अवैध शराब के निर्माण और बिक्री जैसे अपराधों के लिए और भी सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिसका मतलब है कि इन आरोपियों को अगर दोषी पाया जाता है, तो उन्हें कड़ी सजा मिल सकती है। यह दिखाता है कि सरकार और प्रशासन इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए कितने गंभीर हैं।
इस पूरी कार्रवाई को सफल बनाने के लिए कई अधिकारियों और कर्मियों की टीम ने मिलकर काम किया। आबकारी विभाग की तरफ से आबकारी निरीक्षक सदर सुधीर कुमार सिंह, आबकारी कर्मी पंकज चौधरी, रीता वर्मा, योगेश कुमार और राकेश वर्मा शामिल थे।
पुलिस टीम में उपनिरीक्षक आनंद राव, कांस्टेबल चंदन गहलोत, चंदन वर्मा और विनोद यादव जैसे जांबाज सिपाही मौजूद थे, जिन्होंने देर रात की इस कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह टीम वर्क ही था जिसकी वजह से इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब और उपकरण जब्त किए जा सके।
जिला आबकारी अधिकारी सुरेश चंद्र मिश्र ने इस पूरे अभियान के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिले में अवैध कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक इस अवैध धंधे का पूरी तरह से उन्मूलन नहीं हो जाता, तब तक ऐसे छापे और कार्रवाई लगातार चलती रहेंगी।
यह एक संकेत है कि प्रशासन देवरिया जिले को अवैध शराब के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है, और आगे भी इस तरह की कार्रवाई देखने को मिलेंगी।
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