देवरिया: जिले में बिजली के तारों पर काम करना यानी पल-पल मौत से पंजा लड़ाना। यहां के बिजली कर्मचारी, खासकर संविदा पर काम करने वाले मजदूर, अपनी जान हथेली पर रखकर उपभोक्ताओं के घरों तक रोशनी पहुंचाते हैं। लेकिन अक्सर यही काम उनकी जान का दुश्मन बन जाता है। इन हादसों को रोकने और कर्मचारियों की जिंदगी को सुरक्षित बनाने के लिए अब एक बड़ी पहल हुई है। देवरिया के भटवलिया विद्युत उपकेंद्र पर गुरुवार को संविदा विद्युत कर्मियों के लिए एक खास सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका मकसद सीधा और स्पष्ट था: बिजली लाइनों पर काम करते समय होने वाली दुर्घटनाओं को जड़ से खत्म करना और कर्मचारियों को सुरक्षित काम करने के तरीके सिखाना। ये सिर्फ ट्रेनिंग नहीं थी, बल्कि उनकी जिंदगी बचाने की एक कोशिश थी, एक ऐसी कोशिश जो देर से ही सही, पर बेहद जरूरी थी।
बिजली विभाग का काम देश के सबसे खतरनाक पेशों में से एक है। खुले तार, हाई वोल्टेज, और कभी भी अनहोनी का डर – ये सब इस काम का हिस्सा हैं।
खासकर, संविदा पर काम करने वाले श्रमिक, जो अक्सर कम संसाधनों और जानकारी के साथ खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं। पिछले कुछ सालों में, बिजली के काम के दौरान हुई दुर्घटनाओं में कई संविदा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई है, या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि कई परिवारों के लिए जीवन भर का दर्द हैं। इसी दर्द और खतरे को समझते हुए, भटवलिया विद्युत उपकेंद्र पर यह विशेष ट्रेनिंग आयोजित की गई, ताकि हर कर्मचारी बिजली के झटके से नहीं, बल्कि अपनी सूझबूझ और सुरक्षा उपकरणों के साथ वापस घर लौटे।
हादसों का सिलसिला और सुरक्षा का सबक
अक्सर देखा जाता है कि संविदा कर्मी जल्दबाजी या जानकारी के अभाव में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर देते हैं। कभी शटडाउन लिए बिना काम शुरू कर देते हैं, तो कभी सही सुरक्षा उपकरण नहीं पहनते।
ऐसे में छोटी सी गलती भी जानलेवा साबित होती है। इस ट्रेनिंग का मुख्य जोर इन्हीं गलतियों को दूर करने और कर्मचारियों को हर कदम पर सुरक्षित रहने का मंत्र देने पर था।
विभाग के अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि किसी भी लाइन पर काम शुरू करने से पहले निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। ये कोई दिखावा नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का मंत्र है।
प्रशिक्षण के दौरान, संविदा कर्मियों को बिजली के खंभों पर चढ़ने से लेकर तार जोड़ने और मरम्मत करने तक की हर प्रक्रिया में बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है 'शटडाउन' लेने की प्रक्रिया।
अधिकारियों ने समझाया कि कैसे बिजली आपूर्ति को पूरी तरह से बंद किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई गलती से भी उसे दोबारा चालू न कर दे। इसके साथ ही, काम करने वाली जगह को सुरक्षित कैसे बनाएं, इसकी भी ट्रेनिंग दी गई।
उदाहरण के लिए, आसपास के लोगों को चेतावनी देना, कार्यक्षेत्र को बैरिकेड करना, और यह सुनिश्चित करना कि कोई अनाधिकृत व्यक्ति काम करने वाली जगह पर न आए।
क्या सिखाया गया इस खास ट्रेनिंग में?
इस ट्रेनिंग में सिर्फ नियमों की किताबी बातें नहीं बताई गईं, बल्कि प्रैक्टिकल तरीके से समझाया गया कि असल में क्या करना चाहिए।
- शटडाउन की प्रक्रिया: कैसे लाइन को पूरी तरह से डी-एनर्जाइज करें, और कैसे ‘लॉकआउट-टैगआउट’ (LOTO) प्रक्रिया का पालन करें, ताकि गलती से भी बिजली चालू न हो जाए।
- सुरक्षा उपकरण: कर्मचारियों को बताया गया कि हेलमेट, इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, इंसुलेटेड जूते, और अर्थिंग रॉड जैसे उपकरणों का सही इस्तेमाल कैसे करें। ये उपकरण सिर्फ दिखाने के लिए नहीं होते, बल्कि आपकी जिंदगी और मौत के बीच की दीवार होते हैं।
- कार्यस्थल की सुरक्षा: बिजली के खंभे या टावर पर काम करते समय स्थिरता, आसपास के वातावरण का मूल्यांकन, और आपातकालीन स्थितियों में क्या करें, इस पर भी जोर दिया गया।
- पुनः आपूर्ति से पहले सावधानियां: काम खत्म होने के बाद, बिजली की आपूर्ति को बहाल करने से पहले किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसकी भी विस्तार से जानकारी दी गई। यह सुनिश्चित करना कि सभी कर्मचारी सुरक्षित स्थान पर हैं और उपकरण हटा लिए गए हैं, बेहद अहम है।
- प्राथमिक उपचार: किसी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाए, इसकी भी संक्षिप्त जानकारी दी गई, क्योंकि कई बार तुरंत की गई मदद जान बचा सकती है।
अधिकारियों का जोर: शून्य दुर्घटना का लक्ष्य
इस अवसर पर अधीक्षण अभियंता (एसई) अमित कुमार सिंह ने अपने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक बेहद अहम बात कही। उन्होंने कहा, "लाइनों पर काम करते हुए कर्मचारी लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
" उनके इस बयान में एक कड़वी सच्चाई छिपी थी – कि अक्सर सुरक्षा को नजरअंदाज करने का नतीजा जान और माल का नुकसान होता है। एसई सिंह ने जोर देकर कहा कि "सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करके ही विद्युत कार्य किए जाएं, ताकि कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं को शून्य किया जा सके और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
"
उनका लक्ष्य स्पष्ट था: 'शून्य दुर्घटना'। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हर कर्मचारी की जिंदगी को अहमियत देने का संकल्प है।
जब कोई कर्मचारी काम पर जाता है, तो परिवार उसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करता है। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी है कि वह हर संभव सुरक्षा सुनिश्चित करे।
यह प्रशिक्षण इसी दिशा में एक मजबूत कदम है। संविदा कर्मियों को भी यह समझना होगा कि उनकी अपनी सुरक्षा सबसे पहले है।
नियमों का पालन करने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि जिंदगी दोबारा नहीं मिलती।
जिम्मेदार कौन और पहल कितनी मजबूत?
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है। अधीक्षण अभियंता अमित कुमार सिंह के अलावा, अधिशासी अभियंता चंद्रमा प्रसाद, उपखंड अधिकारी प्रत्यूष बल्लभ और अमित प्रताप सिंह, अवर अभियंता मनीष गुप्ता, शिवशंकर प्रसाद, शशांक चौबे और अमर प्रसाद सहित कई विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में संविदा कर्मी उपस्थित रहे।
इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की मौजूदगी यह बताती है कि विभाग अब सुरक्षा को लेकर गंभीर है और सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव चाहता है।
यह पहल सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा होनी चाहिए। समय-समय पर ऐसी ट्रेनिंग, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और सख्त निगरानी ही 'शून्य दुर्घटना' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है।
संविदा कर्मियों को भी यह समझना होगा कि उनकी जान की कीमत सबसे ज्यादा है और उन्हें सुरक्षा मानकों का पालन करने में कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उम्मीद है कि भटवलिया उपकेंद्र से शुरू हुई यह पहल देवरिया जिले के हर कोने तक पहुंचेगी और बिजली के तारों पर काम करने वाले हर हाथ को सुरक्षा का कवच मिलेगा, ताकि वे अपने परिवार के पास हर दिन सुरक्षित लौट सकें।