मोहाली: अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग, जिसे अक्सर पंजाब और हरियाणा की धड़कन कहा जाता है, बुधवार को एक भयानक मंज़र का गवाह बना। सुबह-सुबह जब लोग अपने-अपने कामों पर निकलने की जल्दी में थे, तभी एक ऐसा हादसा हुआ जिसने न सिर्फ दो नौजवानों की जान खतरे में डाल दी, बल्कि कई घंटों तक इस व्यस्त हाईवे पर ट्रैफिक को भी रोक दिया। इंडस अस्पताल के सामने सड़क किनारे खड़े एक खराब ट्रॉले में पीछे से एक तेज रफ्तार बाइक जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक पूरी तरह से ट्रॉले के पिछले हिस्से में समा गई और उस पर सवार दो युवक सड़क पर लहूलुहान होकर गिर पड़े।
हादसा होते ही सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। आस-पास मौजूद राहगीर और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।
किसी ने पुलिस को खबर की तो किसी ने एम्बुलेंस बुलाने का इंतजाम किया। घायल युवकों को तुरंत इंडस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
सवाल यह उठ रहा था कि आखिर सड़क के बीचों-बीच खड़े इस विशालकाय ट्रॉले को देखकर बाइक सवार क्यों नहीं संभले? प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि ट्रॉले के ड्राइवर ने न तो कोई इंडिकेटर लगाया था और न ही किसी तरह का सूचक जिससे यह पता चल सके कि वाहन खराब है। रात के अंधेरे या सुबह की धुंध में ऐसे खड़े वाहन का दिखना मुश्किल होता है, और शायद यही वजह इस हादसे की जड़ बन गई।
हादसे का मंज़र और बचाव कार्य
सुबह का वक्त था जब मोटरसाइकिल इंडस अस्पताल के ठीक सामने, सड़क के बीच में खड़े खराब ट्रॉले के पिछले हिस्से से टकराई। टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वह ट्रॉले के नीचे जा फंसी।
बाइक पर सवार दोनों युवक, जिनकी पहचान अभी साफ नहीं हो पाई है, टक्कर के बाद हवा में उछलकर सड़क पर गिर पड़े। उनके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि खून से लथपथ दोनों युवकों को देखकर वहां मौजूद हर शख्स दहशत में था। लोग तुरंत हरकत में आए।
कुछ ने अपने रुमाल से खून रोकने की कोशिश की तो कुछ ने अस्पताल से मदद मांगी, जो महज कुछ ही दूरी पर था। आनन-फानन में दोनों घायलों को इंडस अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रही है।
ट्रॉले चालक की सफाई और जांच का सिलसिला
मौके पर मौजूद लोगों ने खराब ट्रॉले के चालक को घेर लिया। उसका कहना था कि वह गुजरात से डेराबस्सी की ओर आ रहा था।
इंडस अस्पताल के पास पहुंचने पर अचानक उसके ट्रॉले में तकनीकी खराबी आ गई। मजबूरन उसे अपना भारी-भरकम वाहन सड़क किनारे रोकना पड़ा।
चालक ने बताया कि वह ट्रॉले की मरम्मत के लिए औजार लेने गया था, तभी यह दुर्घटना हो गई। उसका दावा है कि उसने वाहन को सड़क के बिल्कुल किनारे खड़ा किया था, हालांकि राहगीरों की बात इससे अलग थी।
डेराबस्सी पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने ट्रॉले चालक का बयान दर्ज किया है और मौके का मुआयना किया है।
यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चालक की तरफ से कोई लापरवाही तो नहीं बरती गई, खासकर चेतावनी संकेत न लगाने को लेकर।
हाईवे पर घंटों जाम और प्रशासन की तत्परता
इस भयानक दुर्घटना के बाद अंबाला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। चूंकि यह एक बहुत ही व्यस्त मार्ग है, इसलिए देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
सुबह के वक्त यात्रियों और दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही डेराबस्सी पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमें भी मौके पर पहुंचीं।
पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद सबसे पहले घटनास्थल पर व्यवस्था संभाली। यातायात को सुचारु करने के लिए पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
उन्होंने वैकल्पिक मार्गों की तलाश की और धीरे-धीरे एक लेन से ट्रैफिक को निकालना शुरू किया। एनएचएआई की टीम ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाने का काम किया ताकि राजमार्ग को पूरी तरह से खोला जा सके।
पुलिस ने बताया है कि दुर्घटना के हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है। ट्रॉले चालक की भूमिका, बाइक सवारों की गति और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं, इन सभी बिंदुओं पर गौर किया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घायल युवकों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और उम्मीद है कि वे जल्द स्वस्थ होंगे।
बहरहाल, यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़कों पर गाड़ी चलाते समय और वाहन खड़ा करते समय कितनी सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि ऐसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके।

