मोहाली: सोचिए, गर्मियों की तपती रातों में आपके घर की बिजली 20-20 घंटे तक गुल रहे। ऊपर से उमस और गर्मी से बच्चे, बूढ़े सब बेहाल। फ़ोन मिलाओ तो बिजली विभाग का कोई अधिकारी फ़ोन न उठाए। ऐसे में किसी का भी सब्र टूट जाए। पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ कस्बे में ठीक ऐसा ही हुआ। सोमवार की रात, जब लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, तो उन्होंने घरों से निकलकर सीधे चंडीगढ़-खरड़ मुख्य हाईवे को जाम कर दिया। ये कोई छोटी-मोटी भीड़ नहीं थी, बल्कि सैकड़ों की संख्या में परेशान लोग बिजली विभाग की मनमानी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे।
खरड़ बस स्टैंड के पास बिजली निगम के दफ़्तर के सामने हुआ ये प्रदर्शन कोई 3-4 घंटे तक चला। नतीजा? हाईवे पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
रात के उस पहर में भी जो लोग अपने घरों से निकलकर गुस्से में चीख़ रहे थे, उनका सीधा आरोप था कि उनकी शिकायतें लगातार की जा रही हैं, लेकिन बिजली विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। यह मंजर दिखा रहा था कि लोगों का धैर्य अब जवाब दे चुका है।
बिजली गुल; घंटों परेशानी
प्रदर्शनकारियों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि पिछले दो दिनों से खरड़ के कई इलाकों में बिजली सप्लाई का बुरा हाल है। कुछ कॉलोनियों में तो 15 से 20 घंटे तक बिजली गुल रही।
वहीं, दूसरे इलाकों में बार-बार बिजली कट लगने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कल्पना कीजिए, इतनी भीषण गर्मी और ऊपर से घुटन भरी उमस, ऐसे में बिना बिजली घरों में रहना किसी सजा से कम नहीं।
छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग पूरी रात बिजली के बिना बेचैन रहे। कई लोग तो आधी रात को ही अपने घरों से बाहर आ गए थे, ताकि थोड़ी ठंडी हवा मिल सके।
उनका कहना था कि बिजली विभाग को इन लोगों की परेशानी से कोई मतलब नहीं।
हेल्पलाइन नंबर भी बेअसर; लोग बेबस
लोगों का गुस्सा सिर्फ बिजली कटौती को लेकर नहीं था, बल्कि बिजली विभाग की लापरवाही भी उनकी झुंझलाहट का बड़ा कारण थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्होंने बिजली निगम के हेल्पलाइन नंबरों पर बार-बार फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल नहीं उठाई।
कई नंबर तो बंद मिले, और जो खुले भी थे, उन पर घंटों तक कोई जवाब नहीं दिया गया। एक प्रदर्शनकारी ने भड़कते हुए कहा, "जब हमारी सुनने वाला कोई नहीं, तो हम सड़कों पर न उतरें तो क्या करें? विभाग हमें मजबूर कर रहा है कि हम यूँ आधी रात को बच्चों को लेकर हाईवे पर जाम लगाएं।
" यह स्थिति दिखाती है कि जनता की समस्याओं को लेकर सरकारी तंत्र कितना लापरवाह है।
पुलिस भी परेशान; अधिकारी नदारद
हाईवे जाम और प्रदर्शन की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारीयों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की।
उन्होंने बिजली विभाग के एसडीओ और अन्य संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, ताकि समस्या का समाधान हो सके और जाम खुलवाया जा सके। लेकिन लोगों के मुताबिक, पुलिस ने कई बार फोन किए, फिर भी किसी अधिकारी ने कॉल रिसीव नहीं की।
सोचिए, पुलिस खुद विभाग के अधिकारियों को बुला रही है, और वो फोन तक नहीं उठा रहे! इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। वे बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे।
रात के अंधेरे में "बिजली विभाग मुर्दाबाद!" के नारे हाईवे पर गूँज रहे थे।
देर रात बहाल हुई सप्लाई, पर लो वोल्टेज ने छोड़ा अधूरा
पुलिस के लगातार हस्तक्षेप और दबाव के बाद, देर रात करीब ढाई से तीन बजे के बीच शहर के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल की गई। लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह राहत अधूरी थी।
उनका कहना था कि बिजली तो आई, लेकिन वोल्टेज इतना कम था कि पंखे तक नहीं चल पाए। बल्ब टिमटिमाते रहे और कूलर-एसी तो चलने का सवाल ही नहीं।
लोगों ने घंटों इंतजार किया, प्रदर्शन किया, पुलिस ने बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनकी बात सुनने मौके पर नहीं पहुंचा। सुबह होते-होते निराश होकर लोग अपने घरों को लौट गए।
उनका प्रदर्शन तो खत्म हो गया, लेकिन दिल में टीस और अगले बिजली कट का डर अब भी बाकी था।
दावों की पोल खुली; आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम ने गर्मियों में बिजली आपूर्ति बनाए रखने के बिजली विभाग के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल दी है। लोगों का साफ कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
यह सिर्फ एक रात का गुस्सा नहीं था, बल्कि बिजली विभाग की लचर व्यवस्था के खिलाफ लोगों की वर्षों की परेशानी का विस्फोट था। अब देखना ये है कि क्या विभाग इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है, या फिर आने वाले दिनों में मोहाली के खरड़ को फिर से इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ेगा?

