अफगानिस्तान: अरे भैया! दुनिया में अभी एक खबर ऐसी आई है, जिसने सबको चौंका दिया है। आमतौर पर हम देखते हैं कि पाकिस्तान की तरफ से अफगानिस्तान में हवाई हमले होते रहते हैं, लेकिन इस बार पासा पलट गया है। अफगानिस्तान ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर ISIS के ठिकानों पर धुआंधार हवाई हमले किए हैं। यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ा जवाबी हमला माना जा रहा है।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने जो बयान जारी किया है, उसके मुताबिक, ये हवाई हमले पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में हुए हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के अंदर हमलों की साजिश रचने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
अब अफगान सरकार ने सीधे-सीधे चेतावनी दे दी है, "जो भी हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा, हम उसे हर जगह निशाना बनाएंगे।" यानी बात साफ है, भैया! अब अफगानिस्तान भी आर-पार के मूड में दिख रहा है।
मंत्रालय ने हमले वाली जगहों का भी ब्योरा दिया है। उनके हिसाब से, बलूचिस्तान के पिशिन जिले में सरानान, खैबर पख्तूनख्वा के कंबर खेल और चित्राल की शाह सलीम घाटी में यह कार्रवाई हुई है।
अफगानिस्तान का दावा है कि इन हमलों में कई आतंकवादी मारे गए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा और किया कि सरानान इलाके में तो ISIS आतंकी एक स्कूल को अपना अड्डा बनाकर बैठे थे।
जरा सोचिए, बच्चों की पढ़ाई की जगह को ये आतंकी अपनी गंदी हरकतों के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।
सीमा पार हमलों की कहानी और भारत का रुख
अब आप सोच रहे होंगे कि अफगानिस्तान ने अचानक ये कदम क्यों उठाया? दरअसल, हाल ही में पाकिस्तान की तरफ से अफगानिस्तान में सीमा पार हवाई हमले किए गए थे। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इन हमलों में कई बेगुनाह आम नागरिक मारे गए थे।
इसी का बदला लेने के लिए अफगानिस्तान ने ये पलटवार किया है। ये तो वही बात हो गई, 'ईंट का जवाब पत्थर से।
'
आपको याद होगा, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हवाई हमले किए थे, तब भारत ने भी इसकी कड़ी आलोचना की थी। भारत ने साफ कहा था कि पाकिस्तान के ये हमले अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला हैं और इससे पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
अब जब अफगानिस्तान ने पलटवार किया है, तो देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। वैसे, इस पूरे मामले से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते और खराब होने तय हैं।
ब्रिटेन में बाल दुष्कर्मी की रिहाई और नागरिकता का पेच
अब जरा दुनिया के दूसरे कोने, यानी ब्रिटेन की तरफ चलते हैं। यहां भी एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है।
ब्रिटेन में ‘रोचडेल ग्रूमिंग गैंग’ का एक कुख्यात दोषी है, जिसका नाम है शबीर अहमद। यह जनाब गुरुवार को जेल से रिहा होने वाले हैं, जबकि उन्होंने अपनी जिंदगी के 14 साल सलाखों के पीछे काटे हैं।
73 साल के इस शबीर अहमद को 2012 में नाबालिगों से दुष्कर्म, यौन शोषण के लिए मानव तस्करी और कई दूसरे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया था। तब उसे 19 साल की सजा मिली थी।
उसी साल उसे बाल दुष्कर्म के 30 और मामलों में 22 साल की अतिरिक्त सजा सुनाई गई थी। चूंकि दोनों सजाएं साथ-साथ चल रही थीं, इसलिए अब वह रिहा हो रहा है।
लेकिन इस खबर में ट्विस्ट यह है कि शबीर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता रद्द की जा चुकी है, फिर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेजा जा सकता। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक, वहां के मौजूदा इमिग्रेशन कानून कुछ ऐसे हैं कि उसे देश से बाहर नहीं निकाला जा सकता।
यह मामला दिखाता है कि कैसे कानून में कुछ पेच ऐसे होते हैं, जो कभी-कभी न्याय की राह में बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि रिहा होने के बाद शबीर अहमद को 24 घंटे निगरानी वाले एक आवास में रखा जाएगा। उस पर कर्फ्यू लगेगा, कुछ खास इलाकों में जाने पर पाबंदी होगी और ऐसी ही कई दूसरी निगरानी संबंधी शर्तें भी लागू होंगी।
यानी उसे पूरी आजादी नहीं मिलेगी, लेकिन फिर भी एक दोषी का इतनी गंभीर सजा के बाद भी देश में रहना, एक बड़ा सवाल है। रोचडेल ग्रूमिंग गैंग का मामला ब्रिटेन के उन बड़े मामलों में से एक है, जहां पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर पीड़ितों की शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई न करने के आरोप लगे थे।
यह दिखाता है कि कैसे सिस्टम की लापरवाही कई बार अपराधियों को बढ़ावा देती है और पीड़ितों को और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।
इंग्लैंड के शहरों में सार्वजनिक जगहों पर शराबबंदी
ब्रिटेन से एक और खबर आ रही है, जो थोड़ी अलग है, लेकिन सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी है। इंग्लैंड के केंट तट पर बसे दो शहर हैं – मार्गेट और रैम्सगेट।
इन शहरों में बढ़ती हिंसा और असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब इन शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पूरे तीन साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यह आदेश बुधवार से लागू हो गया है।
इस नए नियम के तहत, पुलिस को यह अधिकार होगा कि वह सार्वजनिक स्थानों पर अगर कोई शराब पीता पाया गया, तो उसकी शराब जब्त कर ले। और अगर कोई इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो उस पर 1,000 पाउंड (यानी करीब 1.
3 लाख रुपये) तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है।
भले ही इंग्लैंड और वेल्स के ज्यादातर हिस्सों में सार्वजनिक जगहों पर शराब पीना कानूनी है, लेकिन स्थानीय परिषदें ‘पब्लिक स्पेसेज प्रोटेक्शन ऑर्डर’ (PSPO) नाम के कानून के तहत संवेदनशील इलाकों में ऐसे प्रतिबंध लागू कर सकती हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मार्गेट शहर में दर्ज होने वाली करीब 70% से ज्यादा कानून-व्यवस्था संबंधी घटनाएं शराब के नशे में होने वाली असामाजिक गतिविधियों से ही जुड़ी होती हैं।
यानी यह प्रतिबंध कहीं न कहीं कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश है। अब देखना होगा कि ये तीन साल का बैन इन शहरों में शांति और व्यवस्था लाने में कितना कामयाब होता है।

