नैनीताल: राजस्थान की तपती रेतीली ज़मीन से चलकर उत्तराखंड के हरे-भरे पहाड़ों की ओर लौट रहा एक फौजी, अपने परिवार से मिलने की उम्मीद पाले हुए था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. जैसलमेर में देश की सेवा कर रहे BSF के हेड कॉन्स्टेबल सत्यपाल सिंह की घर वापसी की वो यात्रा मौत के सफ़र में बदल गई. चलती ट्रेन में उन्हें ज़हर देकर उनका सारा सामान लूट लिया गया और जब ट्रेन अपने आख़िरी पड़ाव, काठगोदाम स्टेशन पहुंची, तब तक वो अपनी ज़िंदगी की जंग हार चुके थे. उनकी लाश जनरल डिब्बे में बेसुध पड़ी मिली, और इस खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है.
ये मामला सिर्फ़ एक चोरी या हत्या का नहीं है, बल्कि एक ऐसे सिपाही की दर्दनाक कहानी है, जिसने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया, लेकिन घर लौटते वक़्त उसे अपनों का कंधा भी नसीब नहीं हो पाया. उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िले के रुड़की के रहने वाले सत्यपाल सिंह, अपने 53 साल की उम्र में भी पूरी मुस्तैदी से सीमा पर डटे हुए थे.
पुलिस काठगोदाम स्टेशन पर मिली इस लाश को पहले एक अज्ञात शख्स का मानकर चल रही थी, लेकिन जब उसकी जेब से आधार कार्ड निकला, तो पता चला कि ये कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल का एक जवान है. फिर क्या था, पुलिस हरकत में आई और हत्या का मामला दर्ज़ कर जांच तेज़ कर दी गई है.
छुट्टी पर घर लौट रहे थे सत्यपाल सिंह
सत्यपाल सिंह जैसलमेर में BSF की 20वीं बटालियन में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे. गर्मी की छुट्टियां थीं और परिवार बेसब्री से उनका इंतज़ार कर रहा था.
27 जून को उन्होंने जैसलमेर से रानीखेत एक्सप्रेस में सवार होकर घर का रास्ता पकड़ा. उनका इरादा था कि वो दिल्ली में उतरेंगे और वहां से हरिद्वार-रुड़की के लिए दूसरी ट्रेन पकड़ेंगे.
लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था.
ट्रेन दिल्ली पहुंची, लेकिन सत्यपाल सिंह दिल्ली में नहीं उतर पाए. वो ट्रेन में ही आगे बढ़ते चले गए.
जोधपुर से काठगोदाम तक का ये सफ़र 960 किलोमीटर से भी ज़्यादा का है. ये सोचकर भी अजीब लगता है कि एक जवान इतने लंबे सफ़र में, एक जनरल बोगी में, बेसुध पड़ा रहा और किसी सहयात्री या ट्रेन स्टाफ की नज़र उस पर नहीं पड़ी.
सवाल ये भी है कि अगर उन्हें ज़हर दिया गया, तो वो किस स्टेशन पर हुआ, और क्यों किसी ने मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया?
काठगोदाम स्टेशन पर मचा हड़कंप
29 जून की सुबह जब रानीखेत एक्सप्रेस अपनी अंतिम मंज़िल, काठगोदाम स्टेशन पर पहुंची, तो रोज़ की तरह ट्रेन की चेकिंग शुरू हुई. जनरल डिब्बे में एक सीट पर एक व्यक्ति बेसुध पड़ा मिला.
स्टेशन पर तुरंत हड़कंप मच गया. सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को इसकी सूचना दी गई.
जीआरपी के जवान तुरंत हरकत में आए और उन्हें आनन-फानन में हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया.
इलाज के दौरान ही सत्यपाल सिंह ने दम तोड़ दिया. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, और इसके साथ ही एक बहादुर सिपाही की ज़िंदगी का सफ़र हमेशा के लिए थम गया.
जेब में रखे आधार कार्ड से खुली पहचान
शुरुआत में, पुलिस ने शव को अज्ञात समझकर कार्रवाई में थोड़ी सुस्ती दिखाई. लेकिन मंगलवार को जब मृतक के सामान और जेब की तलाशी ली गई, तो उसमें रखे आधार कार्ड ने पूरी कहानी बदल दी.
आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों से पता चला कि ये शव कोई और नहीं, बल्कि BSF के हेड कॉन्स्टेबल सत्यपाल सिंह का है.
पहचान स्पष्ट होते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई तेज़ कर दी. जैसलमेर स्थित BSF हेडक्वार्टर को घटना की आधिकारिक सूचना दी गई.
पोस्टमॉर्टम के बाद शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया, जो इस दुखद खबर से टूट चुके थे. परिवार के लिए ये यकीन करना मुश्किल था कि जिस बेटे, जिस पति, जिस पिता का वे बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, वो अब सिर्फ़ एक बेजान शरीर बनकर लौटा है.
जहरखुरानी गैंग पर शक, हत्या का केस दर्ज
मेडिकल चौकी प्रभारी मनमोहन सिंह ने बताया कि सत्यपाल सिंह ने रविवार सुबह अपने बेटे को जोधपुर से फ़ोन कर बताया था कि वे ट्रेन से घर के लिए निकल रहे हैं. इसके बाद उनका फ़ोन बंद हो गया या शायद उनसे छीन लिया गया.
पुलिस को शक है कि सफ़र के दौरान ही कुछ जहरखुरानों ने उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश कर दिया होगा. इसके बाद उनका मोबाइल, पर्स, अन्य दस्तावेज़ और सारा कीमती सामान चोरी कर लिया गया.
बुधवार को GRP थाना काठगोदाम ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर लिया है. पुलिस अब ट्रेन के रूट्स पर पड़ने वाले सभी स्टेशनों के CCTV फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों का पता लगाया जा सके.
साथ ही, उन सहयात्रियों से भी पूछताछ की जा रही है, जो उस जनरल बोगी में सफ़र कर रहे थे.
ये घटना एक बार फिर चलती ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है. एक सिपाही, जो देश की सीमा पर हमें सुरक्षित रखता है, अपनी ही देश की ज़मीन पर, चलती ट्रेन में सुरक्षित नहीं रह पाया.
सत्यपाल सिंह का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और पुलिस तेज़ी से इस मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी है.

