अजमेर: राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल, नाम से ही लगता है कि यहां सुरक्षा इतनी पुख्ता होगी कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन जनाब, यहां तो एक ऐसा कांड हो गया जिसने जेल प्रशासन से लेकर पुलिस तक, सबको सकते में डाल दिया है। बात है कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की, जिसकी हत्या 29 जून को इसी हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर कर दी गई। ये खबर अपने आप में ही चौंकाने वाली थी, लेकिन अब जो खुलासे हो रहे हैं, वो और भी हैरान कर देने वाले हैं। पता चला है कि जगन के हत्यारे ने कत्ल को आत्महत्या का रंग देने की एक शातिराना कोशिश की थी, जो अब सवालों के घेरे में है।
पुलिस और जेल प्रशासन की जांच में जो बातें सामने आ रही हैं, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगतीं। जगन की हत्या करने का आरोप विष्णु जाट नाम के कैदी पर है।
वारदात को अंजाम देने के बाद विष्णु ने पूरी प्लानिंग के साथ इस हत्या को सुसाइड यानी आत्महत्या दिखाने की कोशिश की। लेकिन कहते हैं ना, गुनाह कितना भी बड़ा हो, कोई न कोई सबूत ज़रूर छोड़ जाता है।
यहां भी ऐसा ही कुछ हुआ, और अब ये परतें एक-एक कर खुल रही हैं।
हत्या को आत्महत्या बताने की कोशिश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जगन की हत्या के बाद बैरक में एक गमछा (तौलिया) पंखे से लटका हुआ मिला। मकसद साफ था—पुलिस और जांच एजेंसियों को ये यकीन दिलाना कि जगन ने खुदकुशी कर ली है।
लेकिन इस 'सुसाइड थ्योरी' में एक बहुत बड़ा झोल है। जेल प्रशासन खुद ही इस बात पर मुहर लगा रहा है कि बैरक में जो पंखा लगा है, वो ज़मीन से करीब 13 फीट ऊंचा है।
अब आप ही सोचिए, इतनी ऊंचाई पर कोई व्यक्ति खुद कैसे लटक सकता है? और अगर कोई दूसरा शख्स शव को उठाकर वहां लटकाने की कोशिश भी करे, तो ये तो और भी मुश्किल है। इससे साफ है कि हत्यारे ने इस पूरी वारदात को आत्महत्या का रूप देने के लिए एक नाकाम कोशिश की थी, जो अब उसकी पोल खोल रही है।
शुरुआती जांच में ये भी सामने आया है कि जगन और विष्णु के बीच पहले से कोई पुरानी रंजिश या कोई सोची-समझी प्लानिंग नहीं थी। बताया जा रहा है कि जगन ने विष्णु पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिससे विष्णु गुस्से में आ गया और उसने आवेश में आकर ये आत्मघाती कदम उठा लिया।
हालांकि, ये कितनी सच्चाई है, ये तो जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा।
सीसीटीवी पर टूथपेस्ट: सबूत मिटाने की साजिश?
हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दावा किया जाता है कि जेल में कुल 315 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें से 280 तो हर वक्त चालू रहते हैं।
लेकिन जगन की हत्या के मामले में एक बड़ा झोल सामने आया है। जिस ब्लॉक में जगन बंद था, वहां का मुख्य कैमरा तो ठीक था और उसकी फुटेज भी सुरक्षित मिली, लेकिन उसकी विशेष सेल (कोठरी) के अंदर जो कैमरा लगा था, उसके लेंस पर सफेद रंग का एक पदार्थ, जो टूथपेस्ट जैसा था, पोत दिया गया था।
साफ है कि अंदर की फुटेज को साफ न आने देने के लिए ये सब किया गया था, ताकि वारदात के समय क्या हुआ, ये रिकॉर्ड न हो सके। हालांकि, आरोपी की ये चाल पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई।
ब्लॉक के मुख्य कैमरे की फुटेज से ये साफ हो गया है कि जगन की सेल में वारदात के वक्त विष्णु जाट के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति अंदर नहीं गया था। इससे ये भी साफ होता है कि इस हत्या को अकेले विष्णु जाट ने ही अंजाम दिया है और किसी और की संलिप्तता फिलहाल तो सामने नहीं आई है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोले राज
जगन गुर्जर की मौत के बाद छह सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने उसका पोस्टमॉर्टम किया था। उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत के कुछ बेहद गंभीर कारण सामने आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जगन की मौत अत्यधिक दबाव के कारण हुई थी, और वारदात के मात्र 3 मिनट के भीतर ही उसकी सांसें थम गईं। उसकी गर्दन के बीच वाले हिस्से में भारी अंदरूनी रक्तस्राव (हेमरेज) पाया गया है।
इसके अलावा, सांस नली (ट्रेकिया) और भोजन नली (इसोफेगस) के आसपास भी गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जो बताते हैं कि जगन के साथ कितनी क्रूरता से बर्ताव किया गया था।
हालांकि, मौत के सटीक समय और परिस्थितियों की अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। यह रिपोर्ट FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
जांच के लिए जगन के नाखूनों के सैंपल भी सुरक्षित रखे गए हैं, जिससे उम्मीद है कि कुछ और अहम सुराग मिल सकते हैं।
भाई के अंतिम संस्कार में पप्पू गुर्जर
जगन गुर्जर की मौत के बाद, उसका भाई पप्पू गुर्जर भी जेल में बंद था। मंगलवार देर रात करीब 1 बजे, पप्पू को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अजमेर जेल से धौलपुर के लिए रवाना किया गया।
पप्पू को अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिली है। जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार आज (बुधवार) धौलपुर के डांग स्थित भवुतीपुरा गांव में होना है।
गांव में सुबह करीब साढ़े सात बजे जगन का शव पहुंचा। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गांव में 9 थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई है, जिससे पूरे इलाके में छावनी जैसा माहौल बन गया है।
इस घटना ने एक बार फिर जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के आपसी संघर्षों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

