नालंदा: शादी के घर में शहनाई बज रही थी, चारों तरफ खुशियों का माहौल था। कहीं मंगल गीत गूंज रहे थे तो कहीं मेहमानों की हंसी-ठिठोली। मंडप में बेटी फेरे ले रही थी, जीवन भर के साथी का हाथ थाम रही थी। लेकिन उसी घर के एक बेटे का शरीर, उसी वक्त, अस्पताल के मुर्दाघर में पड़ा था। क्या ये किस्मत का क्रूर खेल था? या नियति ने कोई और ही दर्दनाक कहानी लिख रखी थी? बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर कलेजा मुंह को आ जाता है। जहां एक पिता ने अपनी बेटी की डोली उठाने के लिए, अपने जवान बेटे की मौत का गम सीने में दबा लिया। बारातियों को नाश्ता खिलाने गया एक भाई, करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। इस मौत की खबर को पूरी शादी तक छिपाए रखा गया, ताकि बेटी की जिंदगी में कोई खलल न पड़े। जब तक बेटी की विदाई नहीं हो गई, तब तक परिवार ने अपने आंसू पी लिए। ये कहानी है नालंदा के राजकुमार पासवान के परिवार की, जिसने एक साथ खुशी और गम दोनों के चरम को देखा।
मामला जिले के थरथरी थाना इलाके का है, जहां के रहने वाले राजकुमार पासवान की बेटी की शादी 29 जून को तय थी। लेकिन शादी से ठीक 11 दिन पहले, यानी 18 जून को, परिवार पर एक छोटी सी आफत आई थी।
राजकुमार के भतीजे की मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद, परिवार ने सोचा कि घर का माहौल पहले से ही गमगीन है।
ऐसे में बेटी की शादी घर में करना ठीक नहीं होगा। तय किया गया कि शादी का कार्यक्रम ननिहाल में जाकर करेंगे, ताकि माहौल में थोड़ा बदलाव आए और खुशियां ठीक से मनाई जा सकें।
परिवार ने सोचा था कि जगह बदलने से शायद मन हल्का हो जाएगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि नियति ने उनके लिए एक और बड़ा इम्तिहान लिख रखा था।
शादी की खुशियों में मातम की आहट
29 जून का दिन था। पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ रही थी।
शादी का मंडप सजा था, मेहमानों से पूरा घर भरा हुआ था। बारात दरवाजे पर पहुंच चुकी थी और हर तरफ हंसी-खुशी का माहौल था।
बारातियों के स्वागत के लिए नाश्ते का इंतजाम चल रहा था। घर का जवान बेटा स्वागत कुमार, जिसकी उम्र सिर्फ 25 साल थी, वो भी इस काम में जुटा हुआ था।
स्वागत चेन्नई में रहकर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करता था। बहन की शादी की खुशियों में शरीक होने के लिए वो काफी उत्साह के साथ घर लौटा था।
वो अपने परिवार का होनहार बेटा था, छह बहन और चार भाइयों में बेहद मिलनसार। उसे क्या पता था कि ये उसकी आखिरी घर वापसी होगी, आखिरी खुशी का मौका होगा।
नाश्ते की ट्रे हाथों में लिए स्वागत कुमार खेत की तरफ बढ़ रहा था। वहां बारातियों के लिए नाश्ता परोसा जाना था।
सुबह का वक्त था, शायद थोड़ी जल्दबाजी भी रही होगी। लेकिन उस खेत में, एक 440 वोल्ट का बिजली का तार टूट कर गिरा हुआ था।
कहते हैं, जब बुरा वक्त आता है तो सारी चीजें एक साथ गलत होने लगती हैं। स्वागत को शायद इसका अंदाजा भी नहीं था।
वो सीधा उस गिरे हुए तार की चपेट में आ गया। तेज झटके के साथ वो वहीं खेत में गिर पड़ा।
उसकी चीख शायद किसी ने नहीं सुनी या फिर शादी के शोर में दब गई।
खेत में बिछा मौत का जाल
स्वागत को नाश्ता लेकर जाते कुछ और लोग भी पीछे थे। उन्होंने जब स्वागत को खेत में बेजान पड़ा देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
पल भर में शादी की खुशियों भरा माहौल एक चीख-पुकार में बदल गया। हड़कंप मच गया।
बारातियों को क्या पता था कि जिस स्वागत के लिए नाश्ता आ रहा है, वो खुद मौत की नींद सो चुका है। आनन-फानन में परिवार के लोग और गांव वाले स्वागत को लेकर नूरसराय के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को भांपते हुए उसे तुरंत बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल रेफर कर दिया। यह सिर्फ एक रेफरल नहीं था, यह उम्मीद और डर के बीच झूलता एक संघर्ष था।
एक तरफ गांव में शादी की रस्में आगे बढ़ रही थीं, मंडप में फेरे हो रहे थे। दूसरी तरफ, कुछ गांव के लोग स्वागत को लेकर बिहार शरीफ अस्पताल पहुंचे थे।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने स्वागत की जांच की और जो खबर परिवार को मिली, वो किसी वज्रपात से कम नहीं थी। डॉक्टरों ने स्वागत को मृत घोषित कर दिया।
स्वागत अब नहीं था। जो बेटा कुछ देर पहले तक बहन की शादी की खुशियों में डूबा था, अब वो सिर्फ एक बेजान शरीर था।
पिता का कलेजा चीर देने वाला फैसला
अस्पताल में स्वागत के परिवार के सदस्य रो रहे थे, उनका दिल टूट चुका था। लेकिन उन्हें पता था कि गांव में शादी अभी चल रही है।
बेटी की विदाई अभी बाकी थी। ऐसे में इस खबर को शादी में फैलाना ठीक नहीं होगा।
परिवार ने एक बेहद मुश्किल और दर्दनाक फैसला लिया। उन्होंने स्वागत की मौत की खबर को बारात और रिश्तेदारों से छिपाए रखने का फैसला किया।
ताकि शादी में कोई दिक्कत न आए, बेटी की जिंदगी में कोई अशुभ न हो। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा बलिदान था।
मृतक के पिता राजकुमार पासवान ने बाद में बताया, "एक तरफ घर में बेटी की शादी की रस्में चल रही थी, दूसरी तरफ बेटे का शव अस्पताल में था। बेटी के भविष्य का सवाल था।
किसी तरह कलेजे पर पत्थर रखकर हमने रस्में पूरी कराईं और बेटी को विदा कराया।" ये शब्द सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए।
जिस पिता के बेटे की मौत हो गई हो, उसे अपनी बेटी की खुशियों के लिए अपने आंसू छिपाने पड़े। विदाई तक, चेहरे पर झूठी मुस्कान रखनी पड़ी।
विदाई के बाद पल भर में बदल गया माहौल
जब बेटी की विदाई हो गई, डोली उठ गई और वो अपने ससुराल चली गई, तब परिवार ने खुलकर रोने की इजाजत दी खुद को। घर में जो खुशियों की रौनक एक पल पहले तक बिखरी थी, वो अचानक चीखों और सन्नाटे में बदल गई।
ढोल-नगाड़ों की जगह अब सिर्फ कराहने की आवाजें थीं। पूरे गांव पर मातम छा गया।
परिवार ने जो दर्द कुछ घंटों तक अपने सीने में दबाकर रखा था, वो अब बांध तोड़कर बाहर आ चुका था। स्वागत की लाश को उसके घरवालों को सौंप दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई
इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही नूरसराय थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए शव को कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। परिजनों की ओर से लिखित आवेदन मिलने पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवार इस वक्त गहरे सदमे में है और पुलिस उनके आवेदन का इंतजार कर रही है ताकि इस पूरे मामले की ठीक से जांच हो सके और न्याय मिल सके।

