नालंदा: बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने रूह कंपा दी है। एक मां अपने बेटे के साथ रोज की तरह मजदूरी करने जा रही थी, पेट पालने की जुगत में थी, लेकिन किसे पता था कि सड़क पर बिछा काल उसका इंतजार कर रहा है। रहुई थाना क्षेत्र में रविवार की सुबह 60 साल की एक बुजुर्ग महिला सड़क पार करते समय तेज रफ्तार बाइक की चपेट में आ गई और दर्दनाक तरीके से जान गंवा बैठी। यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार के लिए उस उम्मीद का टूटना है, जो हर दिन दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता है।
मरने वाली महिला की पहचान सलमाबाद गांव की शरीफा देवी के तौर पर हुई है, जो देवी बिंद की पत्नी थीं। उम्र के उस पड़ाव पर भी शरीफा देवी हार मानने वालों में से नहीं थीं।
सुबह-सुबह, जब दुनिया अपनी नींद से जाग रही होती है, शरीफा देवी अपने बेटे और गांव के कुछ और लोगों के साथ मजदूरी के लिए निकल पड़ी थीं। उनके कदम रोज की तरह उस रास्ते पर बढ़ रहे थे, जहां जिंदगी और मौत के बीच का फासला कभी-कभी एक सड़क पार करने जितना छोटा हो जाता है।
उनके भतीजे अशोक कुमार ने पूरी कहानी बताई, जिसे सुनकर हर कोई सिहर उठा।
अशोक कुमार ने बताया कि चाची शरीफा देवी रविवार की सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच अपने बेटे और कुछ दूसरे मजदूरों के साथ काम पर जा रही थीं। सड़क पार करते वक्त अचानक एक तेज रफ्तार बाइक आई और उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भयानक थी कि शरीफा देवी वहीं गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं। मौके पर मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े।
हर किसी के चेहरे पर चिंता और अफरा-तफरी साफ दिख रही थी। आसपास के लोगों ने तुरंत शरीफा देवी को संभाला और उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे।
खून से लथपथ शरीफा देवी को देखकर परिवार के लोग सदमे में आ गए।
मजदूरी की राह में मौत का झंझावात
हादसे के तुरंत बाद, घायल शरीफा देवी को रहुई के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत उन्हें बिहार शरीफ सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
परिवार के लोगों की उम्मीद अभी भी बची हुई थी कि शायद बड़े अस्पताल में उनकी जान बच जाएगी। बिहार शरीफ सदर अस्पताल में भी उनका इलाज किया गया, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
डॉक्टर्स ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि मरीज की हालत बेहद नाजुक है। परिवार ने हार नहीं मानी।
उन्हें लगा कि शायद किसी निजी क्लीनिक में बेहतर इलाज मिल पाएगा, जहां डॉक्टर्स और मशीनें शरीफा देवी को मौत के मुंह से खींच लाएं।
इसी उम्मीद के साथ, परिवार शरीफा देवी को एक निजी क्लीनिक ले गया। यह एक ऐसी दौड़ थी, जहां समय हर पल भारी पड़ रहा था और हर गुजरता मिनट परिवार की उम्मीदों पर भारी पड़ रहा था।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रविवार शाम को, इलाज के दौरान शरीफा देवी ने अपनी अंतिम सांस ली।
एक मां, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए निकली थी, खुद ही काल का ग्रास बन गई। बेटे के सामने, उसी सड़क पर, जहां से वो हर दिन मजदूरी के लिए गुजरती थीं, उनकी जिंदगी का सफर थम गया।
परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी मौत की खबर सुनकर पूरे गांव में मातम छा गया।
पुलिस की कार्रवाई और अज्ञात हमलावर की तलाश
शरीफा देवी की मौत की खबर जैसे ही रहुई थाने तक पहुंची, थानाध्यक्ष ललित विजय फौरन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने सबसे पहले शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया।
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह और चोटों की गंभीरता का पता चल पाएगा। पुलिस ने मौके से दुर्घटनाग्रस्त बाइक को भी जब्त कर लिया है।
यह बाइक अब पुलिस के लिए जांच का मुख्य सुराग है। थानाध्यक्ष ने बताया कि बाइक के नंबर के आधार पर उसके मालिक और उस पर सवार व्यक्ति की पहचान की जा रही है।
यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके और शरीफा देवी के परिवार को न्याय मिल सके।
फिलहाल, पुलिस परिवार के सदस्यों से आवेदन मिलने का इंतजार कर रही है। एक बार आवेदन मिल जाने के बाद, पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
इसमें FIR दर्ज करना, जांच को और तेज करना और दोषियों को गिरफ्तार करना शामिल है। यह हादसा एक बार फिर सड़कों पर बढ़ती लापरवाही और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर करता है।
ग्रामीण इलाकों में, जहां लोग पैदल या साइकिल से चलते हैं, उनके लिए सड़कें कितनी खतरनाक हो सकती हैं, यह इस घटना से साफ झलकता है। शरीफा देवी की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के उस बड़े हिस्से की कहानी है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में अपनी जान जोखिम में डालकर काम पर जाता है, और अक्सर ऐसे ही हादसों का शिकार हो जाता है।
परिवार को अब बस न्याय की उम्मीद है, ताकि शरीफा देवी की आत्मा को शांति मिल सके और उनके गुनहगारों को उनके किए की सजा मिल सके।




































