नालंदा: बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको झकझोर दिया है। रविवार की रात एक घर में चिकन बन रहा था, खाने के बाद घर का मुखिया, निरंजन चौधरी, अपनी बीवी से कह कर निकला कि 'थोड़ी देर में आता हूं'। पत्नी प्रमिला देवी और बच्चे इंतजार करते रहे, रात बीत गई, सुबह हुई, लेकिन निरंजन नहीं लौटा। जब लौटा तो उसकी लाश मिली, वो भी अड्डा पुल के नीचे, ऐसी हालत में कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। शरीर पर चाकुओं के गहरे निशान, सिर मिट्टी के गड्ढे में धंसा हुआ था और पैर बाहर। ये देखकर कोई भी कह सकता था कि ये हादसा नहीं, सोची-समझी हत्या है। परिवार का कहना है कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, तो आखिर किसने और क्यों ली निरंजन की जान?
निरंजन चौधरी, 35 साल के थे और रानीपुर गांव के रहने वाले महेश चौधरी के बेटे थे। फिलहाल, वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कटहल टोला में किराए के मकान में रह रहे थे।
मेहनत-मजदूरी करके अपने घर का पेट पालते थे। रविवार की रात करीब 8 बजे वो घर में चिकन लेकर आए थे।
परिवार के साथ खाना-पीना हुआ और फिर वो यह कहकर घर से निकले कि बस थोड़ी देर में लौट आएंगे। पत्नी प्रमिला देवी ने बताया कि रात भर वो अपने पति का इंतजार करती रहीं, लेकिन वो नहीं आए।
इसके बाद परिवार ने उनकी खोजबीन शुरू की, लेकिन निरंजन का कहीं पता नहीं चला।
पत्नी का दर्दनाक बयान: रात भर तलाश, सुबह मिली लाश
सोमवार की सुबह जब अड्डा पुल के नीचे शव मिलने की खबर आई तो परिवार की सारी उम्मीदें टूट गईं। प्रमिला देवी ने रोते-बिलखते हुए बताया कि शव को देखकर साफ लग रहा था कि उनके पति की हत्या की गई है।
उनके शरीर पर चाकू के कई गहरे निशान थे, जो किसी दुर्घटना से कहीं ज्यादा गहरी कहानी बता रहे थे। उनका सिर मिट्टी के गड्ढे में धंसा हुआ था, जिससे साफ था कि किसी ने उन्हें मारकर वहां फेंका है।
उनके पैरों की स्थिति देखकर भी ऐसा लग रहा था कि उन्हें घसीटकर या उठाकर वहां तक लाया गया था। प्रमिला देवी बार-बार यही कह रही थीं कि उनके पति की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, कोई विवाद नहीं था, तो फिर उनकी इतनी बेरहमी से हत्या क्यों की गई?
स्थानीय निवासी मंजीत सिंह भी इस घटना से काफी स्तब्ध थे। उन्होंने बताया कि निरंजन चौधरी बहुत ही मेहनती इंसान थे और अपनी मजदूरी से परिवार का गुजारा करते थे।




































