सहरसा: बिहार के सहरसा जिले में बिजली को लेकर एक बड़ी बैठक हुई है। यूं समझिए कि, अब तक जो तार-खंभे की कमी, बार-बार गुल होती बिजली और शिकायतों के ढेर से लोग परेशान थे, उस पर सीधे सांसद साहब की निगरानी में मंथन किया गया है। उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) की जिला स्तरीय विद्युत समिति (DEC) ने सहरसा समाहरणालय के एनआईसी सभागार में गुरुवार शाम को एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक का मकसद सिर्फ कागज पर योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके लोगों को राहत देना था।
अध्यक्षता की बागडोर खुद सहरसा के सांसद दिनेशचंद्र यादव ने संभाली। उनके साथ जिले के आला अधिकारियों की फौज भी मौजूद थी।
मीटिंग में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे सहरसा की बिजली व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, जो प्रोजेक्ट सालों से अटके पड़े हैं उन्हें कैसे रफ्तार दी जाए, और सबसे बढ़कर, बिजली उपभोक्ताओं को कैसे बिना रुकावट और अच्छी क्वालिटी वाली बिजली मिल सके। आमतौर पर ऐसी बैठकों में कई बार सिर्फ खानापूर्ति होती दिखती है, लेकिन इस बार का एजेंडा साफ था: काम, काम और बस काम!
बिजली किसी भी शहर की रीढ़ होती है। चाहे किसान हो, दुकानदार हो या घर में टीवी देखने वाला आम आदमी, हर किसी को बिजली की जरूरत होती है।
यही वजह है कि जब भी बिजली को लेकर कोई बड़ा फैसला होता है, तो सबकी निगाहें उस पर टिक जाती हैं। इस बैठक में न सिर्फ मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया ताकि सहरसा बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सके।
जब सांसद ने संभाली कमान: अधिकारियों को सीधी बात
बैठक में मौजूद अधिकारियों की लिस्ट देखें तो समझ आता है कि यह कोई मामूली मीटिंग नहीं थी। सांसद दिनेशचंद्र यादव की अध्यक्षता में जिलाधिकारी दीपेश कुमार, जो इस समिति के संयोजक भी हैं, अपनी पूरी टीम के साथ मौजूद थे।
विद्युत अधीक्षण अभियंता संतोष कुमार, जो सदस्य सचिव भी हैं, ने पूरे जिले की बिजली व्यवस्था का ब्यौरा रखा। इसके अलावा, वरीय प्रबंधक (राजस्व) दीपक कुमार, विद्युत कार्यपालक अभियंता अमित कुमार और अजीत कुमार जैसे बड़े अधिकारी भी उपस्थित थे।
सहायक अभियंता सुशील आनंद, सुशील सुधांशु, विजेंद्र कुमार और आईटी मैनेजर के साथ-साथ कई कनीय अभियंता भी मीटिंग का हिस्सा बने। कुल मिलाकर, बिजली विभाग से जुड़े हर छोटे-बड़े चेहरे ने इस बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
सांसद दिनेशचंद्र यादव ने आते ही अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि केंद्र सरकार की जो बिजली योजनाएं चल रही हैं, उनकी क्या स्थिति है? वरीय प्रबंधक (राजस्व) दीपक कुमार ने एक-एक कर सभी केंद्र प्रायोजित विद्युत योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट सुनने के बाद सांसद ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बिजली के बुनियादी ढांचे के जो भी काम चल रहे हैं, उनकी लगातार निगरानी की जाए। कहीं भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर भी जोर दिया गया ताकि किसी भी प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी न हो।
अधूरी योजनाओं पर लगाम: क्वालिटी और समय सीमा पर जोर
बैठक में अधिकारियों ने जिले में चल रही अलग-अलग बिजली परियोजनाओं की बारीकी से समीक्षा की। इसमें सिर्फ उनकी प्रगति नहीं देखी गई, बल्कि काम की गुणवत्ता और समय सीमा के भीतर उन्हें पूरा करने की स्थिति पर भी सवाल-जवाब हुए।
अक्सर देखा जाता है कि योजनाओं में देरी होती है या काम की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने इन सभी पहलुओं पर जोर दिया।
सांसद ने स्पष्ट किया कि किसी भी कीमत पर इन प्रोजेक्ट्स को समय पर और सही तरीके से पूरा करना होगा ताकि सहरसा के लोगों को इसका फायदा मिल सके।
बिजली के नेटवर्क को फैलाना, उसका संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) – ये सब भी बैठक के मुख्य मुद्दे थे। समिति ने इस बात पर भी विचार किया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए विद्युत संरचनाओं का निर्माण कैसे किया जाए।
बिजली की खपत बढ़ रही है, शहरीकरण हो रहा है, ऐसे में मौजूदा ढांचे को अपग्रेड करना और नए ढांचे बनाना बेहद जरूरी हो जाता है। इन सभी बातों पर एक विस्तृत रोडमैप बनाने की बात कही गई ताकि सहरसा में बिजली की कोई दिक्कत न रहे।
जनता को निर्बाध बिजली: शिकायतों का तुरंत समाधान
बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर रहा कि उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के हिसाब से बिना रुकावट और अच्छी क्वालिटी वाली बिजली मिले। अक्सर गांव-देहात में वोल्टेज की समस्या या बार-बार बिजली कटने की शिकायतें आती हैं।
इन सब पर लगाम लगाने के लिए सख्त निर्देश दिए गए। अध्यक्ष और सभी उपस्थित अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि लोगों को बिजली की सुविधा मिलना उनका हक है और विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा।
सिर्फ बिजली पहुंचाना ही काफी नहीं है, बल्कि अगर कोई शिकायत आती है, तो उसका तुरंत और संतोषजनक समाधान होना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिए गए।
चाहे खराब ट्रांसफार्मर की शिकायत हो, बिल में गड़बड़ी की या फिर किसी और तरह की समस्या, हर शिकायत को गंभीरता से लेकर जल्द से जल्द निपटाने को कहा गया। यह एक ऐसा कदम है जिससे सीधे जनता को राहत मिलेगी और विभाग पर उनका भरोसा बढ़ेगा।
बैठक के आखिर में सभी संबंधित अधिकारियों को एक अंतिम निर्देश दिया गया: सभी स्वीकृत योजनाओं का काम समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ खत्म किया जाए। इसका सीधा मकसद सहरसा के हर नागरिक को अच्छी और सुचारू बिजली सेवा का लाभ देना है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है और सहरसा की बिजली व्यवस्था में कितना सुधार आता है।

