मुंगेर: बिहार के मुंगेर से एक ऐसी खबर आई है, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है. मुंगेर की जेल में बंद एक नौजवान कैदी ने शुक्रवार की सुबह जेल की छत से कूदकर अपनी जान दे दी. महज 21 साल का ये लड़का जेल की सलाखों के पीछे 43 दिन ही रहा था, लेकिन अंदर कुछ ऐसा घटा या उसके मन में कुछ ऐसा चला कि उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. अब सवाल ये है कि आखिर क्यों इस लड़के ने ऐसा खौफनाक कदम उठाया? कहानी जितनी सीधी दिख रही है, उससे कहीं ज्यादा उलझी हुई है. इस लड़के का नाम था मनीष कुमार, और उसे जेल भेजा गया था अपने ही सगे भाई की हत्या के आरोप में. जी हां, अपने ही भाई को हथौड़े से पीट-पीटकर मारने का आरोप था उस पर.
ये घटना शुक्रवार सुबह मुंगेर मंडल कारा में हुई. मनीष कुमार, जो कि हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र के मधुवन दरियापुर गांव का रहने वाला था, उसने अचानक जेल की छत से छलांग लगा दी.
उसे गंभीर चोटें आईं और आनन-फानन में उसे मुंगेर सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जेल अधीक्षक किरण निधि ने इस मामले की पुष्टि की है.
अब जेल प्रशासन से लेकर पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी, सब इस मामले की जांच में जुट गए हैं कि आखिर मनीष ने ये कदम क्यों उठाया. एसपी सैयद इमरान मसूद और सदर डीएसपी सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है.
मनीष के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और उसके घर वालों को भी खबर दे दी गई है.
भाई की हथौड़े से हत्या का आरोप
मनीष को जेल क्यों भेजा गया था, ये कहानी कुछ ही महीने पुरानी है. बीते 18 मई की रात थी, जब मनीष पर आरोप लगा कि उसने अपने छोटे भाई नीतीश कुमार की बेरहमी से हत्या कर दी.
दोनों भाई गांव में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ में होटल का धंधा कर रहे थे. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन उस रात क्या हुआ, ये आज भी एक पहेली है.
18 मई की रात करीब 12 बजे दोनों भाई अपनी दुकान बंद करके गांव स्थित दूसरे घर में सोने चले गए. अगली सुबह, यानी 19 मई को, घर वालों ने नीतीश को खून से लथपथ पाया.
उसके सिर पर किसी भारी चीज, शायद हथौड़े से वार किए गए थे. ये मंजर देखकर घर वालों के होश उड़ गए.
घायल नीतीश को तुरंत अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया. उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वहां से उसे मुंगेर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया.
लेकिन अफसोस, अस्पताल पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने नीतीश को मृत घोषित कर दिया.
इस घटना से पूरा गांव हिल गया था. परिजन सदमे में थे और उनका आरोप था कि उनके दूसरे बेटे मनीष का अपहरण कर लिया गया है.
उन्होंने गांव के ही एक परिवार पर हत्या और अपहरण का आरोप लगाया, जिसके पीछे एक प्रेम विवाह का मामला बताया गया. उनके भाई रोशन कुमार ने पुलिस को एक आवेदन दिया था, जिसमें गांव के अविनाश कुमार उर्फ दौलत पासवान, यशवंत कुमार, शैलेश पासवान, राजेश पासवान, आकाश कुमार, पवन कुमार, रामकुमार पासवान की पत्नी, हरिओम पासवान, दिलीप वर्मा जैसे कई लोगों पर घर में घुसकर मारपीट और हत्या करने का आरोप लगाया गया था.
ये आरोप इसलिए लगे थे क्योंकि उनके एक और छोटे भाई रविनंदन कुमार ने गांव की ही चंदा कुमारी से प्रेम विवाह किया था और लड़की वाले इस बात से नाराज थे.
सीसीटीवी फुटेज और कबूलनामा
पुलिस को जैसे ही ये जानकारी मिली, हड़कंप मच गया. हवेली खड़गपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी.
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. शुरुआत में परिजन हत्या और अपहरण के अलग-अलग दावे कर रहे थे, लेकिन पुलिस की जांच में कुछ और ही सामने आया.
पुलिस ने मनीष कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. लंबी पूछताछ के बाद जो खुलासा हुआ, उसने सबको चौंका दिया.
मनीष ने आखिरकार ये कबूल कर लिया कि उसी ने अपने भाई नीतीश की हत्या की है. इस कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और 20 मई को उसे जेल भेज दिया गया.
यानी, हत्या के आरोप में जेल जाने के ठीक 43वें दिन मनीष ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. उसने ऐसा क्यों किया, क्या उसे अपने किए पर पछतावा था, या जेल के भीतर कोई और वजह थी, ये सब जांच का विषय है.
पुलिस के लिए ये एक गंभीर चुनौती है कि वे जेल के भीतर हुई इस आत्महत्या के पीछे की पूरी सच्चाई का पता लगाएं.
जेल प्रशासन और पुलिस अब कई सवालों के जवाब तलाश रही है. क्या जेल में मनीष की सुरक्षा में कोई चूक हुई? क्या उसने जेल के अंदर रहते हुए किसी से अपनी परेशानी साझा की थी? इन सभी पहलुओं पर गहनता से जांच चल रही है.
ये घटना न केवल मनीष के परिवार के लिए दोहरा सदमा है, बल्कि जेल प्रशासन पर भी कई सवाल खड़े करती है. देखना होगा कि इस मामले की जांच में और क्या-क्या बातें सामने आती हैं और आखिर क्या वजह रही होगी कि एक भाई ने अपने ही भाई को मार डाला और फिर खुद अपनी जान भी ले ली.

