गयाजी: कॉलेज, विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान… ये वो जगहें हैं जहाँ गुरु और शिष्य मिलकर ज्ञान का दिया जलाते हैं। लेकिन जब इन्हीं 'ज्ञान के मंदिरों' में गुरुओं के बीच ही ऐसी वारदात हो जाए कि एक प्रोफेसर को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़े, तो सोचिए हालात कितने बिगड़ गए होंगे। बिहार के गयाजी से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला प्रोफेसर ने अपने ही सहकर्मी पर जानलेवा हमला करने और सालों से प्रताड़ित करने का संगीन आरोप लगाया है। यह पूरा मामला अब पुलिस की चौखट तक पहुँच गया है, जहाँ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मामला गयाजी कॉलेज के संस्कृत विभाग से जुड़ा है। यहाँ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.
संगीता आर्या ने अपने विभाग के ही सहायक प्राध्यापक शिवजी पांडेय पर गंभीर इल्जाम लगाए हैं। संगीता आर्या का आरोप है कि शिवजी पांडेय ने उन पर न सिर्फ जानलेवा हमला किया, बल्कि उन्हें लगातार प्रताड़ित भी करते आ रहे हैं।
इस मामले में रामपुर पुलिस ने कांड संख्या 391/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सब इंस्पेक्टर सुसा कुजूर इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हुई हैं।
विभागाध्यक्ष की कुर्सी और बिगड़ते रिश्ते
डॉ. संगीता आर्या पिछले सात सालों से गयाजी कॉलेज के संस्कृत विभाग में अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
उनकी शिकायत के मुताबिक, कहानी में ट्विस्ट तब आया जब दिसंबर 2025 में शिवजी पांडेय की नियुक्ति इसी विभाग में हुई। हैरान करने वाली बात ये है कि अपनी नियुक्ति के महज 15 दिनों के भीतर ही शिवजी पांडेय को विभाग का विभागाध्यक्ष बना दिया गया।
आरोप है कि विभागाध्यक्ष बनने के बाद से ही शिवजी पांडेय का व्यवहार डॉ. संगीता आर्या के प्रति अभद्र और अपमानजनक हो गया था।
यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था, लेकिन 1 जुलाई 2026 की सुबह जो हुआ, उसने सारे हदें पार कर दीं।
हाजिरी रोकने से लेकर जानलेवा हमले तक
1 जुलाई 2026 की उस मनहूस सुबह, जब डॉ. संगीता आर्या कॉलेज पहुँचीं, तो शिवजी पांडेय ने उन्हें रोक दिया।
आरोप है कि पांडेय ने न सिर्फ उन्हें गंदी गालियाँ दीं, बल्कि 'तेरी औकात क्या है' जैसे अपमानजनक शब्द कहकर उनकी हाजिरी बनाने से भी मना कर दिया। यह सिर्फ मौखिक दुर्व्यवहार नहीं था।
जब महिला प्रोफेसर ने इस दुर्व्यवहार को कैमरे में कैद करने की कोशिश की, ताकि उनके पास सबूत हो, तो शिवजी पांडेय आग बबूला हो गए। उन्होंने तैश में आकर डॉ.
संगीता आर्या पर डस्टर फेंककर मारा। यह तो बस शुरुआत थी।
पीड़िता का आरोप है कि डस्टर फेंकने के बाद शिवजी पांडेय ने पास में रखी एक लोहे की रॉड उठा ली और उन्हें जान से मारने की नीयत से उनकी तरफ दौड़ पड़े। यह देखकर डॉ.
संगीता आर्या की रूह काँप गई। अगर उस वक्त विभाग का प्यून अशोक कुमार बीच-बचाव करने न आता, तो शायद स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
अशोक कुमार ने किसी तरह उन्हें शिवजी पांडेय के चंगुल से बचाया, जिससे उनकी जान बच पाई।
कमरे में छिपकर बचाई जान, फिर ताला जड़ दिया
अपनी जान को खतरा देखते हुए डॉ. संगीता आर्या ने फौरन बगल के एक कमरे में घुसकर अंदर से कुंडी लगा ली।
उन्हें लगा कि अब वे सुरक्षित हैं, लेकिन शिवजी पांडेय का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। आरोप है कि शिवजी पांडेय ने उस कमरे के दरवाजे पर लातें मारकर उसे तोड़ने की कोशिश की।
जब वह दरवाजा नहीं तोड़ पाए, तो उन्होंने एक और बेहद ही खतरनाक कदम उठाया। उन्होंने बाहर से उस कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और उस पर ताला जड़ दिया, जिससे डॉ.
संगीता आर्या कमरे में कैद हो गईं। यह एक ऐसी स्थिति थी, जहाँ एक प्रोफेसर को अपने ही कॉलेज में जान बचाने के लिए एक कमरे में कैद होना पड़ा।
बाद में, कॉलेज के अन्य कर्मचारियों को जब इस घटना की जानकारी मिली, तो वे फौरन मौके पर पहुँचे। कर्मचारियों ने बड़ी मशक्कत से कमरे का ताला खोला और डॉ.
संगीता आर्या को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना ने पूरे कॉलेज परिसर में हड़कंप मचा दिया था।
शिकायतें पहले भी हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं
डॉ. संगीता आर्या के अनुसार, यह पहली बार नहीं था जब शिवजी पांडेय ने उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया हो।
उन्होंने पुलिस को बताया है कि आरोपी पहले भी उनके साथ मारपीट कर चुके हैं और यहाँ तक कि दुपट्टा खींचने जैसी घिनौनी हरकतें भी कर चुके हैं। ये शिकायतें उन्होंने कई बार कॉलेज के प्राचार्य सतीश चंद्र से की थीं।
लेकिन, दुख की बात ये है कि उनकी किसी भी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उलटा, जब भी उन्होंने शिकायत की, तो उन्हें धमकाया गया कि उनका तबादला करवा दिया जाएगा।
इस तरह की धमकियों ने उन्हें और भी कमजोर महसूस कराया, लेकिन इस बार उन्होंने आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
पुलिस के पास वीडियो सबूत, सुरक्षा की गुहार
इस पूरे मामले में डॉ. संगीता आर्या ने एक मजबूत सबूत भी पुलिस को सौंपा है।
उन्होंने घटना का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें शिवजी पांडेय की करतूतें साफ नजर आ रही हैं। इस वीडियो को रामपुर थाना पुलिस को सौंप दिया गया है।
वीडियो में मौके पर मौजूद अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि घटना सार्वजनिक तौर पर हुई थी। पुलिस ने इस वीडियो को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
डॉ. संगीता आर्या ने अब पुलिस से अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है, क्योंकि उन्हें अपने सहकर्मी से लगातार खतरा महसूस हो रहा है।
पुलिस का कहना है कि वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब सिर्फ एक कॉलेज विवाद नहीं, बल्कि एक महिला की सुरक्षा और न्याय से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है।

