मुंबई: बॉलीवुड के ‘भाईजान’ सलमान खान के घर पर हुए हमले की कहानी तो सब जानते हैं। गोलियां चली थीं, दहशत फैली थी। लेकिन अब इस मामले में एक नया ट्विस्ट आ गया है। लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई अनमोल बिश्नोई, जिस पर सलमान के घर के बाहर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का आरोप है, उसने मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने की अर्जी दाखिल कर दी है। अनमोल ने कहा है कि वो निष्पक्ष ट्रायल चाहता है और खुद ही कानूनी प्रक्रिया में शामिल होना चाहता है। लेकिन यहां एक पेंच है—अनमोल पहले से ही दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है!
आप सोच रहे होंगे कि जो शख्स पहले से जेल में है, वो भला कैसे सरेंडर करेगा? कहानी यहीं से दिलचस्प हो जाती है। अनमोल बिश्नोई को पिछले साल नवंबर में अमेरिका से डिपोर्ट करके भारत लाया गया था।
इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। NIA ने उसे टेरर-गैंगस्टर साजिश के एक अलग मामले में पकड़ा था और तभी से वो तिहाड़ जेल में है।
लेकिन सलमान के बांद्रा वाले घर के बाहर जो फायरिंग हुई थी, उस मामले में मुंबई पुलिस उसे अब तक सिर्फ 'वॉन्टेड' मान रही थी। यानी, मुंबई पुलिस के केस में उसकी अभी तक औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
अनमोल की अर्जी और प्रोडक्शन वारंट का खेल
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, अनमोल ने स्पेशल MCOCA कोर्ट में अपनी अर्जी दाखिल की है। उसने साफ-साफ कहा है कि चूंकि वो पहले से ही एक दूसरे कानूनी मामले में कस्टडी में है, इसलिए कोर्ट के आदेश के बिना वो खुद चलकर मुंबई कोर्ट में पेश नहीं हो सकता।
उसने अदालत से गुहार लगाई है कि तिहाड़ जेल के लिए एक प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाए। इस वारंट के जरिए उसे मुंबई कोर्ट में पेश किया जाएगा और फिर सलमान खान फायरिंग केस में उसकी रिमांड की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
अनमोल ने अपनी अर्जी में ये भी तर्क दिया है कि उसके कोर्ट में पेश होने से अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) को कोई नुकसान नहीं होगा। बल्कि इससे तो इस मामले का ट्रायल और कानूनी प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ेगी, जिससे कानूनी दांव-पेंच का गलत इस्तेमाल रुकेगा।
उसने ये भी बताया कि इस मामले में ट्रायल तो शुरू भी हो चुका है और उसकी गैर-मौजूदगी में ही तीन गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। यानी, वो अब खुद आकर इस केस का सामना करना चाहता है।
जेल में होने के बावजूद सरेंडर क्यों?
ये सवाल कई लोगों के मन में आ सकता है कि जब अनमोल पहले से ही दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है, तो फिर वो मुंबई में 'सरेंडर' क्यों कर रहा है? असल बात ये है कि अनमोल को NIA ने एक टेरर-गैंगस्टर साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था। सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग का मामला मुंबई पुलिस का है, जो एक अलग केस है।
इस मुंबई वाले केस में अनमोल अभी तक केवल 'वॉन्टेड' की लिस्ट में था। जब तक कोई आरोपी किसी खास मामले में कोर्ट के सामने खुद को पेश नहीं करता, तब तक उस केस में उसकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज नहीं होती।
अनमोल इसी औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया को पूरा करना चाहता है, ताकि उस पर इस मामले का मुकदमा सही तरीके से चल सके।
क्या होता है प्रोडक्शन वारंट?
चूंकि अनमोल बिश्नोई तिहाड़ जेल में बंद है, वो खुद से चलकर दिल्ली से मुंबई कोर्ट में हाजिर नहीं हो सकता। ऐसे में कोर्ट को 'प्रोडक्शन वारंट' जारी करना पड़ता है।
ये एक तरह का न्यायिक आदेश होता है, जो एक जेल से दूसरी जेल या कोर्ट को भेजा जाता है। इस वारंट का सीधा-सा मतलब होता है, 'इस कैदी को इस तय तारीख पर हमारे सामने पेश किया जाए।
' इसी वारंट के आधार पर अनमोल को तिहाड़ से मुंबई लाया जाएगा।
सलमान के घर हुई फायरिंग की पूरी कहानी
आपको याद ही होगा, 14 अप्रैल 2024 की सुबह का वो मंजर। मुंबई के बांद्रा इलाके में सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर सुबह-सुबह बाइक पर आए दो हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी।
बाद में जांच से इनकी पहचान विक्की गुप्ता और सागर पाल के तौर पर हुई। ये दोनों वही लोग थे, जिन्होंने गोली चलाई थी।
- इस मामले में अब तक विक्की गुप्ता, सागर पाल, सोनू कुमार बिश्नोई, मोहम्मद रफीक चौधरी और हरपाल सिंह न्यायिक हिरासत में हैं।
- एक और आरोपी, अनुजकुमार थापन, ने पुलिस कस्टडी में ही आत्महत्या कर ली थी, जिससे केस में और भी मोड़ आ गया था।
- लॉरेंस बिश्नोई खुद भी इस केस में वॉन्टेड है और कहा जा रहा है कि उसी के इशारे पर ये हमला हुआ था।
इस फायरिंग के बाद सलमान खान की सुरक्षा और भी बढ़ा दी गई है। उनके अपार्टमेंट की बालकनी को बुलेटप्रूफ तक करवा दिया गया है।
साल 2023 में लॉरेंस गैंग से लगातार धमकियां मिलने के बाद ही महाराष्ट्र सरकार ने सलमान को Y+ कैटेगरी की सुरक्षा दी हुई है। इस सुरक्षा के तहत 24 घंटे उनकी हिफाजत के लिए 11 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं।
अब देखना ये है कि अनमोल बिश्नोई की सरेंडर अर्जी पर कोर्ट क्या फैसला लेता है और ये मामला आगे कौन सी दिशा लेता है।

