गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं लगती। सोचिए, एक शख्स जो अपने ही कलेजे के टुकड़े, अपने 8 साल के मासूम बेटे का गला रेतकर हत्या कर दे... और फिर, जब उसे जमानत मिले तो बाहर आकर एक और युवक का चाकू से पेट फाड़ दे। जी हां, ये कोई मनगढ़ंत किस्सा नहीं, बल्कि गोपालगंज के विशुनपुरा गांव का वो खौफनाक सच है, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया था। अब इस सनकी और खूंखार हत्यारे जयश्री चौहान को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिसके बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है।
मामला कुचायकोट थाना क्षेत्र के विशुनपुरा गांव से जुड़ा है, जहां जयश्री चौहान नाम का एक शख्स अपनी दरिंदगी और क्रूरता के लिए कुख्यात हो चुका था। उसके गुनाहों का सिलसिला एक नहीं, बल्कि दो जिंदगियों को लील गया था।
पहला शिकार उसका अपना मासूम बेटा बना और दूसरा एक युवा, जिसने सिर्फ इंसानियत का फर्ज निभाने की कोशिश की थी। कोर्ट के इस फैसले ने न्याय की उम्मीद जगाई है और यह साफ कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, उसका हिसाब जरूर होता है।
गोपालगंज व्यवहार न्यायालय की एडीजे दस की कोर्ट ने इस बहुचर्चित डबल मर्डर केस में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी जयश्री चौहान को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई।
इसके साथ ही, उस पर 20 हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी यह अर्थदंड जमा नहीं कर पाता है, तो उसे छह महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।
यह फैसला न सिर्फ न्याय व्यवस्था पर लोगों के विश्वास को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून की पकड़ से कोई बच नहीं सकता।
बेटे की हत्या और खौफनाक अतीत
इस पूरी कहानी की जड़ें करीब साढ़े चार साल पहले बिछी थीं, जब जयश्री चौहान ने एक ऐसा काम किया था, जिसके बारे में सुनकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसने अपने ही 8 साल के मासूम बेटे का गला रेतकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी।
यह वारदात इतनी भयानक थी कि पूरे इलाके में जयश्री चौहान का खौफ फैल गया था। लोग उसे एक खूंखार और सनकी मिजाज अपराधी के रूप में जानने लगे थे।
अपने सगे बेटे की जान लेने के बाद उसका डर और बढ़ गया था, जैसे वह एक जीती-जागती दरिंदगी का प्रतीक बन गया हो।
पुलिस ने इस जघन्य वारदात के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लगभग डेढ़ साल जेल में रहने के बाद, जयश्री चौहान को जमानत मिल गई और वह वापस घर आ गया।
उसकी वापसी ने उसके अपने परिवार पर कहर बरपा दिया। बेटे की हत्या के बाद उसकी पत्नी और बेटी इस कदर दहशत में थीं कि उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए अपना घर तक छोड़ दिया था।
वे आरोपी के डर से छिपकर किसी दूसरी जगह रहने को मजबूर थीं, ताकि कहीं वे उसकी अगली सनक का शिकार न बन जाएं। उनका यह डर बेवजह नहीं था, क्योंकि जयश्री चौहान की क्रूरता की कोई सीमा नहीं थी।
जमानत पर आया और फिर बरपाया कहर
जमानत पर छूटने के बाद जयश्री चौहान अपनी पत्नी और बेटी को खोजने लगा। इसी तलाश में वह अपने पड़ोस में रहने वाली राजकुमारी देवी के घर पहुंच गया।
उसने राजकुमारी देवी पर अपनी पत्नी और बेटी को छिपाकर रखने का आरोप लगाते हुए गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया। राजकुमारी देवी का बेटा सतेंद्र कुमार यह सब सुन रहा था।
मां को गाली-गलौज करते देखकर उसने विरोध किया। उसने शायद सोचा होगा कि जयश्री चौहान को समझाना-बुझाना ठीक रहेगा, लेकिन उसे क्या पता था कि वह अपनी जान खतरे में डाल रहा है।
सतेंद्र कुमार का विरोध करना जयश्री चौहान को नागवार गुजरा। सनक और गुस्से में आगबबूला होकर उसने बिना कुछ सोचे-समझे चाकू से सतेंद्र कुमार के पेट पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
हमला इतना भीषण था कि चाकू पेट फाड़ता हुआ निकल गया। आनन-फानन में परिजनों ने गंभीर रूप से घायल सतेंद्र कुमार को इलाज के लिए पटना ले गए।
लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने सतेंद्र कुमार को मृत घोषित कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर पूरे विशुनपुरा गांव को स्तब्ध कर दिया और लोगों के मन में जयश्री चौहान का खौफ और गहरा हो गया।
अदालत का फैसला: न्याय की लंबी लड़ाई का अंत
सतेंद्र कुमार की हत्या के बाद 5 नवंबर 2020 को उनकी मां राजकुमारी देवी ने कुचायकोट थाने में जयश्री चौहान के खिलाफ लिखित आवेदन देकर FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और आरोपी जयश्री चौहान को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सिविल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने अभियोजन पक्ष के माध्यम से पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए। गवाहों और सबूतों को मजबूत तरीके से पेश किया गया, ताकि आरोपी को उसके गुनाहों की सजा मिल सके।
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं, लेकिन अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं ने मजबूती से केस लड़ा। पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों के गहन अवलोकन के बाद, अदालत ने अभियुक्त जयश्री चौहान को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा और 20 हजार रुपए का अर्थदंड देकर यह सुनिश्चित किया कि न्याय हुआ है। इस फैसले के बाद, मृत सतेंद्र कुमार के परिजनों और स्थानीय लोगों ने आखिरकार राहत की सांस ली है।
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी जीत है, जिन्होंने जयश्री चौहान के खौफ को करीब से महसूस किया था और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे। यह मामला दर्शाता है कि कानून की लंबी प्रक्रिया के बाद भी, सत्य और न्याय की जीत होती है।

