गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ खेत की एक छोटी सी मेड़ ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। हुआ यूं कि एक किसान ने अपने खेत में धान की रोपाई के लिए बिचड़ा (पौधा) तैयार किया था, लेकिन तभी उनके कुछ 'पटीदारों' (रिश्तेदार या पड़ोसी, जिनके साथ जमीन का साझा होता है) ने मेड़ काटकर जमीन हड़पने की कोशिश की। बस, यहीं से विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते लाठी-डंडे चल पड़े, बात इतनी बिगड़ी कि धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया। इस हमले में बाप-बेटे समेत तीन लोग लहूलुहान हो गए। घायलों को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
ये पूरा मामला गोपालपुर थाना क्षेत्र के सांगवा डीह देउरवा गांव का है। कहते हैं कि जमीन का विवाद अक्सर खून खराबे तक पहुंच जाता है और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ।
गांव के प्रेमसागर राम अपने खेत में धान की खेती की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बड़े जतन से बिचड़ा तैयार किया था, जिसे खेत में रोपना था।
लेकिन उनकी मेहनत पर पानी फेरने की कोशिश की गई। उनके 'पटीदारों' पर आरोप है कि उन्होंने गुपचुप तरीके से खेत की मेड़ काट दी और प्रेमसागर के हिस्से की जमीन पर कब्जा कर धान की रोपनी शुरू कर दी।
खेत की मेड़ बनी खूनी जंग की वजह
प्रेमसागर राम के बेटे मुकेश कुमार को जब इस बात का पता चला तो वो मौके पर पहुंचा। अपने खेत पर कब्जा होते देख मुकेश का खून खौल गया।
उसने तत्काल इसका विरोध किया। बस फिर क्या था, दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
पहले तो सिर्फ जुबानी जंग थी, लेकिन धीरे-धीरे माहौल इतना गरमा गया कि सब्र का बांध टूट गया। चश्मदीदों के मुताबिक, जिस जमीन को लेकर ये सारा फसाद हो रहा था, उस पर दोनों ही पक्ष अपना-अपना दावा ठोक रहे थे।
यानी, एक विवाद सुलझने की बजाय और उलझता चला गया।
बात सिर्फ बहस तक नहीं रुकी। कुछ ही देर में दोनों तरफ से लोग आमने-सामने आ गए।
फिर वही हुआ जिसका डर था। लाठी-डंडे निकल आए और देखते ही देखते पूरा इलाका युद्ध के मैदान में बदल गया।
वहां अफरा-तफरी मच गई। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।
तभी अचानक हमलावरों ने अपने इरादे और खतरनाक कर दिए।
युवक के सीने पर धारदार हथियार से हमला
घायल पक्ष का आरोप है कि मारपीट के दौरान विरोधी पक्ष के लोग इतने तैश में आ गए कि उन्होंने धारदार हथियार निकाल लिया। उन्होंने बेरहमी से मुकेश कुमार पर हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने सीधे मुकेश के सीने पर चाकू से वार कर दिया। ये हमला इतना भयानक था कि मुकेश वहीं जमीन पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया।
जब मुकेश के पिता प्रेमसागर राम और मां पानपती देवी अपने बेटे को बचाने के लिए आगे बढ़े, तो उन पर भी हमला किया गया। प्रेमसागर राम पर भी चाकू से हमला किया गया, जिससे उनकी उंगली में गहरी चोट आ गई।
वहीं, पानपती देवी के साथ भी मारपीट की गई।
इस खूनी संघर्ष के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। घायलों को खून से लथपथ देखकर परिजनों और गांववालों के हाथ-पांव फूल गए।
बिना वक्त गंवाए, आनन-फानन में सभी घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया।
डॉक्टरों ने बताया कि तीनों घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। वे अभी भी डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।
पुलिस जांच में जुटी, गांव में तनाव
इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जमीन को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका है, लेकिन इस बार तो सारी हदें पार कर दी गईं।
विरोध करने पर सीधे जानलेवा हमला कर दिया गया। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि अगर इस तरह के भूमि विवादों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में गांव में तनाव और बढ़ सकता है और ऐसे हिंसक झगड़े होते रहेंगे।
उधर, घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
प्राथमिक जांच में पुलिस भी मान रही है कि ये मामला पूरी तरह से जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित पक्ष की तरफ से आवेदन मिलने के बाद, जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सांगवा डीह देउरवा गांव में इस घटना के बाद अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है। हालांकि, पुलिस की मौजूदगी के कारण स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन गांववाले दहशत में हैं।
पुलिस पूरे मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है, ताकि गांव में किसी भी तरह की अप्रिय घटना दोबारा न हो। ग्रामीणों का यही कहना है कि प्रशासन को ऐसे भूमि विवादों को सुलझाने के लिए स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि किसी को अपनी जान खतरे में डालकर इंसाफ न मांगना पड़े।


