चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में इन दिनों कुछ अलग ही कहानी चल रही है। आमतौर पर नेताजी लोग चुनाव प्रचार, रैलियों और सरकारी कामों में ही व्यस्त दिखते हैं, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन सब से हटकर एक हफ्ते का 'मी-टाइम' प्लान किया है। जनता के बीच रहने वाले मान साहब अब एक हफ्ते के लिए बेंगलुरु निकल पड़े हैं, वो भी योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा की शरण में। जी हां, ठीक सुना आपने! पंजाब के मुखिया अब कर्नाटक में रहकर अपने शरीर और मन को 'रिफ्रेश' करने वाले हैं।
ये कोई आम छुट्टी नहीं है, बल्कि एक तरह का 'स्वास्थ्य ब्रेक' है, जहां वो प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में विपश्यना और खास डाइट प्लान के साथ खुद को तरोताजा करेंगे। पिछले काफी समय से मुख्यमंत्री का शेड्यूल एकदम 'फुल-टाइट' चल रहा था।
लगातार राजनीतिक कार्यक्रम, ताबड़तोड़ प्रशासनिक बैठकें और सरकारी गतिविधियों में उनकी व्यस्तता चरम पर थी। इस भागदौड़ भरी जिंदगी ने उन्हें थोड़ी थकान महसूस कराई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम और स्वास्थ्य सुधार की सलाह दी।
अब उसी सलाह पर अमल करते हुए, वो बेंगलुरु के लिए उड़ान भर चुके हैं।
बेंगलुरु में क्या होगा 'मान' का रूटीन?
बेंगलुरु पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में अपना डेरा डालेंगे। यहां उनका पूरा ध्यान शरीर की शुद्धि, योग और गहन ध्यान पर रहेगा।
प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत उन्हें एक विशेष आहार योजना का भी पालन करना होगा, जो उनके शरीर को अंदर से साफ करने और ऊर्जावान बनाने में मदद करेगी। सोचिए, एक मुख्यमंत्री जो रोज जनता की समस्याओं से जूझता है, अब कुछ दिनों के लिए खुद को प्रकृति के हवाले कर देगा।
इस पूरे एक हफ्ते के दौरान, विशेषज्ञ चिकित्सक लगातार उनकी सेहत पर नजर रखेंगे। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण होंगे और जरूरत के हिसाब से उनके उपचार और डाइट प्लान में भी बदलाव किए जा सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो मान साहब विपश्यना और ध्यान के कई सत्रों में भी हिस्सा लेंगे। विपश्यना एक प्राचीन भारतीय ध्यान तकनीक है, जो मन को शांत करने और आत्म-निरीक्षण के लिए जानी जाती है।
शायद इसी के जरिए वो अपने व्यस्ततम जीवन से उपजे तनाव को दूर करना चाहते हैं।
छुट्टी पर जाने से पहले की 'टेंशन खत्म' तैयारी
आप सोच रहे होंगे कि मुख्यमंत्री अगर छुट्टी पर जा रहे हैं, तो राज्य के काम-काज का क्या होगा? लेकिन भगवंत मान ने इस बात का भी पूरा ख्याल रखा है। बेंगलुरु रवाना होने से पहले उन्होंने एक-एक कर राज्य के सभी जरूरी काम निपटाए।
कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई, ताकि उनकी गैरमौजूदगी में कोई काम अटके नहीं। उन्होंने कई योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन भी किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि विकास की गाड़ी पटरी पर दौड़ती रहे।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अपनी अनुपस्थिति में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर ली थीं। उन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी विभाग सामान्य रूप से काम करते रहें।
इससे यह साफ हो जाता है कि भले ही मुख्यमंत्री खुद शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन राज्य का प्रशासन बिना किसी बाधा के चलता रहेगा।
सरकार चलेगी 'ऑटोपायलट' मोड पर?
अब सवाल ये भी है कि क्या मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में सरकार 'ऑटोपायलट' मोड पर चलेगी? सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। बेशक मुख्यमंत्री एक हफ्ते के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहेंगे, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो सरकार से बिल्कुल कट जाएंगे।
आधुनिक तकनीक के इस दौर में, भगवंत मान लगातार अपने अधिकारियों के साथ संपर्क में रहेंगे। जरूरत पड़ने पर वो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य माध्यमों से महत्वपूर्ण निर्णय लेते रहेंगे।
ये मुख्यमंत्री का एक ऐसा कदम है, जो बताता है कि स्वास्थ्य सिर्फ आम आदमी के लिए नहीं, बल्कि देश के बड़े से बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के लिए भी उतना ही जरूरी है। लगातार तनाव और काम के बोझ के बीच खुद को रिचार्ज करना बेहद अहम है।
उम्मीद है कि एक हफ्ते बाद भगवंत मान नई ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ पंजाब लौटेंगे और फिर से जनसेवा में जुट जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस 'रिफ्रेश' ब्रेक का उनके काम और फैसलों पर क्या असर पड़ता है।


