चंडीगढ़: पंजाब की सियासत आजकल एक अनोखी 'छुट्टी' को लेकर चर्चा में है. मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो अक्सर पंजाब के मंचों पर दहाड़ते और सरकारी कामों में मशगूल रहते हैं, उन्होंने अब फोन-कॉल, सरकारी बैठकों और सियासी गहमागहमी से दूरी बनाकर 'सेहत' की तलाश में एक नया रास्ता पकड़ा है. जी हाँ, जनाब पूरे एक हफ्ते के लिए बेंगलुरु के एक शांत प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में डेरा डालने गए हैं, जहाँ उनका ठिकाना योग, ध्यान और कुदरती उपचार का संगम होगा.
ये खबर सुनने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन एक मुख्यमंत्री का यूं सारे राजनीतिक झमेलों से हटकर खुद के लिए वक्त निकालना, वो भी योग और प्राकृतिक चिकित्सा के लिए, ये वाकई में पंजाब की राजनीति में एक नई बात है. अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मान साहब को इस 'हेल्थ ब्रेक' की ज़रूरत पड़ गई? क्या है बेंगलुरु का ये प्लान और पंजाब में सरकार कैसे चलेगी उनकी गैरमौजूदगी में?
क्यों पड़ी इस ब्रेक की ज़रूरत?
दरअसल, पिछले काफी समय से मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार 'फुल स्पीड' में चल रहे थे. कभी पंजाब के गाँव-गाँव में सरकारी स्कीमों का प्रचार, तो कभी दिल्ली-मुंबई में बड़े निवेशकों को पंजाब लाने की कवायद.
प्रशासनिक बैठकों का लंबा सिलसिला, फाइलें निपटाना, जनता के बीच लगातार रहना..
. ये सब मिला जुलाकर बहुत थकाने वाला काम होता है.
सूत्रों की मानें तो इस लगातार भागदौड़ और व्यस्त दिनचर्या के चलते उन्हें थकान की शिकायत हुई थी.
फिर हुआ ये कि चिकित्सकों ने उन्हें सलाह दी कि थोड़ा रुककर शरीर और मन, दोनों को आराम दिया जाए. इसी सलाह पर अमल करते हुए मुख्यमंत्री मान ने एक हफ्ते का ये खास 'स्वास्थ्य कार्यक्रम' तय किया है.
मतलब, अब कोई सियासी बयानबाजी नहीं, कोई चुनावी रैली नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ अपने शरीर और दिमाग को तरोताजा करने पर फोकस.
बेंगलुरु में क्या होगा खास?
तो अब बेंगलुरु में क्या होने वाला है? यहाँ के एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में भगवंत मान 'डिटॉक्स मोड' में रहेंगे. इसका सीधा-सीधा मतलब ये है कि राजनीतिक भाषणों और प्रशासनिक तनाव से पूरी तरह छुट्टी.
सुबह की शुरुआत योग से होगी, दिनभर ध्यान के कई सत्रों में वो हिस्सा लेंगे और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सख्त निगरानी में एक विशेष आहार योजना का पालन करेंगे.
यह प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति शरीर की शुद्धि पर केंद्रित होती है, जिसमें शरीर से टॉक्सिन्स निकालने और उसे अंदर से मजबूत बनाने पर जोर दिया जाता है. इस दौरान उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा.
ज़रूरत के हिसाब से उपचार और डाइट प्लान में भी बदलाव किया जा सकता है. कहा जा रहा है कि विपश्यना और ध्यान के गहरे सत्रों में भी वो हिस्सा लेंगे, जो मन की शांति और एकाग्रता के लिए जाने जाते हैं.
एक हफ़्ते तक क्या करेंगे मान?
सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि इस एक हफ्ते के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे. उनके सभी तयशुदा कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं, ताकि वे पूरी तरह से अपने स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान केंद्रित कर सकें.
मतलब, कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, कोई उद्घाटन समारोह नहीं, और न ही कोई जनसभा. यह पूरी तरह से उनके निजी स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए समर्पित समय है.
इस अवधि में वे अपने मोबाइल फोन और अन्य संचार उपकरणों से भी एक निश्चित दूरी बनाए रखेंगे, ताकि विपश्यना और प्राकृतिक चिकित्सा के उद्देश्यों को पूरी तरह से प्राप्त किया जा सके. यह एक तरह से खुद को 'रीसेट' करने जैसा है, ताकि वे नई ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ पंजाब की सेवा में लौट सकें.
रवाना होने से पहले के इंतज़ाम
लेकिन, पंजाब का काम कैसे चलेगा मुख्यमंत्री मान की गैरमौजूदगी में? भला भगवंत मान ऐसे ही थोड़ा न चले जाते! बेंगलुरु रवाना होने से पहले उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनकी अनुपस्थिति में राज्य के विकास कार्य प्रभावित न हों. उन्होंने राज्य की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की गहन समीक्षा की.
इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन भी किया और अधिकारियों को साफ-साफ निर्देश दिए कि उनकी एक हफ्ते की छुट्टी के दौरान भी विकास की रफ्तार धीमी नहीं पड़नी चाहिए. उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने काम जारी रखने और किसी भी तरह की देरी से बचने की सख्त हिदायत दी.
शासन व्यवस्था पर क्या असर?
प्रशासनिक गलियारों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में भी सभी सरकारी विभाग सामान्य रूप से काम करते रहेंगे. राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पहले की तरह ही सुचारू रूप से चलती रहेगी.
अधिकारियों को अपने स्तर पर जरूरी फैसले लेने के अधिकार दिए गए हैं, ताकि कामकाज में कोई रुकावट न आए.
हालांकि, सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि अगर कोई बेहद संवेदनशील या महत्वपूर्ण मामला सामने आता है, जिसकी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बिना निपटना संभव न हो, तो भगवंत मान अधिकारियों के साथ संपर्क में रहकर आवश्यक निर्णय भी ले सकते हैं. कुल मिलाकर, छुट्टी उनकी निजी है, लेकिन पंजाब की सरकार अपनी गति से चलती रहेगी और मुख्यमंत्री अपनी सेहत का ख्याल रखकर और भी मजबूत होकर लौटेंगे.


